Home Latest News & Updates 21 घंटे तक चली चर्चा के बाद भी क्यों विफल हुई US से शांति वार्ता? ईरान ने बताई ये खास वजह

21 घंटे तक चली चर्चा के बाद भी क्यों विफल हुई US से शांति वार्ता? ईरान ने बताई ये खास वजह

by Sachin Kumar 12 April 2026, 12:26 PM IST (Updated 13 April 2026, 12:11 PM IST)
12 April 2026, 12:26 PM IST (Updated 13 April 2026, 12:11 PM IST)
Iran-US Peace Talks

Iran-US Peace Talks : अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंची. इस पर ईरान ने कहा कि अमेरिका ने बहुत सारी मांगें रख दी थी जिसकी वजह से यह वार्ता खास नतीजे पर नहीं पहुंच सकी.

Iran-US Peace Talks : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई है. 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद भी कोई खास नतीजा सामने नहीं आया. हालांकि, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई है कि आगे भी दोनों देशों के बीच में बातचीत चल रही रहेगी और हम उम्मीद करते हैं कि मिडिल ईस्ट में शांति बनी रहेगी. इसी बीच ईरान का बड़ा बयान सामने आया है और ईरान ने रविवार को बताया कि अमेरिकी पक्ष की बहुत ज्यादा मांगों की वजह से ऐसा नतीजा निकला है. लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति कभी भी खत्म नहीं होती है.

इसी बीच अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व कर रहे उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत किसी भी शांति समझौते पर पहुंचने में नाकाम रही. उन्होंने इसके पीछे का मुख्य कारण बताया कि ईरान परमाणु कार्यक्रम कतई भी छोड़ने को तैयार नहीं था. साथ ही अमेरिका ने ईरान के सामने एक शानदार प्रस्ताव रखा था जिसको उन्होंने स्वीकार नहीं किया.

ये हैं वह महत्वपूर्ण मुद्दे

वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बाकाई ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच में कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन दो-तीन मुद्दे ऐसे भी हैं जिन पर अलग-अलग राय है. उन्होंने आगे कहा कि शनिवार की सुबह पाकिस्तान की मध्यस्थता से शुरू हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों और टेक्सट का आदान-प्रदान हुआ. 24 घंटे में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें प्रमुख मुद्दा होर्मुज़ जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध का हर्जाना, पाबंदियाँ हटाना, और ईरान तथा इस क्षेत्र में चल रहे युद्ध को पूरी तरह से खत्म करना शामिल है.

हमें नहीं करना चाहिए था विश्वास

उन्होंने कहा कि इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता विपक्षी खेमे में बैठे लोग पर निर्भर करेगी. उन्हें अब बेतुकी मांगे और गैर-कानूनी कार्यों से बचना चाहिए. साथ ही ईरान की जो जायज मांग और हित उन्हें अमेरिका को स्वीकार करना चाहिए. इसके अलावा यह बातचीत 40 दिनों तक चली जंग और अविश्वास के बीच हुई है. इसलिए हमें शुरुआत से ही मानकर चलना चाहिए था कि बातचीत किसी खास नतीजे पर पहुंचने वाली नहीं है. हम अमेरिका द्वारा वादे तोड़ने और उसके बुरे इरादों वाले कामों के अनुभवों को न तो भूलें हैं और न ही कभी भूलेंगे.

उन्होंने बातचीत की मेजबानी करने और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में किए गए प्रयासों के लिए पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया. पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि उनके देश ने पिछले घंटों में गहन और रचनात्मक चर्चाओं के कई दौरों में मध्यस्थता करने में मदद की है. प्रगति की उम्मीद जताते हुए डार ने कहा कि दोनों पक्षों को स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता लाने के लिए दोनों पक्षों को सकारात्मक भावनाएं रखनी चाहिए.

यह भी पढ़ें- ‘डील से फर्क नहीं पड़ता’, शांति वार्ता फेल होने के बाद क्या करेंगे ट्रंप, अटैक या डेडलाइन गेम?

News Source: PTI

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