India-China Controversy : भारत और चीन के बीच एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है. चीन ने फिर से शातिराना चाल चलते हुए अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के नाम बदलने की कोशिश की और इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.
India-China Controversy : मिडिल ईस्ट में सीजफायर होने के बाद भारत और चीन एक बार आमने-सामने आते हुए दिख रहे हैं. चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के नाम को बदलने की बात कही है, जिस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है. चीन पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन द्वारा देश की जमीन का नाम बदलने और मनगढ़ंत नाम रखने वाले किसी भी प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है.
द्विपक्षीय संबंधों को करता है कमजोर
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन की तरफ से मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को पूरी तरह से खारिज करता है, जो भारत के क्षेत्र का हिस्सा है. साथ ही झूठे दावे करने और मनगढ़ंत बातें गढ़ने के चीन के ऐसे प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते हैं कि यह स्थान, जिनमें अरुणाचल प्रदेश भी शामिल है वह हमेशा से भारत का हिस्सा रहे हैं. साथ ही यह भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेंगा. उन्होंने आगे कहा कि चीन की तरफ से की गई ऐसी हरकतें भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर करने का काम करती है. अब चीन को ऐसी हरकतें नहीं करनी चाहिए, जो दो देशों के संबंधों में दरार लाने का काम करें. साथ ही आपसी समझ को बेहतर बनाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाएं.
पहले भी बदलें हैं 21 स्थानों के नाम
चीन इससे पहले भी शातिराना चाल चल चुका है और 21 दिसंबर, 2021 में भारत के 21 स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया. चीन ने चालाकी से अरुणाचल प्रदेश के 11 जिलों, जिसमें तवांग से लेकर अंजॉ के स्टैंडर्ड नाम चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी कर दिया गया था. भारत ने उस वक्त कदम की निंदा की थी और कहा था कि जमीनी नाम बदलने से हकीकत नहीं बदल जाती है. भारत ने उस वक्त भी कहा था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा.
राज्यपाल ने भी किया था दौरा
9 अप्रैल, 2026 को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक ने तवांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास खेन्जेमाने का दौरा किया था. वहां उन्होंने सैनिकों का मनोबल बढ़ाया और हर समय सतर्क रहने के लिए प्रोत्साहित भी किया. लोक भवन के एक अधिकारी ने बताया कि यह चौकी काफी दूभर और दुर्गम इलाकों में से एक, जहां पर मौसम भी एक बड़ी चुनौती बना रहता है. यहां पर चौकी का होना भारत की सतर्कता और जुझारूपन का प्रतीक माना जाएगा.
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