History of Major Global Wars: प्रथम विश्व युद्ध से लेकर आज के संघर्षों तक, जानें कैसे युद्धों ने दुनिया की राजनीति, सीमाओं और वर्ल्ड ऑर्डर को हमेशा के लिए बदल दिया.
Introduction
- विश्व युद्ध- I
- विश्व युद्ध-II
- उत्तर कोरिया बनाम दक्षिण कोरिया
- अमेरिका बनाम वियतनाम युद्ध
- सोवियत संघ बनाम अफगान मुजाहिदीन
- भारत-पाकिस्तान संघर्ष
- भारत-चीन युद्ध
- अरब-इजरायल युद्ध
- ईरान-इराक युद्ध
- खाड़ी युद्ध
- इराक युद्ध
- सीरिया का सिविल वॉर
- रूस यूक्रेन जंग
- इजरायल फिलिस्तीन जंग
- अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग
4 April, 2026
युद्ध हमेशा से सीमा, सत्ता और संपत्ति के लिए लड़े गए हैं, लेकिन इसका प्रभाव सीमाओं के बाहर पूरी दुनिया पर पड़ा है. 20वीं सदी की शुरुआत में पहले विश्व युद्ध ने दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज को पूरी तरह बदल दिया. तब से, दुनिया भर में होने वाली जंगों का तरीका भी बदल गया है. दूसरे विश्व युद्ध ने दुनिया को दो खेमों में बांटा और लाखों जानें गईं, लेकिन उसके बाद का दौर “सुपरपावर राइवलरी” और विस्तारवाद के झगड़ों से भरा रहा. कोल्ड वॉर के दौरान, कई युद्ध सीधे तौर पर देशों के बीच नहीं, बल्कि प्रॉक्सी वॉर के तौर पर लड़े गए, जैसे वियतनाम वॉर और कोरियन वॉर. इसके अलावा, एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप में समय-समय पर नई जंग हुई, जिसका असर हर बार पूरी दुनिया पर पड़ा है. आज भी, अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध पूरी दुनिया के लिए चुनौती बने हुए हैं. इसलिए वर्ल्ड वॉर के बाद हुए बड़े युद्धों को समझना न सिर्फ इतिहास को समझने के लिए, बल्कि मौजूदा और भविष्य के वर्ल्ड ऑर्डर को समझने के लिए भी जरूरी है.
विश्व युद्ध- I
प्रथम विश्व युद्ध मानव इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध कहा जाता है, जो 1914 से लेकर 1918 तक चला. इस युद्ध का मुख्य कारण ऑस्ट्रिया-हंगरी के राजकुमार के ऑर्कड्यूक फ्रांज फ्रडिनेंड और उनकी पत्नी की हत्या था. क्योंकि हत्यारा सर्बियाई राष्ट्रवादी था, इसलिए ऑस्ट्रिया ने 28 जुलाई 1914 सर्बिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. धीरे-धीरे दुनिया के बाकी देश भी सर्बिया और ऑस्ट्रिया के साथ युद्ध में कूद पड़े. इस तरह दो वैश्विक गठबंधन बने.
मित्र राष्ट्र : इसमें मुख्य रूप से ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, इटली और जापान शामिल थे. संयुक्त राज्य अमेरिका 1917 में इस गुट में शामिल हुआ.
धुरी शक्तियां : इसमें जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, और ओटोमन साम्राज्य (तुर्की) प्रमुख थे.

हालांकि इतिहासकार युद्ध के मुख्य कारण सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद को बताते हैं. 1917 में जब अमेरिका मित्र राष्ट्र की ओर युद्ध में एंट्री की तो जर्मनी कमजोर पड़ने लगा. जर्मनी को आंतरिक विद्रोह का सामना करना पड़ रहा था. वहीं 1918 में ऑस्ट्रिया-हंगरी, बल्गारिया और ओटोमन साम्राज्य ने हार मानकर अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए थे. जर्मनी जब अकेला और खोखला हो गया, तो उसने भी घुटने टेक दिए. 11 नवंबर 1918 की सुबह युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए.
1919 में वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर हुआ, जिसमें जर्मनी को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया गया और उस पर भारी जुर्माना लगाया गया, जिसे बाद में दूसरे विश्व युद्ध का एक बड़ा कारण माना गया. युद्ध के बाद पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया जैसे कई नए देश बने. पहले विश्व युद्ध के दौरान भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था. लगभग 1.3 मिलियन भारतीय सैनिकों ने मित्र राष्ट्रों की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया, जिनमें से लगभग 74,000 सैनिक शहीद हुए. वहीं कुल मिलाकर दुनिया के 1.5 से 2 करोड़ लोग इस युद्ध में मारे गए थे.
विश्व युद्ध-II
दूसरा विश्व युद्ध 1939 से 1945 तक चला. इस युद्ध के मुख्य कारण वर्साय की संधि की सख्त शर्तें, आर्थिक संकट और जर्मनी में कट्टर राष्ट्रवाद का बढ़ना था. एडॉल्फ हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी ने अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी और विस्तारवादी नीति अपनाई. 1 सितंबर, 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया. इसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. धीरे-धीरे, पिछली बार की तरह दुनिया भर के कई देश युद्ध में शामिल हो गए और दो बड़े गठबंधन बने.
मित्र देश: इनमें मुख्य रूप से यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, सोवियत यूनियन, अमेरिका, पोलैंड और चीन शामिल थे.
धुरी शक्तियां: इनमें जर्मनी, इटली और जापान शामिल थे.

जापान ने 1941 में पर्ल हार्बर पर हमला किया, जिसके बाद अमेरिका युद्ध में शामिल हो गया. स्टेलिनग्राद की लड़ाई और डी-डे जैसी लड़ाइयां निर्णायक साबित हुईं. यूरोप में जर्मनी की हार 1945 में हुई जब एडॉल्फ हिटलर ने आत्महत्या कर ली. अगस्त 1945 में, यूनाइटेड स्टेट्स ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर एटम बम गिराए. इसके बाद जापान ने सरेंडर कर दिया और 2 सितंबर, 1945 को युद्ध खत्म हो गया. करीब 7 से 8.5 करोड़ लोग दूसरे विश्वयुद्ध में मारे गए. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत यूनियन सुपरपावर बनकर उभरे. लगभग 2.5 मिलियन भारतीय सैनिकों ने मित्र राष्ट्रों की ओर से भाग लिया, जिसमें 87,000 सैनिक मारे गए थे.
शीत युद्ध
उत्तर कोरिया बनाम दक्षिण कोरिया
दूसरे विश्व युद्ध के बाद, कोरिया 38th पैरेलल में बंट गया था-उत्तर में सोवियत-समर्थित कम्युनिस्ट सरकार और दक्षिण में US-समर्थित डेमोक्रेटिक सरकार. युद्ध तब शुरू हुआ जब 25 जून, 1950 को उत्तर कोरिया की सेना ने पूरे दक्षिण कोरिया को कम्युनिस्ट शासन के तहत एक करने के इरादे से साउथ कोरिया पर अचानक हमला किया. संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने दक्षिण कोरिया की मदद के लिए सेना भेजी, जबकि चीन और सोवियत यूनियन ने उत्तर कोरिया का साथ दिया. 1951 तक युद्ध ऐसे मोड़ पर पहुंच गया, जहां दोनों में से कोई भी पक्ष निर्णायक जीत हासिल नहीं कर पा रहा था. दोनों ही देशों को भारी नुकसान होने के बाद 27 जुलाई, 1953 को एक युद्ध विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.
अमेरिका बनाम वियतनाम युद्ध
यह युद्ध भी शीत युद्ध का ही एक हिस्सा था. वियतनाम का बंटवारा होने के बाद उत्तर वियतनाम और दक्षिण वियतनाम में युद्ध की शुरुआत हुई. उत्तर वियतनाम में साम्यवादी सरकार को चीन और सोवियत संघ का समर्थन प्राप्त था और दक्षिण वियतनाम को अमेरिका का. उत्तर वियतनाम ने हो ची मिन्ह के नेतृत्व में पूरे देश को एक करने के लिए दक्षिण वियतनाम में विद्रोह को बढ़ावा देना शुरू किया और संघर्ष की शुरुआत की. साम्यवाद का प्रसार रोकने के लिए अमेरिका दक्षिण वियतनाम में अपनी सेना भेजकर मदद की. 1964 के टोंकिन की खाड़ी की घटना के बाद बड़े पैमाने पर युद्ध में कूद गया. दुनिया की महाशक्ति कहा जाने वाला अमेरिका इस युद्ध में कमजोर पड़ रहा था. उत्तर वियतनाम की गुरिल्ला युद्ध की रणनीति ने अमेरिकी सैनिकों को थका दिया था. अमेरिका के अंदर ही जनता युद्ध का भारी विरोध करने लगी थी. 1973 में पेरिस शांति समझौते के बाद अमेरिकी सेना को वापस बुला लिया गया. इसके बाद 30 अप्रैल 1975 में उत्तर वियतनाम ने दक्षिण वियतनाम की राजधानी साइगॉन पर कब्जा कर लिया और देश एक बार फिर एकजुट हो गया. इस युद्ध में 20 से 30 लाख वियतनामी लोग मारे गए थे और करीब 58,000 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे.
सोवियत संघ बनाम अफगान मुजाहिदीन
दिसंबर 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन की कठपुतली सरकार, जिसको बचाने के लिए सोवियत यूनियन ने अफ़गानिस्तान पर हमला कर दिया. इसका मकसद सेंट्रल एशिया में अपना असर बनाए रखना था. अफगान कम्युनिस्ट सरकार ने सोवियत सेना का साथ दिया. इस बीच, मुजाहिदीन (इस्लामिक लड़ाकों) को अमेरिका का साथ मिल गया. पाकिस्तान, सऊदी अरब और चीन ने भी हथियार और पैसे दिए. अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में, सोवियत सेना को मुजाहिदीन से कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. अमेरिका से मिली स्टिंगर मिसाइलों ने सोवियत एयरक्राफ्ट गिरा दिए, जिससे युद्ध का रुख बदल गया. सोवियत इकॉनमी इस लंबे युद्ध का बोझ नहीं उठा सकी. 1988 के जिनेवा समझौते के बाद, सोवियत सेना ने अपनी वापसी शुरू कर दी. आखिरी सोवियत सैनिक 15 फरवरी, 1989 को अफगानिस्तान से निकला. इसके बाद अफगानिस्तान सिविल वॉर में चला गया, जिसमें लगभग 1 से 2 मिलियन अफगान नागरिक और लड़ाके और लगभग 15,000 सोवियत सैनिक मारे गए.
भारत-पाकिस्तान संघर्ष
भारत पाकिस्तान का संघर्ष बंटवारे के बाद से आज तक समाप्त नहीं हुई है. सबसे पहला युद्ध बंटवारे के दो महीने बाद अक्तूबर 1947 में जम्मू-कश्मीर की रियासत को लेकर शुरू हुआ. पाकिस्तान के सैनिकों ने कश्मीर पर हमला बोल दिया था. उस समय कश्मीर के राजा महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए और भारतीय सेना से मदद की गुहार लगाई. भारतीय सेना बचाव के लिए पहुंची. एक साल तक युद्ध चला, जिसमें भारतीय सेना ने लेह, श्रीनगर जैसे महत्वपूर्ण इलाकों को सुरक्षित कर लिया. 1 जनवरी 1949 को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में युद्धविराम लागू हुआ. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और भारतीय कश्मीर के बीच LOC( नियंत्रण रेखा) बनी.
1965 के युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ से हुई, जिसका उद्देश्य कश्मीर के घुसपैठ को बढ़ावा देकर विद्रोह भड़काना था. भारत ने इसके खिलाफ पूर्ण युद्ध की घोषणा कर दी. भारत ने सीमा पार कर लाहौर के ओर कूच कर दिया. जब पाकिस्तान युद्ध में कमजोर पड़ने लगा, तो एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ा. भारतीय सेना को वापस अपनी सीमा पर लौटना पड़ा और 1966 में सोवियत संघ की मध्यस्थता में’ताशकंद समझौता’हुआ.

1971 का युद्ध पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चोट साबित हुआ. पाकिस्तानी सेना पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में लोगों पर अत्याचार कर रही थी, जिस कारण भारत में लाखों शरणार्थी आने लगे थे. 3 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारतीय हवाई अड्डे पर हमला किया, जिसके बाद औपचारिक रुप से युद्ध शुरू हो गया. भारतीय सेना ने ‘मुक्ति वाहिनी’ के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान को घेर लिया. केवल 13 दिनों के अंदर भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए. 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी जनरल नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. इस तरह भारत की ऐतिहासिक जीत हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ.
कारगिल युद्ध की शुरुआत 3 मई, 1999 को हुई. भारतीय सेना को कारगिल की चोटियों पर पाकिस्तानी कब्जे की जानकारी मिली. पाकिस्तान ने (LoC) पार कर टोलोलिंग और टाइगर हिल पर कब्जा कर लिया था. भारत ने अपनी जमीन वापस लेने के लिए’ऑपरेशन विजय’ शुरू किया. भारतीय सेना ने एक-एक कर अपनी चोटियों पर तिरंगा फहराया और पाकिस्तानी ठिकानों पर बमबारी की. पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा. 26 जुलाई 1999 में भारत ने कारगिल की सभी चोटियों पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया. इस जीत की याद में हर साल देश ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाता है.
भारत-चीन युद्ध
1962 में भारत चीन युद्ध भी हुआ, जो मुख्य रूप से सीमा विवाद के कारण लड़ा गया था. तिब्बत पर कब्जा करने के बाद चीन लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के इलाकों में सड़क बना रहा था. 20 अक्तूबर 1962 में, चीन ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश पर एक साथ हमला कर दिया. भारतीय सेना ऊंचाई पर युद्ध के लिए तैयार नहीं थी. सैनिकों के पास भारी बर्फबारी के लिए कपड़े, जूते और मॉडर्न हथियार नहीं थे. भारत के लगभग 20,000 सैनिकों का सामना 80,000 चीनी सैनिकों से था. 18 नवंबर, 1962 को मेजर शैतान सिंह की लीडरशिप में 120 भारतीय सैनिकों ने बहादुरी से हजारों चीनी सैनिकों का मुकाबला किया. चीन ने अचानक 21 नवंबर, 1962 को एकतरफा सीजफायर का ऐलान कर दिया. इस युद्ध में जीत चीन की हुई. चीन ने अक्साई चिन के लगभग 38,000 स्क्वेयर किलोमीटर इलाके पर कब्जा कर लिया.

अरब-इजरायल युद्ध
1948 में इजरायल बनने के बाद, अरब देशों ने कई बार उस पर हमला किया. इसके बाद कई युद्ध हुए (1967, 1973). मुख्य मुद्दा जमीन और फिलिस्तीन था. इजरायल को अमेरिका से समर्थन मिला, जबकि अरब देशों को सोवियत यूनियन से. यह लड़ाई आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
ईरान-इराक युद्ध
1980 में, सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया (बॉर्डर और तेल विवाद). यह युद्ध आठ साल तक चला. दोनों देशों को बाहर से सपोर्ट मिला, लेकिन कोई साफ तौर पर जीतने वाला नहीं था. लगभग 1-2 मिलियन लोग मारे गए.
खाड़ी युद्ध
1990 में, इराक ने कुवैत पर कब्जा कर लिया. जवाब में, US के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हमला किया. इराक हार गया और कुवैत आजाद हो गया. इस युद्ध में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ.
इराक युद्ध
2003 में, US ने इराक पर हमला किया, यह दावा करते हुए कि उसके पास खतरनाक हथियार हैं. सरकार गिर गई, लेकिन देश में लंबे समय तक हिंसा और अस्थिरता बनी रही. लाखों लोग मारे गए हैं.
सीरिया का सिविल वॉर
यह युद्ध 2011 में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के साथ शुरू हुआ था. इसमें कई ग्रुप और देश शामिल हो गए हैं. यह एक मुश्किल “प्रॉक्सी वॉर” बन गया है. अब तक 500,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, और युद्ध अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
रूस यूक्रेन जंग
फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन को युद्ध शुरू हुआ, जो अभी तक चल रहा है. इस जंग का मुख्य कारण यूक्रेन का NATO में शामिल होने प्लान था, जिसके विरुद्ध रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर मिलिट्री हमले कर दिए. अगर यूक्रेन NATO में शामिल हो जाता है, तो पश्चिमी ताकत जैसे अमेरिका रूस के करीब आ जाएंगे. युद्ध के शुरुआती दिनों में, रूस ने कीव पर तेजी से कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन यूक्रेनी सेना ने यह कोशिश नाकामयाब कर दी. इसके बाद लड़ाई पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन तक सीमित हो गई. 2022 के आखिर में, रूस ने यूक्रेन के खार्किव और खेरसॉन इलाकों पर कब्जा कर लिया. 2023 में यूक्रेन ने जमकर रूस पर पलटवार किया, जिसमें दोनों देशों को नुकसान होने लगा और हमलों की रफ्तार धीमी पड़ गई. 2026 में युद्ध अभी भी जारी है, रूस ने पूर्वी यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर कब्जा बनाए रखा है, जबकि यूक्रेन अपने इलाकों को फिर से पाने की कोशिश कर रहा है. दोनों देशों के बीच समय-समय पर हमले और जवाबी हमले होते रहते हैं, लेकिन अभी तक कोई साफ और निर्णायक जीत हासिल नहीं हुई है.

इजरायल फिलिस्तीन जंग
इजरायल फिलिस्तीन जंग की जड़ें 20वीं सदी में ओटोमन साम्राज्य के पतन से जुड़ती हैं. 1948 में इजरायल बनने के बाद यह पहला बड़ा युद्ध हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी बेघर हो गए थे.यह लड़ाई कई दशकों तक चलती रही और 1967 का छह दिन का युद्ध एक अहम मोड़ बन गया, जब इजरायल ने वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया था. संयुक्त राष्ट्र के बीच-बीच में दखल ने संघर्ष को रोका लेकिन यह भी आज भी चल रहा है. युद्ध का नया चरण 2023 में शुरू हुआ, जब हमास ने इजरायल पर हमला किया था. इसके बाद से इजरायल ने मिलिट्री ऑपरेशन लॉन्च किया और हमास जैसे संगठनों के कमांडर को मार गिराया. इजरायल ने पूरे गाजा में तबाही मचा दी. हालांकि, समय के साथ इंटरनेशनल दबाव के कारण दोनों ने 2025 अक्टूबर में सीजफायर का ऐलान किया. बावजूद इसके, हालात पूरी तरह से शांत नहीं हुए हैं. अभी 2026 में गाजा और वेस्ट बैंक में तनाव बना हुआ है. बीच-बीच में हमले होते रहते हैं और पक्की शांति की उम्मीदें कम हैं.
अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग

2026 में अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग ने दुनिया में कोहराम मचा दिया है. यह जंग 28 फरवरी को ऑपरेशन में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के साथ हुई थी, अमेरिका-इजरायल ने ज्वाइंट ऑपरेशन में खामेनेई को मार दिया. इस जंग का मुख्य कारण है ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम. अमेरिका और इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर पावर नहीं बनने देना चाहते. ईरान ने जवाब में कुवैत, कतर और दुबई में मिसाइल और ड्रोन हमलों से अमेरिकी बेस और इज़राइल को निशाना बनाया, जिससे यह झगड़ा पूरे मिडिल ईस्ट में फैल गया. फिलहाल यह पूरी जंग दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी चैनल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर केंद्रित हो गई. ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है, जिससे दुनियाभर को देशों में तेल की किल्लत हो गई और दाम बढ़ गए हैं. अब ट्रंप ईरान को बार-बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का अल्टीमेटम दे रहे हैं, लेकिन युद्ध किसी भी निर्णायक मोड़ पर पहुंचता हुआ नहीं दिख रहा है.
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News Source: PTI
