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SYL पर पंजाब सरकार का सैनी पर हमला, बजट में फंड न होने पर उठाए सवाल, ‘हरियाणा मॉडल’ पर बरसे चीमा

by Sanjay Kumar Srivastava
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SYL मुद्दे पर पंजाब सरकार का हरियाणा पर तीखा हमला, बजट में फंड न होने पर उठाए सवाल

SYL Canal Controversy: सतलुज यमुना लिंक नहर मुद्दे पर भगवंत मान सरकार ने हरियाणा के नायब सिंह सैनी सरकार पर हमला बोला है.

SYL Canal Controversy: सतलुज यमुना लिंक नहर मुद्दे पर भगवंत मान सरकार ने हरियाणा के नायब सिंह सैनी सरकार पर हमला बोला है. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर मुद्दे पर मंगलवार को हरियाणा की भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि हाल ही में पेश किए गए बजट में सीमावर्ती राज्य में 2027 के चुनावों के मद्देनजर परियोजना के लिए कोई धनराशि नहीं रखी गई है. उनकी टिप्पणी को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पंजाब की लगातार यात्राओं और पड़ोसी राज्य के लोगों के सामने अपने शासन के मॉडल को आप के शासन के मॉडल के विकल्प के रूप में पेश करने के रूप में देखा जा रहा है.

हरियाणा ने SYL के लिए नहीं रखा कोई बजट

हरियाणा की विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और इनेलो ने दावा किया कि बजट में पंजाब से एसवाईएल पानी का राज्य का हिस्सा लेने का कोई जिक्र नहीं है. मंगलवार को एसवाईएल नहर मुद्दे पर एक सवाल का जवाब देते हुए चीमा ने कहा कि हर साल वे (हरियाणा सरकार) सतलुज यमुना लिंक नहर के लिए धन रखते हैं. लेकिन इस साल उन्होंने पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ऐसा नहीं किया. पंजाब सरकार कहती रही है कि राज्य के पास दूसरों के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और वह सिंधु जल में अपना वैध हिस्सा मांग रही है. दूसरी ओर, हरियाणा सरकार नदी जल में अपने हिस्से की मांग कर रही है, जो कि एसवाईएल नहर के निर्माण न होने के कारण नहीं मिल रहा है. पिछले मई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को नहर पर दशकों पुराने विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए केंद्र के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया था.

हरियाणा मॉडल पर बरसे चीमा

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनके हरियाणा समकक्ष नायब सिंह सैनी ने 27 जनवरी को एसवाईएल नहर मुद्दे पर चर्चा की थी. उस बैठक के दौरान मान ने कहा था कि उनकी सरकार एसवाईएल नहर मुद्दे के पारस्परिक रूप से सहमत समाधान को आगे बढ़ाते हुए जल विवाद में राज्य के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. विवादास्पद मुद्दों पर बैठक में कोई सहमति नहीं थी. तब दोनों मुख्यमंत्रियों ने फैसला किया था कि दोनों राज्यों के अधिकारी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करेंगे और उन्हें इसकी प्रगति के बारे में जानकारी देंगे. दोनों राज्यों के बीच रावी और ब्यास नदियों से पानी के प्रभावी बंटवारे के लिए एसवाईएल नहर की कल्पना की गई थी. इस परियोजना में 214 किलोमीटर लंबी नहर की परिकल्पना की गई थी, जिसमें से 122 किलोमीटर पंजाब में और शेष 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाई जानी थी. हरियाणा ने अपने क्षेत्र में परियोजना पूरी कर ली है, लेकिन पंजाब, जिसने 1982 में काम शुरू किया था, ने इसे रोक दिया.

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News Source: PTI

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