Anke Gowda: अंके गौड़ा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. वे एक ऐसे नायक हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लोगों के लिए ज्ञान का महल बनाने में लगा दी.
27 January, 2026
भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस पर 45 गुमनाम नायकों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया है, जिनमें से एक नाम है 75 साल के अंके गौड़ा का. अंके गौड़ा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया है. वे एक ऐसे नायक हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लोगों के लिए ज्ञान का महल बनाने में लगा दी. नि:स्वार्थ होकर उन्होंने समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 20 लाख किताबों की लाइब्रेरी बनाई, जो सभी के लिए बिल्कुल मुफ्त है. चलिए जानते हैं अंके गौड़ा और उनके योगदान के बारे में.

घर बेचकर बनाई लाइब्रेरी
इस साल साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के लिए अंके गौड़ा को पद्मश्री सम्मानित किया गया है. गौड़ा मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं. बचपन से ही उन्हें किताबों से बहुत प्यार था। उन्होंने अपने पूरे जीवन की कमाई लगाकर एक लाइब्रेरी बनाई. जब पैसे कम पड़ गए तो उन्होंने अपना घर तक बेच दिया. उन्होंने 20 लाख किताबों के साथ एक लाइब्रेरी बनाई है, जिसका नाम है ‘पुस्तका माने’. लाइब्रेरी मैसूर के हरलाहल्ली नाम की जगह पर स्थित है. अंके गौड़ा ने शुरू में बस कंडक्टर का काम किया था इसके बाद उन्होंने एक चीनी मिल में काम किया.
चिनी मिल में किया काम
मांड्या ज़िले के एक किसान परिवार में जन्मे गौड़ा को बचपन में ज्यादा किताबें पढ़ने को नहीं मिली , इसलिए वह अपनी कम सैलरी में से पैसे बचाकर किताबें इकट्ठा करते थे। पढ़ने का उनका शौक 20 साल की उम्र में शुरू हुआ, जब उनके कॉलेज प्रोफ़ेसर ने उन्हें बस कंडक्टर का काम करते हुए किताबें इकट्ठा करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद, अंके गौड़ा ने बस कंडक्टर के तौर पर काम करते हुए किताबें पढ़ी और इकट्ठी की। उन्होंने कन्नड़ साहित्य में मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी, जिसके बाद उन्होंने लगभग 3 दशकों तक एक चीनी फ़ैक्ट्री में काम किया। बाद में उन्होंने अपनी 50 साल की कमाई को लाइब्रेरी बनाने में लगा दिया.

सबके लिए सुलभ होना चाहिए ज्ञान
गौड़ा का यह ज्ञान का महल सभी के लिए मुफ्त है, यहां 20 लाख से ज्यादा किताबें, 5,000 से ज्यादा डिक्शनरी और पुरानी पांडुलिपियां भी रखी हैं. यहां सभी वर्ग के लोगों के लिए बिना फीस के आकर पढ़ते हैं. गौड़ा का मानना है कि ज्ञान हर किसी के लिए सुलभ होना चाहिए, इसलिए उन्होंने अपनी लाइब्रेरी में कोई फीस नहीं रखी. आज यहां गरीब और पिछड़े समुदायों के बच्चे भी आकर पढ़ते हैं.
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