Face Transplant: अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही AIIMS नई दिल्ली में चेहरा प्रत्यारोपण शुरू कर दिया जाएगा. इस तरह AIIMS देश का पहला ऐसा संस्थान होगा, जहां फेस ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी.
Face Transplant: अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही AIIMS नई दिल्ली में चेहरा प्रत्यारोपण शुरू कर दिया जाएगा. इस तरह AIIMS देश का पहला ऐसा संस्थान होगा, जहां फेस ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी. यहां कम खर्च में ही लोगों के क्षत-विक्षत चेहरे संवर जाएंगे.एम्स ने उन मरीजों की सूची बनाना शुरू कर दिया है जिनका चेहरा एसिड अटैक, दुर्घटना या जन्मजात विकृति के कारण खराब हो चुका है. इसमें प्लास्टिक सर्जरी, नेफ्रोलॉजी और मनोरोग विभाग सहित 8 विभाग मिलकर काम करेंगे. नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने देश के पहले ‘चेहरा प्रत्यारोपण’ (Face Transplant) कार्यक्रम की शुरुआत कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. यह जटिल प्रक्रिया उन रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो गंभीर विकृति के कारण सांस लेने या पलक झपकाने में असमर्थ हैं. संस्थान ने ऐसे मरीजों का रजिस्टर बनाना शुरू कर दिया है. इस पहल के लिए हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञ डॉ. इंद्रनील सिन्हा को आमंत्रित किया गया है. हाल ही में एक कार्यशाला के दौरान ब्रेन-डेड डोनर से त्वचा प्रत्यारोपण का सफल प्रशिक्षण भी किया गया.
लौटेगी चेहरे की सुंदरता
विशेषज्ञों ने बताया कि यह सर्जरी अब प्रायोगिक नहीं बल्कि समय की मांग है. AIIMS 15 फरवरी तक बर्न और प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक में एक गहन शव परीक्षण कार्यशाला और शैक्षणिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी कर रहा है. प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. मनीष सिंघल अपने सहयोगी डॉ. शशांक चौहान, डॉ. राजा तिवारी, डॉ. राजकुमार मानस, डॉ. शिवंगी साहा और डॉ. अपर्णा सिन्हा के साथ इस कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे. कार्यक्रम में शवों पर व्यावहारिक कार्यशालाएं, अकादमिक व्याख्यान, ईएनटी, मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, पैथोलॉजी, मनोचिकित्सा, क्रिटिकल केयर, एनाटॉमी और ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गनाइजेशन (ओआरबीओ) के साथ अंतःविषयक चर्चाएं शामिल होंगी. एम्स में प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव और बर्न सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. सिंघल ने कहा कि एसिड बर्न, गोली लगने से हुई चोटों और आघात के कारण चेहरे की गंभीर विकृतियों के बड़ी संख्या में मरीज 10 से 12 सर्जरी के बाद भी ठीक नहीं हो पाते हैं. डॉ. सिंघल ने कहा कि एम्स में ऐसे रोगियों का इलाज कर उनकी सुंदरता को पुनः लौटाया जाएगा. डॉ. इंद्रनील सिन्हा ने स्वीकार किया कि एम्स में कौशल और बुनियादी ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर है. उन्होंने कार्यक्रम को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया है. डॉ. सिंघल ने यह कहा कि एम्स इस कार्यक्रम के लिए हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के साथ सहयोग करने की योजना बना रहा है.
दुनिया भर में अब तक लगभग 80 चेहरे का प्रत्यारोपण
चेहरा प्रत्यारोपण एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे के पूरे या आंशिक हिस्से का पुनर्निर्माण मृत दाता के ऊतकों का उपयोग करके किया जाता है, जिसका उद्देश्य मरीज के सौंदर्य को बहाल करना है. डॉ. सिंघल ने बताया कि अब तक दुनिया भर में लगभग 80 चेहरा प्रत्यारोपण हो चुके हैं, जिनमें से नवीनतम दो सप्ताह पहले स्पेन में किया गया था. नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. दीपांकर भौमिक ने बताया कि प्रतिरक्षा दमन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसके लिए एम्स में सभी बुनियादी ढांचे और सुविधाएं मौजूद हैं. चेहरा प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं को प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा प्रत्यारोपित ऊतकों की अस्वीकृति को रोकने के लिए आजीवन प्रतिरक्षा चिकित्सा की आवश्यकता होती है. नेफ्रोलॉजिस्ट की भूमिका सर्जरी के बाद प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रियाओं से ग्राफ्ट की रक्षा करना है. कहा कि मैं उत्साहित हूं और इस पहल के लिए हर संभव सहयोग करूंगा. अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. चौहान और सहायक प्रोफेसर डॉ. साहा ने बताया कि विभाग को जटिल चेहरे के पुनर्निर्माण और सौंदर्य शल्य चिकित्सा का अनुभव है, जो एम्स दिल्ली में चेहरे के प्रत्यारोपण शुरू करने में सहायक होगा. मनोचिकित्सा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रीति के. ने उपचार के दौरान पुनर्वास और परामर्श के महत्व पर जोर दिया.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
