Ujjain News: उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में बीते कुछ दिनो में 11 बच्चों की मौत के बाद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस दौरान लाइव टाइम्स की टीम ग्राउंड पहुंची और घटना के बारे में जानने की कोशिश की.
Ujjain News: मध्य प्रदेश के सेवाधाम आश्रम से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. एक समय जिस छत को बेसहारा बच्चों का सेवाधाम कहा जाता था, वहां पर बीते 50 दिनों में 11 मासूम बच्चों की मौत हो गई. अब सवाल उठ रहा है कि क्या ये मौतें कुदरती हैं या व्यवस्था की लापरवाही ने इन बच्चों की जान ली है. इस जगह पर लाइव टाइम्स की टीम पहुंची और परिस्थियां का आकलन किया. लाइव टाइम्स के रिपोर्टर नितिन ठाकुर ने बताया कि एक तरफ जहां हाई कोर्ट के नोटिस के बाद हड़कंप मचा है तो दूसरी तरफ 11 मासूम बच्चों की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश हो रही है. 5 एकड़ में फैले इस खूबसूरत परिसर आज सवालों के घेरे में है. 20 नवंबर, 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच यहां पर 11 बच्चों की मौत हो गई थीं. अगर बीते एक साल का आंकड़ा देखें तो 17 बच्चे दम तोड़ चुके हैं.
एक डरावनी हकीकत आई सामने
लाइव टाइम्स की पड़ताल में आश्रम का दोहरा चेहरा सामने आया. एक तरफ हरियाली, मंदिर और सद्गुरु स्मार्ट क्लास जैसी आधुनिक सुविधाएं दिखीं तो दूसरी तरफ एक डरावनी हकीकत भी नजर आई. निरीक्षण के दौरान कई पलंगों पर गद्दे गायब मिले. बता दें यहां 6 से 16 साल के वो बच्चे रहते हैं जो कुष्ठ रोग, विकलांगता या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. इस दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मरने वाले अधिकांश बच्चे वही थे, जिन्हें डेढ़ साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम में हुई मौतों के बाद यहां शिफ्ट किया गया था. आश्रम के संचालक सुधीर भाई गोयल से जब बात हुई तो उन्होंने कहा कि लापरवाही हमारी नहीं है, जो 17 बच्चे मृत हुए हैं, वे इंदौर के युगधाम आश्रम से पहले ही गंभीर स्थिति में आए थे.
सरकार से नहीं मिलती कोई मदद
संचालक ने आगे कहा कि पूरे प्रदेश के बच्चे यहां आते हैं, लेकिन सरकार से कोई मदद नहीं मिलती. हम अपनी तरफ से व्यवस्था ठीक रखते हैं. इस आश्रम के भले ही संचालक पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन सरकारी चरक अस्पताल के रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी कह रहे हैं. आपको बताते चलें कि दिसंबर में 8 और जनवरी में 2 बच्चों की मौत हुई. साथ ही अब मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है. अदालत ने मुख्य सचिव और उज्जैन कलेक्टर को नोटिस जारी कर पूछा है कि इतनी मौतें क्यों हुईं.
जिला कलेक्टर को जारी किया नोटिस
दूसरी तरफ सवाल अब यह खड़ा होता है कि क्या ये बच्चे एनीमिया और कुपोषण का शिकार थे या फिर इन्हें समय पर इलाज नहीं मिला. सेवाधाम के बगीचे जितने आकर्षक हैं, क्या उनके पीछे मासूमों की चीखें दब गई हैं. हाईकोर्ट ने 12 मार्च तक का समय दिया है. जवाब देना होगा, क्योंकि ये सिर्फ आंकड़े नहीं, वो मासूम थे जिनका इस दुनिया में कोई नहीं था.
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