Home Religious अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य करने से मिलेगा ‘अक्षय फल’, जान लें तिथि, पूजा विधि और महत्व

अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य करने से मिलेगा ‘अक्षय फल’, जान लें तिथि, पूजा विधि और महत्व

by Neha Singh
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Akshaya Tritiya 2026

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया को सनातन धर्म में बहुत शुभ माना जाता है. यह दिन किसी भी प्रकार के मांगलिक काम करने के लिए शुभ होता है. जानें अक्षय तृतीया की तिथि और पूजा विधि.

6 April, 2026

अक्षय तृतीया साल के सबसे शुभ दिनों में से एक है. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहा जाता है. यह त्योहार किसी भी नए काम की शुरुआत करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है.अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है यानी आप इस दिन बिना मुहूर्त देखें विवाह और गृह प्रवेश जैसे कोई भी मांगलिक कार्य कर सकते हैं. दिवाली की तरह इस दिन भी सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है. कई लोगों को अक्षय तृतीया के महत्व के बारे में जानकारी नहीं होती, इसलिए वे इस खास दिन पर कुछ नहीं कर पाते. यहां जानें अक्षय तृतीया की तारीख, पूजा विधि और महत्व.

Akshaya Tritiya 2026

अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया पर गृह प्रवेश, गाड़ी खरीदना, जमीन के सौदे, सोना-चांदी खरीदना और शादी जैसे दूसरे शुभ काम बहुत शुभ माने जाते हैं. अक्षय तृतीया पर देवी लक्ष्मी की सही विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. हर साल इस पवित्र दिन पर उत्तराखंड में गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलते हैं, जिससे चार धाम यात्रा पूरी तरह शुरू हो जाती है. अक्षय तृतीया पर किए गए दान-पुण्य से अक्षय फल मिलता है यानी इसका फल हमेशा मिलता रहता है.

अक्षय तृतीया कब है

पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल पक्ष की तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर खत्म होगी. मध्याह्न तृतीया के नियम के अनुसाल 19 तारीख को दोपहर के समय तृतीया तिथि रहेगी, इसलिए 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाएगा.

Akshaya Tritiya 2026

पूजा विधि

अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर को गंगाजल से साफ करें. अब एक चौकी लगाएं और इस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं. चौकी पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. हाथों में जल अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प करें. इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा पर रोली, हल्दी, चंदन और कुमकुम लगाएं. इसके बाद फूल चढ़ाएं. अब अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएं. अब गेहूं का सत्तू, फल और मिठाई का भोग लगाएं. अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करके पूजा का समापन करें और गलतियों के लिए क्षमा मांगें. पूजा के बाद अपनी क्षमता के अनुसार, गरीबों और ब्राह्मणों को अन्न-फल का दान करें.

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