Home Religious Varuthini Ekadashi पर मिलेगा स्वास्थ्य समस्या से आराम, जानें तिथी, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

Varuthini Ekadashi पर मिलेगा स्वास्थ्य समस्या से आराम, जानें तिथी, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

by Neha Singh
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Varuthini Ekadashi 2026

Varuthini Ekadashi: वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता हैं. वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु के वरह अवतार को समर्पित है. जानें वरुथिनी एकादशी की तिथि और कथा.

5 April, 2026

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व है. हर महीने में 2 एकादशी आती हैं यानी साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं. हर एकादशी का अपना धार्मिक महत्व होता है. वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता हैं. वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु के वरह अवतार को समर्पित है. माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से स्वास्थ्य ठीक होता है और जीवन में सुख और शांति आती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से हजारों यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है. जानें वरुथिनी एकादशी की तिथि और कथा.

वरुथिनी एकादशी कब है?

अक्सर एकादशी की तिथि को लेकर लोगों को कन्फ्यूजन होती है. तिथि के अनुसार व्रत न करने उसका फल नहीं मिलता है. इस साल वैसाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी 13 अप्रैल की सुबह 1 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और 14 अप्रैल को सुबह 1 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार 13अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा. वहीं 14 अप्रैल को व्रत का पारण किया जाएगा. जानें एकादशी का शुभ मुहूर्त कब है.

Varuthini Ekadashi

शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त की बात करें तो इस दिन पूजा और प्रार्थना के लिए कई शुभ मुहूर्त तय किए गए हैं.

  • ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:18 बजे से 5:03 बजे तक रहेगा, जो पूजा और जाप के लिए बहुत शुभ माना जाता है.
  • अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा.
  • विजय मुहूर्त दोपहर 02:30 बजे से 03:21 बजे तक रहेगा
  • गोधुली मुहूर्त शाम 06:45 बजे से 07:07 बजे तक रहेगा.

वरुथिनी एकादशी की कथा

वरुथिनी एकादशी के दिन राजा मानधाता और भालू की पौराणिक कथा जरूर सुननी चाहिए. कथा के अनुसार, राजा मानधाता बहुत बड़े दानी, तपस्वी और भगवान विष्णु के भक्त थे. एक बार वे वन में तपस्या कर रहे थे, तभी वहां एक भालू आ गया और उसने राजा पर हमला कर दिया. भालू ने राजा का पैर काट दिया और घसीटकर ले गया, लेकिन राजा भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहे और अपना धैर्य नहीं खोया. उन्होंने भगवान को याद किया.

भगवान विष्णु राजा को कष्ट में देखकर प्रकट हुए. उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से भालू को मार दिया. लेकिन राजा दुखी हो गए, क्योंकि भालू उनका पैर खा चुका था. विष्णु जी ने कहा ‘हे राजन! दुखी मत हो, तुम मथुरा जाओ और मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो. वरुथिनी एकादशी पर व्रत रखने से तुम्हारे अंग पूरे हो जाएंगे. राजा ने वैसा ही किया और वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गया.’ इसलिए माना जाता है कि वरुथिनी एकादशी पर व्रत करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है.

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News Source: PTI

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