Home Top News 12 साल से लाश बनकर जी रहे हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु की मंजूरी, SC का ऐतिहासिक फैसला

12 साल से लाश बनकर जी रहे हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु की मंजूरी, SC का ऐतिहासिक फैसला

by Neha Singh
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Harish Rana Euthanasia

Harish Rana Euthanasia: सुप्रीम कोर्ट ने 31 साल के हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी है. हरीश राणा करीब 12 साल से कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जी रहे हैं.

11 March, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए पहली बार किसी को इच्छामृत्यु की मंजूरी दी है. यह मंजूरी 31 साल के हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी, जो 12 साल से ज़्यादा समय से कोमा में हैं. यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के कॉमन कॉज फैसले को लागू किया है, जिसके तहत व्यक्ति को गरिमा के साथ मरने का मौलिक अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया के तरीके को मंजूरी दी है, जिसमें व्यक्ति के लिए उसका आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट हटा दिया गया. पैसिव यूथेनेशिया एक ऐसा काम है जिसमें किसी मरीज का लाइफ सपोर्ट या उसे ज़िंदा रखने के लिए जरूरी इलाज रोककर या हटाकर जानबूझकर उसे मरने दिया जाता है.

गिरने के बाद कोमा में चले गए थे हरीश

हरीश राणा को 2013 में एक बिल्डिंग की चौथी मंजिल से गिरने के बाद सिर में चोटें आई थी और वह पूरी तरह से दिव्यांगता के शिकार हो चुके थे. हादसे के बाद हरीश के माता पिता ने कई अस्पतालों के चक्कर लगाएं ताकि उनका बेटा ठीक हो सके. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से उनकी दिमाग की नसें सूख चुकी थी. वह 12 साल से ज्यादा समय से कोमा में हैं और जिंदा लाश बनकर जी रहे हैं. अब उन्हें गरिमा के साथ मरने के इजाजत मिल गई है.

माता पिता से मिले जज

जस्टिस जे बी पारदीवाला और के वी विश्वनाथन की बेंच ने AIIMS को राणा को पैलिएटिव केयर में एडमिशन देने का निर्देश दिया ताकि मेडिकल ट्रीटमेंट वापस लिया जा सके. बेंच ने कहा कि यह पक्का किया जाना चाहिए कि इसे एक खास प्लान के साथ वापस लिया जाए ताकि गरिमा बनी रहे. सुप्रीम कोर्ट ने पहले हरीश राणा के माता-पिता से मिलने की इच्छा जताई थी. जजों ने AIIMS-दिल्ली के डॉक्टरों के एक सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड की राणा की मेडिकल हिस्ट्री वाली रिपोर्ट देखी थी और कहा था कि यह एक “दुखद” रिपोर्ट है.

‘और पीड़ा नहीं दे सकते’

प्राइमरी मेडिकल बोर्ड ने मरीज की हालत देखने के बाद, उसके ठीक होने की बहुत कम उम्मीद पर जोर दिया था. कोर्ट ने 11 दिसंबर को कहा था कि प्राइमरी मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, वह व्यक्ति बहुत खराब हालत में है और उन्हें अब और दर्द में नहीं रखना चाहिए. जस्टिस पारदीवाला ने कहा, ‘यह हमारे लिए एक मुश्किल फैसला है, लेकिन हम उसे हमेशा दर्द में नहीं रख सकते. यह निर्णय अब हमें मरने के अधिकार के संदर्भ में मार्ग दिखाता है. हरीश राणा को मानवीय तरीके से CAN (मेडिकल सपोर्ट) वापस लेने की अनुमति है.’

News Source: PTI

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