Met Gala: फैशन की दुनिया का सबसे बड़ा इवेंट मेल गाला फिलहाल हर तरफ छाया हुआ है. इंटरनेशनल चेहरों के बीच भारतीय सेलिब्रिटीज ने भी अपना जलवा दिखाया. इस बीच एक बार फिर लोगों को राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स की याद आई.
09 May, 2026
फैशन की दुनिया का सबसे बड़ा महाकुंभ यानी ‘मेट गाला’ एक बार फिर सुर्खियां बटोर रहा है. न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में जब इस साल का रेड कार्पेट बिछा, तो उसकी चमक भारत तक फील की गई. साल 2026 की थीम थी ‘फैशन इज आर्ट’. यकीन मानिए, भारतीय सेलिब्रिटीज ने इस थीम को जिस तरह से कैरी किया, उसने पूरी दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया. इस बार के मेट गाला ने ये साबित कर दिया कि इंडियन आर्ट के पितामह कहे जाने वाले राजा रवि वर्मा आज भी फैशन की दुनिया के सबसे बड़े आइकॉन हैं.

राजा रवि वर्मा
राजा रवि वर्मा सिर्फ एक पेंटर नहीं थे, बल्कि वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय महिला और साड़ी के आउटफिट को एक ग्लोबल पहचान दी थी. 19वीं सदी में उन्होंने अपनी पेंटिंग्स के जरिए ये तय किया कि साड़ी का पल्लू कैसे गिरना चाहिए. सिर का झुकाव कितना होना चाहिए और भारतीय सुंदरता का पैमाना क्या होगा. उन्होंने माइथोलॉजिकल स्टोरीज की कैरेक्टर्स, जैसे दमयंती और शकुंतला को न सिर्फ कैनवास पर उतारा, बल्कि उन्हें एक ऐसी चमक दी जो आज भी भारतीय सिनेमा और अब अंतरराष्ट्रीय फैशन का बेस है.
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ईशा अंबानी का लुक
मेट गाला 2026 के रेड कार्पेट पर जब ईशा अंबानी उतरीं, तो सबकी निगाहें थम गईं. फेमस डिजाइनर गौरव गुप्ता की तैयार की हुई उनकी गोल्ड टिश्यू साड़ी किसी सिंपल ड्रेस जैसी नहीं थी. ये साड़ी ड्रेप के बजाय इंजीनियर की गई लग रही थी. इसका पल्लू ईशा के सिर के ऊपर एक आर्क की तरह टिका हुआ था, जो सीधे तौर पर राजा रवि वर्मा की फेमस पेंटिंग ‘पद्मिनी’ (लोटस लेडी) की याद दिला रहा था. जहां रवि वर्मा की पेंटिंग में साड़ी का फ्लो काफी सॉफ्ट और बॉडी के साथ बहता हुआ दिखता है. ईशा के हाथ में लटके हुए मैंगो पर्स ने भी सबका खूब ध्यान खींचा. ये रवि वर्मा की पेंटिंग ‘वुमन होल्डिंग अ फ्रूट’ से इंस्पायर बताया जा रहा है.

करण जौहर
ईशा अंबानी ने जहां रवि वर्मा के स्टाइल को मॉर्डन टच दिया, तो वहीं फिल्ममेकर करण जौहर ने सीधा रास्ता चुना. मनीष मल्होत्रा के डिजाइन किए हुए केप और ब्लेज़र में करण ने रवि वर्मा की पेंटिंग्स को सचमुच जिंदा कर दिया. उनके ब्लेज़र पर ‘वुमन होल्डिंग अ फ्रूट’ की तस्वीर थी, जबकि उनके लंबे केप पर रवि वर्मा की सबसे फेमस ‘हंसा दमयंती’ और ‘कादंबरी’ के सीन्स को कढ़ाई से बनाया गया था. करण का ये लुक 17वीं सदी के यूरोपीय बारोक स्टाइल और 19वीं सदी की इंडियन आर्ट का बेहतरीन कॉम्बिनेशन था. ऐसा लग रहा था मानो 19वीं सदी की पेंटिंग्स 21वीं सदी के न्यूयॉर्क में टहल रही हों.

रवि वर्मा की सुंदरियां
राजा रवि वर्मा का असर सिर्फ रेड कार्पेट पर ही नहीं दिखता, बल्कि उनका असर हर जगह दिखता है. फिर चाहे वो मैगजीन कवर हों या कैलेंडर. सामंथा रुथ प्रभु और श्रुति हासन जैसी हसीनाएं रवि वर्मा की पेंटिंग्स को री-क्रिएट कर चुकी हैं. कई डिजाइनर्स ने तो रवि वर्मा की पेंटिंग्स को ही साड़ियों में बुन दिया है. कहा जा सकता है कि ये इंडियन आर्ट का ऐसा मैजिक है जो कभी फीका नहीं पड़ता. हाल ही में उनकी पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्णा’ 1.67 अरब रुपये में बिकी, जिसने इसे भारत की अब तक की सबसे महंगा आर्टवर्क बना दिया. ये इस बात का सबूत है कि रवि वर्मा की आर्ट टाइम की लिमिटेशन से परे है. वहीं, मेट गाला 2026 ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया कि भारत के पास आर्ट और कल्चर का वो खजाना है, जो हर सदी में नया और मॉर्डन होता रहेगा.
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