Home राज्यJammu Kashmir ऑपरेशन महादेव: 10 घंटे का मार्च और 3 आतंकियों का खात्मा, पहलगाम पीड़ितों को मिला न्याय

ऑपरेशन महादेव: 10 घंटे का मार्च और 3 आतंकियों का खात्मा, पहलगाम पीड़ितों को मिला न्याय

by Rajnish Sinha
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ऑपरेशन महादेव: 10 घंटे का कठिन मार्च और तीन आतंकियों का खात्मा, पहलगाम के पीड़ितों को मिला न्याय

Pahalgam Attack: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन में निर्दोष पर्यटकों पर हुए जघन्य आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया और गहरा आक्रोश पैदा किया.

Pahalgam Attack: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन में निर्दोष पर्यटकों पर हुए जघन्य आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया और गहरा आक्रोश पैदा किया. पहचान के आधार पर चुन-चुनकर की गई नागरिकों की हत्या अत्यधिक क्रूरता का उदाहरण थी. भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के लिए यह केवल एक घटना नहीं थी, बल्कि यह एक कार्रवाई का आह्वान था. न्याय दिलाना अनिवार्य था. हमले के कुछ ही घंटों के भीतर भारतीय सेना के जवान मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम को जोड़ना शुरू किया. प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, जिनमें घटनास्थल पर मौजूद एक सेना अधिकारी का बयान भी शामिल था, ने तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की संलिप्तता की पुष्टि की.

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे आतंकी

मानव खुफिया, तकनीकी इनपुट और बचे हुए लोगों की पहचान के आधार पर आतंकवादियों की पहचान सुलैमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई के रूप में हुई, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे. इसके बाद हाल के समय के सबसे समन्वित और व्यापक आतंकवाद रोधी अभियानों में से एक शुरू हुआ. प्रारंभिक प्रतिक्रिया में संभावित भागने के रास्तों को सील करना और आतंकवादियों को घाटी से बाहर निकलने से रोकना शामिल था. समय-स्थान-बल के विश्लेषण पर आधारित गतिशील खुफिया मूल्यांकन ने सुरक्षा बलों को आतंकवादियों की गतिविधियों के अनुसार तेजी से रणनीति बदलने और ऑपरेशनल ग्रिड को विस्तारित करने में सक्षम बनाया.

घने और दुर्गम जंगलों में छिपे थे आतंकी

जैसे-जैसे खुफिया जानकारी विकसित होती गई, यह स्पष्ट हो गया कि आतंकवादी दक्षिण कश्मीर के ऊपरी इलाकों हपट्नार, बुगमार और त्राल से होते हुए दाचीगाम के घने और दुर्गम जंगलों की ओर बढ़ रहे थे, जो महादेव रिज के आसपास स्थित है. घने जंगल और ऊंचाई वाले इस इलाके ने उन्हें अस्थायी शरण तो दी, लेकिन उनके और सुरक्षा बलों दोनों के लिए आवागमन को कठिन बना दिया. मई के अंत तक एक स्पष्ट ऑपरेशनल तस्वीर सामने आ गई. आतंकवादी कठिन भूभाग का लाभ उठाकर बचने की कोशिश कर रहे थे, जबकि वार्षिक यात्रा के नजदीक आने से संभावित खतरे की आशंका बढ़ रही थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभियान का दायरा बढ़ाया गया. अतिरिक्त बलों, जिनमें पैराशूट इकाइयां भी शामिल थीं, को इस अभियान में शामिल किया गया.

कई हफ्तों तक चला अभियान

अगले कई हफ्तों तक एक सतत बहु एजेंसी अभियान चलता रहा. खुफिया एजेंसियों, भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने पूर्ण समन्वय के साथ काम किया. शुरुआती 300 वर्ग किलोमीटर में फैला ऑपरेशनल क्षेत्र लगातार निगरानी, पीछा करने और सटीक तैनाती के जरिए धीरे-धीरे कम किया गया. तकनीक ने इस अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई. ड्रोन, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट, इलेक्ट्-ऑप्टिकल सेंसर और अन्य उन्नत निगरानी उपकरणों का व्यापक उपयोग किया गया. निरंतर खुफिया सत्यापन ने आतंकवादियों पर दबाव बनाए रखा, जिससे उनके विकल्प धीरे-धीरे समाप्त होते गए.

गुप्त तरीके से आतंकियों तक पहुंची सेना

10 जुलाई 2025 को ताजा खुफिया जानकारी के आधार पर ऑपरेशन महादेव अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर गया. लिडवास, हरवान और दाचीगाम में बड़े पैमाने पर समन्वित अभियान शुरू किए गए. सैनिकों की तैनाती को रणनीतिक रूप से बदला गया और भागने के रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिससे आतंकवादी एक सीमित क्षेत्र में घिर गए. 250 किलोमीटर से अधिक की लगातार पीछा करने की कार्रवाई और 93 दिनों के अभियान के बाद ऑपरेशनल क्षेत्र को घटाकर 25 वर्ग किलोमीटर तक सीमित कर दिया गया. 28 जुलाई 2025 को एक सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध और निष्पादित अभियान में पैराशूट (स्पेशल फोर्सेज) की एक टीम ने दुर्गम इलाके में 10 घंटे में 3 किलोमीटर पैदल चलकर गुप्त तरीके से पहुंच बनाई.

मुठभेड़ में तीनों आतंकियों को मार गिराया

एक त्वरित और सटीक मुठभेड़ में तीनों आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिससे बैसरन नरसंहार के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया गया. ऑपरेशन महादेव भारतीय सेना के संकल्प, पेशेवर क्षमता और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है. यह दर्शाता है कि खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय, उन्नत तकनीक और रणनीतिक धैर्य के साथ, सबसे कठिन परिस्थितियों में भी निर्णायक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अभियान ने लोगों के विश्वास को बहाल किया और यह संदेश दिया कि जो भी आतंकवादी कृत्य करेंगे, उनका लगातार पीछा किया जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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