Bangladesh Violence : बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद अव्यवस्था फैल गई है और अब हिंसा यहां तक बढ़ गई कि अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.
Bangladesh Violence : बांग्लादेश में बीते दिनों से अल्पसंख्यक समुदाय खासकर हिंदुओं पर हमले काफी बढ़ गए हैं. अभी तक भारत में ही इसका विरोध हो रहा था लेकिन अब यह मामला लंदन में रह रहे भारतीय मूल के लोगों ने भी उठाया है. लंदन में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर भारतीय मूल और बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं ने जमकर विरोध किया. इस दौरान उन्होंने पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और उस पर लिखा कि जस्टिस फॉर हिंदू विक्टिम. इसके अलावा कुछ लोगों ने अपने हाथों में स्टॉप हिंदू जेनोसाइड के पोस्टर भी ले रखे थे.
अल्पसंख्यक समुदाय को बनाया जा रहा निशाना
बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद अव्यवस्था फैल गई है और अब हिंसा यहां तक बढ़ गई कि अल्पसंख्यक समुदाय (बौद्ध, हिंदू और सिख) को निशाना बनाया जा रहा है. यहां पर कई कट्टरपंथी संगठन उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर हमला कर रहे हैं. साथ ही हाल ही में दीपू चंद्र दास की हत्या इसका जीता जागता उदाहरण है और इस हत्या का भारत में भी जमकर विरोध किया गया था. इस हिंसा को लेकर खुद ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने चिंता जाहिर की है और कहा कि निराधार आरोप लगाकर अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है. इसके अलावा अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करना, उनकी संपत्ति हड़पना और उन्हें जान से मार देना कट्टरपंथियों का हथियार बन गया है.
कैसे हुई थी दीपू दास की हत्या
दीपू चंद्र दास के नाम के एक हिंदू शख्स को 18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में कुछ कट्टरपंथी संगठन के लोगों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी. दीपू की उम्र मात्र 27 वर्ष थी और वह एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था. उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया और उसके बाद भीड़ ने उसको पीट-पीटकर मार डाला. जब इससे भी उनको शांति नहीं मिली तो भीड़ ने उसके शव को पेड़ पर लटका दिया. इस घटना को सुनने के आम लोग सहम हो गए और इसकी चर्चा पूरी दुनिया में होने लगी. वहीं, कट्टरपंथी संगठन इसको हर तरफ ईश निंदा का मुद्दा बना रही है. इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन सवाल यह है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्य समुदाय को निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
भारत में किया गया विरोध
दीपू दास की हत्या के बाद भारत में प्रदर्शन किए गए और दीपू को न्याय देने की बात उठी. इसके अलावा उन्होंने यूनुस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. बात यही तक नहीं ठहरी दुनिया भर में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और इसी कड़ी में लंदन में रहने वाले हिंदू परिवारों ने भी बांग्लादेश के हाई कमीशन के बाहर जमकर नारेबाजी की.
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