Home शिक्षा कौन था देश का पहला IAS, आजादी से भी पहले पास की थी परीक्षा, lBSNA नहीं लंदन में हुई ट्रेनिंग

कौन था देश का पहला IAS, आजादी से भी पहले पास की थी परीक्षा, lBSNA नहीं लंदन में हुई ट्रेनिंग

by Neha Singh
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First IAS of India

First IAS of India: पूरे देश में UPSC क्लियर करने वाले कैंडिडेट्स को शुभकामनाएं मिल रही हैं, लेकिन आज हम आपको देश के पहले IAS के बारे में बताएंगे, जिन्होंने आजादी से भी पहले इस परीक्षा को पास किया था.

7 March, 2026

संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है. इस साल अनुज अग्निहोत्री ने परीक्षा में टॉप किया है. अनुज के बाद राजेश्वरी सुवे एम ने ऑल इंडिया रैंक 2 और आकांश धुल ने ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल किया है. पूरे देश में चुने गए कैंडिडेट को शुभकामनाएं दी जा रही हैं. इस साल 953 कैंडिडेट्स की भर्ती हुई है. लेकिन आज हम आपको देश के पहले IAS के बारे में बताएंगे, जिन्होंने आजादी से भी पहले इस परीक्षा को पास किया था. बता दें, UPSC परीक्षा का नाम पहले Indian Civil Service – ICS था.

देश के पहले IAS

देश के पहले IAS का नाम है सत्येंद्रनाथ टैगोर, जिन्हें आज भुला दिया गया है. सत्येंद्रनाथ टैगोर राष्ट्रीय गान लिखने वाले रविंद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे. सत्येंद्रनाथ टैगोर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में की थी. उस समय भारत में ब्रिटेश शासन था और सत्येंद्रनाथ पश्चिमी शिक्षा से काफी प्रभावित थे. इसलिए उन्होंने भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा देने का फैसला लिया. उस समय यह परीक्षा लंदन में आयोजित की जाती थी. वे लंदन इसकी पढ़ाई करने के लिए गए और नस्लीय भेदभाव को तोड़ते हुए केवल 21 साल की उम्र में साल 1863 में परीक्षा पास की. यह भारत के लिए ऐतिहासिक दिन था.

लंदन में हुई ट्रेनिंग

भारत में UPSC क्लियर करने वाले सभी कैंडिडेट्स की तैयारी LBSNAA- लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में होती है, लेकिन देश के पहले IAS की ट्रेनिंग लंदन में हुई थी. साल 1864 में वे ट्रेनिंग पूरी करके भारत लौटे. उनकी पहली पोस्टिंग बॉम्बे प्रेसिडेंसी में हुई थी. उन्होंने 30 साल अपनी सेवा दी. सत्येंद्रनाथ टैगोर उन भारतीय बच्चों के लिए प्रेरणा बने जो देश की शासन व्यवस्था में सेवा देना चाहते थे.

विरासत में मिली साहित्य की समझ

सत्येंद्रनाथ टैगोर पढ़ाई के अलावा फिलॉसफी और साहित्य में काफी रुचि रखते थे या यूं कहें कि उन्हें यह विरासत में मिली थी. उनके निबंध कल्चरल मॉडर्नाइजेशन और जेंडर इक्वालिटी जैसे विषयों पर फोकस करते थे. उन्होंने रूमी, हाफिज, शेक्सपियर और बायरन की रचनाओं का बंगाली में ट्रांसलेशन किया, जिससे आम लोगों की सोच का दायरा बढ़ा. उनके गानों में भारतीय रागों के साथ पश्चिमी धुनें भी थीं. उनका गाना, “मिले सबे भारत संतान,” बहुत चर्चा में रहा. उन्होंने महिला सशक्तिकरण और जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए बहुत काम किया.

यह भी पढ़ें- UPSC CSE 2025 का रिजल्ट जारी, 180 IAS तो 150 बनेंगे IPS, अनुज अग्निहोत्री ने किया टॉप

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