Myanmar Election : म्यांमार में पांच साल बाद चुनाव हो रहा है और इलेक्शन के अंतिम चरण की वोटिंग आज डाली जा रही है. इसी बीच चुनाव की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.
Myanmar Election : भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में तख्तापलट होने के पांच साल बाद चुनाव हो रहा है और अब वोटिंग जारी है. आम चुनाव में रविवार को तीसरे और अंतिम चरण के लिए वोटिंग हो रही है. देश में चुनावी प्रक्रिया बीते एक महीने से चल रही है और अभी तक के रुझानों से साफ हो गया है कि सैन्य शासक ही सरकार बनाएगा. वहीं, आलोचकों का कहना है कि ये चुनाव न तो स्वतंत्र हैं और न ही निष्पक्ष हैं. बता दें कि साल 2021 में म्यांमार की सेना ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की सरकार को सेना ने हटा दिया था और इसके बाद ही देश में गृह युद्ध छिड़ गया था. लेकिन करीब पांच साल बाद देश में चुनाव हो रहे हैं और आम लोग वोट करने के लिए बूथ पर पहुंच रहे हैं.
म्यांमार में मानवीय संकट गहराया
एशिया के इस देश में मानवीय संकट काफी गहरा रहा है. साथ ही देश गृह युद्ध के अलावा बार-बार आ रही प्राकृतिक आपदाओं से भी प्रभावित हो रहा है. मार्च 2025 में म्यांमार में एक बड़ा भूकंप आया था और इसके कारण आम लोगों को भारी संख्या में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था. हालांकि, देश में गृह युद्ध की वजह से बहुत कम लोगों को सुविधा मिल सकी. इसके अलावा म्यांमार खाद्य संकट का भी सामना कर रहा है और यही वजह है कि वहां पर रहने वाले रोंहिग्या देश छोड़कर भाग रहे हैं.
तख्तापलट के बाद देश के हालात नाजुक
म्यांमार में आंग सान सू की निर्वाचित सरकार को हटाने के बाद हालात काफी नाजुक हैं. तख्तापलट के बाद से ही सेना देश चला रही है. साथ ही अब चुनाव के माध्यम से सेना अपनी सत्ता को वैध साबित करने में जुटी है. अभी तक दो चरणों के नतीजों को ध्यान में रखते हुए सेना समर्थित यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) बढ़त बनाए हुए हैं. राष्ट्रीय संसद में उच्च और निम्न सदन में पहले से ही सेना की 25 फीसदी सीटें आरक्षित हैं, जो पहले ही सेना का नियंत्रण को साबित करता है.
क्या होगी लोकतंत्र की वापसी?
वहीं, म्यांमार में अभी तीनों चरणों के चुनाव समाप्त ही नहीं हुए हैं कि सैन्य शासन पर कई तरह के आरोप लगने लगे हैं. साथ ही लोगों ने इस चुनाव में भी निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में लोकतंत्र की बहाली की उम्मीद बहुत कम की जा रही है. इसके अलावा देश में जारी सैन्य शासन और प्रतिरोध समूहों के बीच गतिरोध को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये चुनाव शंका घेरे में हैं. दूसरी तरफ कई देशों ने चुनाव की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए हैं. इसी बीच आलोचकों का कहना है कि लोकतंत्र की बहाली तो नहीं होगी, सैन्य शासन ही अपना काम करता रहेगा.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
