CM Yogi Action: मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में धांधली पर सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाया है. योगी ने समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक को निलंबित कर दिया है.
CM Yogi Action: मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में धांधली पर सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाया है. योगी ने समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक को निलंबित कर दिया है. योगी की इस कार्रवाई से नौकरशाहों में हड़कंप मच गया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत पाठ्यक्रम समन्वयकों (course coordinators) के चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद सामाजिक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक (JD) को निलंबित कर दिया है. शासन द्वारा की गई जांच के दौरान लापरवाही के प्रथम दृष्टया सबूत सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील कुमार बिसेन को निलंबित कर दिया गया है. उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं. आदेश में कहा गया है कि निलंबन की अवधि के दौरान बिसेन निदेशालय से जुड़े रहेंगे और नियमों के अनुसार उन्हें निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा.
विभागीय फाइलों से गायब थे आवश्यक दस्तावेज
यह कार्रवाई समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण को भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के संबंध में प्राप्त एक गोपनीय शिकायत के बाद की गई है. मंत्रालय ने कहा कि इसके बाद जांच की गई, जिसमें संयुक्त निदेशक को दोषी पाया गया. मंत्री ने कहा कि किसी भी भ्रष्ट अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी. धांधली पर मंत्री ने बताया कि उम्मीदवारों के मूल प्रमाण पत्रों का सरकारी रिकॉर्ड से ठीक से सत्यापन नहीं किया गया था. साक्षात्कार और चयन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज विभागीय फाइलों से गायब थे. साक्षात्कार और सत्यापन प्रक्रिया की निगरानी के लिए गठित समितियों द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. कुछ मामलों में चयन संबंधी सिफारिशें संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर की गईं, जिससे योजना की पारदर्शिता प्रभावित हुई.
69 में केवल 21 ही पाए गए योग्य
29 अक्टूबर, 2025 को प्राप्त शिकायत मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत राज्य भर में संचालित कोचिंग केंद्रों के लिए पाठ्यक्रम समन्वयकों की आउटसोर्सिंग आधारित भर्ती में अनियमितताओं से संबंधित थी. जांच में पता चला कि नियमों के अनुसार, पाठ्यक्रम समन्वयक के पद के लिए यूपी पीसीएस मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य था. हालांकि, परीक्षा उत्तीर्ण न करने वाले कई उम्मीदवारों को नियुक्त कर दिया गया. बयान में कहा गया है कि जांच किए गए 69 उम्मीदवारों में से केवल 21 ही योग्य पाए गए. विभाग राज्य भर में विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए सीएम अभ्युदय कोचिंग केंद्र संचालित करता है, जहां उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
