Dearness Allowance: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार को 2008 से 2019 की अवधि के लिए अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) का भुगतान करने का निर्देश दिया.
Dearness Allowance: पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. DA पर कर्मचारियों की बड़ी जीत मानी जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार को 2008 से 2019 की अवधि के लिए अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) का भुगतान करने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह 6 मार्च तक अपने कर्मचारियों को बकाए 11 साल के महंगाई भत्ता का 25 प्रतिशत भुगतान कर दे. पीठ ने कहा कि महंगाई भत्ता प्राप्त करना कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है. अपीलकर्ता राज्य के कर्मचारी इस फैसले के अनुसार वर्ष 2008-2019 की अवधि के लिए बकाया राशि के भुगतान के हकदार होंगे. शीर्ष न्यायालय ने कहा कि महंगाई भत्ता कल्याणकारी राज्य के हाथों में सुरक्षा का एक व्यावहारिक साधन है, जो अपने कर्मचारियों को बढ़ती कीमतों के प्रतिकूल प्रभावों से बचाता है.
पहली किस्त का भुगतान 31 मार्च तक करें
न्यायालय ने कहा कि महंगाई भत्ता कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है, बल्कि न्यूनतम जीवन स्तर बनाए रखने का एक साधन है. इस मामले में कोर्ट ने एक समिति का भी गठन किया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा, उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान, न्यायाधीश गौतम भादुड़ी और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा नामित उनके विभाग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. कहा गया कि समिति के निर्णय के अधीन पहली किस्त का भुगतान 31 मार्च, 2026 तक किया जाए. पीठ ने यह स्पष्ट किया कि इस मुकदमे के लंबित रहने के दौरान सेवानिवृत्त हुए राज्य के कर्मचारी भी इसके अनुसार लाभ के हकदार होंगे. सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को पहली किस्त के भुगतान के बाद स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और अनुपालन के लिए मामले को 15 अप्रैल को सूचीबद्ध किया.
कुल बकाया महंगाई भत्ता लगभग 41,000 करोड़
वकीलों के अनुसार, कुल बकाया महंगाई भत्ता लगभग 41,000 करोड़ रुपये है. विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल सरकार के कुछ कर्मचारियों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर केंद्र सरकार के अपने समकक्षों के समान दर पर महंगाई भत्ता और लंबित बकाया की मांग की. मई 2022 में उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया और राज्य को अपने महंगाई भत्ते को केंद्रीय दरों के अनुरूप करने का निर्देश दिया. हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ने नवंबर 2022 में सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करके उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी. तब से राज्य ने महंगाई भत्ता (DA) में केवल मामूली वृद्धि लागू की है, जो केंद्र सरकार की दरों के अनुरूप नहीं है. अप्रैल 2025 तक, जहां केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिलता है, वहीं पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों को हाल ही में 4 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद केवल 18 प्रतिशत डीए मिलता है.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
