Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में बीजेपी 207 विधानसभा सीटों को जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है. वहीं, ममता बनर्जी ने सीएम पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया है.
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में करीब डेढ़ दशक से सीएम रहीं ममता बनर्जी की टीएमसी की सरकार अब जा चुकी है और यहां पहली बार पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने जा रही है. प्रदेश की 293 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे सोमवार 4 मई को आ गए थे. इसमें बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को मात्र 80 सीट मिलीं. ममता खुद भवानीपुर सीट से बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई हैं.
अब बात पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस्तीफे की हो रही है, लेकिन उन्होंने अपना इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है. ममता के इस व्यवहार को भाजपा ने ‘संवैधानिक अपमान’ और ‘चुनाव के बाद नखरा’ करार दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरी खबर
मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता – ममता
मंगलवार को पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममत बनर्जी ने राजधानी कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. इस दौरान उन्होंने वोटों की गिनती की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश लूटा गया. उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई.
पीटीआई के अनुसार, ममता बनर्जी ने प्रेस वार्ता में कहा, “मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हार जनता के जनादेश से नहीं बल्कि एक साजिश से हुई है. मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी. वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं.” ममता के इस बयान पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पलटवार किया है.
ममता का सुझाव संविधान विरोधी- भाजपा
पीटीआई के अनुसार, ममता बनर्जी के इस बयान पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर एक पोस्ट करके आरोप लगाया कि बनर्जी हिंसा के माध्यम से संवैधानिक व्यवस्था को ‘शॉर्ट-सर्किट’ करने का सुझाव दे रही हैं. उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका में ट्रंप की हार के बाद 6 जनवरी 2021 को हुए कैपिटल हिल के हमले से की.
शहजाद पूनावाला ने कहा, “ममता बनर्जी जो सुझाव दे रही हैं वह संविधान विरोधी, बीआर अंडेकर विरोधी है और संवैधानिक अपमान के बराबर है. साथ ही यह चुनाव के बाद का एक उग्र रवैया भी है. वह सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की अवधारणा को पलटना चाहती हैं, जो हमारी संवैधानिक प्रणाली की एक प्रमुख विशेषता है.” एक वीडियो मैसेज में शहजाद पूनावाला ने कहा, “भले ही वह इस्तीफा न दें, विधानसभा 8 मई को भंग हो जाएगी और उनकी सदस्यता वैसे भी समाप्त हो जाएगी.”
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