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डिजिटल धोखाधड़ी पर मिलेगा 25,000 रुपये तक का मुआवजा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा नियम

by Sanjay Kumar Srivastava
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RBI का बड़ा कदम: डिजिटल धोखाधड़ी पर मिलेगा 25,000 रुपये तक का मुआवजा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा नियम

Reserve Bank of India: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया है.

Reserve Bank of India: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया है. शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंक अब छोटे मूल्य के अनधिकृत डिजिटल लेनदेन से होने वाले नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने की योजना बना रहा है. धोखाधड़ी के शिकार हुए ग्राहकों को राहत देने के लिए एक नई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें अधिकतम 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति का प्रावधान होगा.अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में ग्राहकों की जिम्मेदारी तय करने वाले मौजूदा नियम साल 2017 में बनाए गए थे. तकनीक के बढ़ते विस्तार को देखते हुए अब इनमें बदलाव का प्रस्ताव है. भारतीय रिजर्व बैंक डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक चर्चा पत्र (Discussion Paper) भी जारी करेगा. इसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण (Authentication) और लेनदेन में ‘विलंबित क्रेडिट’ (Delayed Credit) जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं.

बैंक की पहल से बढ़ेगा ग्राहकों का भरोसा

ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए आरबीआई तीन नए मसौदा भी जारी करेगा, जो ‘गलत बिक्री’ (Mis-selling), ‘ऋण वसूली व रिकवरी एजेंटों के व्यवहार’ और ‘इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में ग्राहक की सीमित देयता’ से संबंधित होंगे. गवर्नर ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती तकनीक और धोखाधड़ी के नए तरीकों को देखते हुए इन सुरक्षा उपायों का मजबूत होना अनिवार्य है. यह पहल न केवल ग्राहकों का भरोसा बढ़ाएगी, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व सुरक्षित बनाएगी. उन्होंने कहा कि मुआवजे के प्रारूप सहित संशोधित निर्देशों का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा. कहा कि किसी भी संस्था द्वारा वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की गलत बिक्री से ग्राहकों और संस्थाओं दोनों को गंभीर नुकसान होता है. यह देखते हुए मल्होत्रा ​​ने कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बैंक काउंटरों पर बेचे जा रहे उत्पाद और सेवाएं ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप हों. इसलिए वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, विपणन और बिक्री के संबंध में संस्थाओं को व्यापक निर्देश जारी करने का निर्णय लिया गया है. इस संबंध में निर्देशों का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा.

जल्द शुरू होगा मिशन सक्षम

गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने घोषणा की है कि ऋण वसूली एजेंटों के लिए मौजूदा नियम विभिन्न संस्थाओं में भिन्न-भिन्न हैं. इसे सुव्यवस्थित करने के लिए आरबीआई सभी मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगा. एजेंटों की नियुक्ति और वसूली प्रक्रियाओं से संबंधित निर्देशों का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा ताकि एकसमान मानक सुनिश्चित किए जा सके. मिशन सक्षम की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इसका उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों की क्षमता बढ़ाना है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक (यूसीबी) वित्तीय निवेश को बढ़ावा देने और बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों की सेवा करने के लिए महत्वपूर्ण संस्थान हैं. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक जल्द ही मिशन सक्षम (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने को बड़ी संख्या में भौतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें लगभग 1.4 लाख प्रतिभागी शामिल होंगे.

ये भी पढ़ेंः RBI ने नहीं दी EMI पर राहत, रेपो रेट 5.25 प्रतिशत बरकरार, FY26 के लिए 7.4% रहेगी GDP ग्रोथ रेट

News Source: Press Trust of India (PTI)

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