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अदालत का फैसला: केवल पिस्तौल तानना हत्या के प्रयास का पक्का सबूत नहीं, आरोपी को किया बरी

by Sanjay Kumar Srivastava
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अदालत का फैसला: केवल पिस्तौल तानना हत्या के प्रयास का पक्का सबूत नहीं, आरोपी को किया बरी

Court Decision: दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में पुलिसकर्मी पर हमला करने वाले आरोपी को हत्या के प्रयास (धारा 307) से बरी कर दिया है.

Court Decision: दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में पुलिसकर्मी पर हमला करने वाले आरोपी को हत्या के प्रयास (धारा 307) से बरी कर दिया है. अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि मात्र पिस्तौल तानना जान से मारने के निश्चित इरादे का प्रमाण नहीं है. हालांकि, आरोपी को अवैध हथियार और कारतूस रखने के लिए शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया. अदालत के अनुसार, केवल हथियार दिखाने से यह सिद्ध नहीं होता कि मंशा हत्या करने की ही थी. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ 2020 में पुलिस छापे के दौरान हेड कांस्टेबल राजेश कुमार पर पिस्तौल तानने के आरोपी सागर उर्फ ​​रिंकू के मामले की सुनवाई कर रहे थे. 23 जनवरी को अपने आदेश में न्यायालय ने कहा कि हेड कांस्टेबल राजेश पर केवल पिस्तौल तानने मात्र से, बिना किसी अन्य बात के, स्वतः ही हत्या करने के निश्चित इरादे का संकेत नहीं माना जा सकता है और न ही इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि अन्य पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप न किया होता तो आरोपी पिस्तौल का ट्रिगर दबा देता.

हेड कांस्टेबल को दिखाया था पिस्तौल

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस को 14 जुलाई, 2020 को सूचना मिली कि आरोपी सागर भारतीय विद्या पीठ के आसपास किसी वारदात को अंजाम देने के इरादे से मौजूद है. इस बात की जानकारी पर जब पुलिस उसके घर पर पहुंची तो सागर ने अपनी पिस्तौल निकाल ली थी. जब सागर ने हेड कांस्टेबल राजेश कुमार पर पिस्तौल तानी तो पुलिस ने उसे काबू कर लिया. न्यायालय ने कहा कि यह भी संभव है कि आरोपी का इरादा केवल पुलिसकर्मी को डराना हो, न कि उसे गोली मारने या जान से मारने का. न्यायाधीश ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी का कृत्य हत्या के प्रयास के लिए आवश्यक सीमा से अधिक था. उपरोक्त के आलोक में, धारा 307 आईपीसी (हत्या का प्रयास) के नियम संतुष्ट नहीं होते हैं.

आरोपी के पास मिला एक अवैध पिस्तौल

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी की तलाशी में तीन जिंदा कारतूसों वाली पिस्तौल और तीन अन्य जिंदा कारतूस बरामद किए गए. पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 186 (लोक सेवक को बाधा पहुंचाना), 353 (लोक सेवक पर हमला), 307 (हत्या का प्रयास), 34 (सामान्य इरादा) और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 (कब्जा और तस्करी) और 27 (हथियारों का उपयोग) के तहत एफआईआर दर्ज की गई. न्यायालय ने पाया कि आरोपी के पास एक अवैध पिस्तौल और आठ जिंदा कारतूस थे. उसे शस्त्र अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया. आरोपी सागर उर्फ ​​रिंकू धारा 25(1बी) (अवैध रूप से आग्नेयास्त्र रखना) के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराए जाने योग्य है. अदालत ने कहा कि और धारा 27(1) (हथियार का अवैध उपयोग) शस्त्र अधिनियम की धारा 5(1) के साथ पढ़ी जानी चाहिए. अब अदालत 29 जनवरी को सजा की अवधि पर फैसला सुनाएगा.

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News Source: Press Trust of India (PTI

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