Iran-US Controversy : ईरान और अमेरिका के बीच में विवाद चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका ने हाल ही में ईरानी ड्रोन पर हमला करके उसे तबाह कर दिया था. इसी बीच खबर सामने आई है कि दोनों देश जल्द बातचीत कर सकते हैं.
Iran-US Controversy : ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहे विवाद के बादल अब काफी घने हो गए हैं. एक तरफ जहां पर ईरानी ड्रोन और अमेरिकी एयरक्राफ्ट में नई दौड़ शुरू हो गई है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक गलियारों में खींचतान भी शुरू हो गई है. इस्लामिक राज्य ने बुधवार को बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुक्रवार को ओमान में हो सकती है. हालांकि, अभी ओमान ने स्वीकार ने नहीं स्वीकार किया है कि वह बातचीत की मेजबानी करेगा. दूसरी तरफ अमेरिका ने भी स्वीकार नहीं किया है कि बातचीत ओमान में होगी. बता दें कि इससे पहले भी परमाणु संधि को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और वह असफल साबित हुईं थीं.
ईरान करना चाहता है ओमान में चर्चा
ईरान की बातों की अभी अमेरिका ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन व्हाइट हाउस ने यह जरूर कहा है कि उसे उम्मीद है कि बातचीत होगी. अमेरिका ने मंगलवार को एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया और ईरान ने अमेरिकी झंडे वाले जहाज को रोकने की कोशिश की. साथ ही अब ईरान अब तुर्किए की जगह ओमान की खाड़ी के पास मस्कट में वार्ता करना चाहता है. ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब पूरी दुनिया की नजरें न्यूक्लियर डील की बहाली पर टिकी हैं.
द्विपक्षीय वार्ता चाहता है ईरान
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को अरब सागर में अब्राहम लिंकन युद्धवाहक पोत के पास आक्रामक तरीके से ईरानी ड्रोन को मार गिराया. वहीं, ट्रंप ने कहा कि इस समय हम ईरान से बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने विस्तार से बताने के लिए मना कर दिया और न ही यह बताया कि वह कहां पर चर्चा करने वाले हैं. वहीं, सूत्रों से पता है कि बातचीत के लिए डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आरागची हिस्सा लेंगे.
तुर्किए की जगह ओमान क्यों?
ईरान का ओमान को चुनना कोई इत्तेफाक नहीं है. ओमान दशकों से ईरान और पश्चिम के बीच खामोश मध्यस्थ की भूमिका निभाता आया है. ईरान का मानना है कि तुर्किए का झुकाव कई बार NATO और क्षेत्रीय राजनीति पर होता है. साथ ही ओमान की तटस्थता ईरान को काफी सहज और भरोसेमंद लगती है. उसे डर है कि तुर्किए जैसे मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा और मिसाइल प्रोग्राम जैसे मुद्दे शामिल किए जा सकते हैं. हालांकि, ईरान इन्हें अपनी संप्रभुता को खतरा मानता है.
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News Source: PTI
