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पाकिस्तान में ऑनलाइन बाल यौन शोषण का खौफनाक सच : 15 लाख बच्चों को अपनों ने ही बनाया शिकार

by Sanjay Kumar Srivastava 14 October 2026, 1:59 PM IST (Updated 14 October 2026, 2:06 PM IST)
14 October 2026, 1:59 PM IST (Updated 14 October 2026, 2:06 PM IST)
पाकिस्तान में ऑनलाइन बाल यौन शोषण का खौफनाक सच: 15 लाख बच्चे हुए शिकार, यूनिसेफ की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Child Abuse: यूनिसेफ, ECPAT इंटरनेशनल और इंटरपोल की एक संयुक्त स्टडी में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है. स्टडी में बताया गया है कि पाकिस्तान में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लगभग 15 लाख बच्चों ने एक साल में कम से कम एक बार टेक्नोलॉजी के ज़रिए यौन शोषण या दुर्व्यवहार का सामना किया. पाकिस्तान में 12 से 17 साल की उम्र के इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लगभग हर 16 में से एक बच्चे (यानी लगभग 15 लाख बच्चों) ने एक साल में कम से कम एक बार टेक्नोलॉजी के ज़रिए यौन शोषण या दुर्व्यवहार का सामना किया. इस स्टडी ने उस आम धारणा को खारिज कर दिया है कि ऑनलाइन दुर्व्यवहार केवल अजनबियों द्वारा किया जाता है.

परिचित ही निकले बच्चों के ऑनलाइन शोषक

रिपोर्ट में सामने आया कि 85 प्रतिशत घटनाओं में दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति पीड़ित बच्चे का परिचित था. माध्यमों की बात करें तो 44 प्रतिशत घटनाओं के साथ सोशल मीडिया इस दुर्व्यवहार का सबसे बड़ा और आम डिजिटल जरिया बनकर उभरा है. इस रिपोर्ट ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. डर, बदनामी का डर और घर पर संभावित नतीजों के कारण बच्चे अक्सर मदद मांगने से बचते हैं. बच्चों को डर था कि परिवार वाले उन्हें दोषी ठहराएंगे, अपमानित करेंगे या उन पर पाबंदियां लगाएंगे. यूनिसेफ का कहना है कि टेक्नोलॉजी के ज़रिए यौन शोषण या दुर्व्यवहार का सामना करने वाले आधे से ज़्यादा बच्चों ने किसी को नहीं बताया. सर्वे में शामिल किसी भी बच्चे ने हेल्पलाइन, सोशल वर्कर या पुलिस जैसे औपचारिक माध्यमों से अपने उत्पीड़न की रिपोर्ट नहीं की.

चुनौती बनी बच्चों की सुरक्षा

ऑनलाइन दुर्व्यवहार बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चुनौती है. इस बीच, ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करते हुए, बच्चों के खिलाफ़ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि नजात माला मजीद ने सरकारों से आग्रह किया कि वे बच्चों की सुरक्षा को मज़बूत करें. उन्होंने न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय में कहा कि लगभग 4.5 करोड़ बच्चे संघर्ष, प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु संकट की वजह से विस्थापित हुए हैं. टेक्नोलॉजी में तेज़ी से हो रही तरक्की बच्चों के सीखने और बातचीत करने के मौकों के साथ-साथ नए जोखिम भी पैदा कर रही है.

AI से बढ़ा बाल यौन शोषण और खतरा

एम जिड ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने बच्चों के यौन शोषण के साथ-साथ साइबरबुलिंग, डीपफेक और बच्चों को आपराधिक गतिविधियों में शामिल करने के लिए भी बड़े रास्ते खोल दिए हैं. एम जिड की यह प्रेजेंटेशन बच्चों के खिलाफ हिंसा पर पहली UN ग्लोबल स्टडी के 20 साल पूरे होने के मौके पर थी. उन्होंने कहा कि तरक्की के बावजूद, दुनिया COVID-19 महामारी के बाद भी जटिल और एक-दूसरे से जुड़े संकटों का सामना कर रही है. सोमवार को UN जनरल असेंबली ने AI से बने यौन कंटेंट को एक उभरते हुए जोखिम के तौर पर पहचाना. इन दुर्व्यवहारों में बिना इच्छा के यौन तस्वीरें या बातचीत, अंतरंग तस्वीरों की मांग, बच्चों की तस्वीरों को बिना सहमति के शेयर करना और यौन धमकियां या ब्लैकमेल शामिल हैं.

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