Jaggi murder case: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने चर्चित NCP नेता रामअवतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में अमित जोगी को दोषी करार दिया है.
Jaggi murder case: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने चर्चित NCP नेता रामअवतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है. गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने 2007 के ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था. अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. सीबीआई के वकील वैभव ए. गोवर्धन ने बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के बाद आया है जिसमें मामले की गंभीरता और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश को देखते हुए कार्यवाही फिर से शुरू करने को कहा गया था.
सूबे की राजनीति में हलचल तेज
ज्ञात हो कि रामअवतार जग्गी की हत्या लगभग 23 साल पहले हुई थी. वर्तमान में अमित जोगी ‘जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)’ के अध्यक्ष हैं. इस फैसले से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. HC के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमित जोगी ने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है क्योंकि उन्हें पहले बरी कर दिया गया था और अब बिना सुनवाई की अनुमति के दोषी घोषित कर दिया गया. उन्होंने उम्मीद जताई कि सच्चाई सामने आएगी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा. कहा कि मुझे न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है और मैं शांति, विश्वास और धैर्य के साथ आगे बढ़ूंगा. उधर, दिवंगत नेता रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सच्चाई की जीत हुई है.
पिता को आखिरकार मिला न्यायः सतीश जग्गी
उन्होंने कहा कि आज हनुमान जयंती है. मैं भगवान हनुमान को नमन करता हूं. मेरे परिवार की 20 साल की तपस्या आज सफल हुई है. न्यायपालिका में मेरा विश्वास कायम हुआ है. सत्य की जीत हुई है और मेरे पिता को आखिरकार न्याय मिला है. सतीश जग्गी ने आरोप लगाया था कि उनके पिता की हत्या के पीछे अजीत जोगी और अमित जोगी का हाथ था. मामले की शुरुआत में राज्य पुलिस ने जांच की थी और बाद में इसे सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसने अमित जोगी सहित कई आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. 31 मई, 2007 को रायपुर की एक निचली अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित कर दिया.
ट्रायल कोर्ट ने अमित को कर दिया था बरी
हालांकि, इसने अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया. बाद में सीबीआई ने बरी करने को चुनौती दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने 2011 में देरी के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी. छत्तीसगढ़ सरकार और रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग अपीलें भी खारिज कर दी गईं. पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कहा था कि वह अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगने वाली सीबीआई की याचिका पर नए सिरे से विचार करे. शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय को सीबीआई के आवेदन से निपटने में अधिक उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था और योग्यता के आधार पर याचिका की जांच करनी चाहिए थी.
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News Source: PTI
