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भारत का SCO मंच से कड़ा संदेश : राजनाथ ने कहा-आतंकवाद पर दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं

by Sanjay Kumar Srivastava 20 October 2026, 9:39 PM IST
20 October 2026, 9:39 PM IST
भारत का SCO मंच से कड़ा संदेश: आतंकवाद पर दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं, वैश्विक स्तर पर जीरो टॉलरेंस की वकालत

SCO: भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच से इसके पूरे ‘इकोसिस्टम’ को खत्म करने का आह्वान किया है. ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित SCO की ‘काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट’ की 25वीं बैठक को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात कही. इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी उपस्थित थे. रक्षा मंत्री ने सदस्य देशों से आतंकवाद से निपटने के लिए एकजुट होने की अपील की. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद का किसी भी रूप में कोई औचित्य नहीं हो सकता और वैश्विक स्तर पर इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए.

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पनाहगाहों पर रक्षा मंत्री का प्रहार

रक्षा मंत्री सिंह ने जोर देकर कहा कि जो देश आतंकवादियों को आर्थिक मदद देते हैं, उनका समर्थन करते हैं या उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराते हैं, उनके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कोई जगह नहीं होनी चाहिए. आतंकवाद के दुष्प्रभावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारे समाजों को कट्टरपंथी बनाता है और युवाओं को उनके सुनहरे अवसरों से वंचित करता है. भारत का यह कड़ा संदेश सीधे तौर पर सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद को पनाह देने वाली ताकतों के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रहा.

निवेश और व्यापार पर बुरा असर डालता है आतंकवाद

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के कारण निर्दोष लोगों की जान जाती है और निवेश तथा व्यापार पर बुरा असर पड़ता है. रक्षा मंत्री ने SCO के सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया. उन्होंने आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया. अपने संबोधन में सिंह ने अगस्त-सितंबर 2026 में बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन की चर्चाओं को भी याद किया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों से जुड़े मुद्दों पर SCO द्वारा ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया था.

आम सहमति से सहयोगी देश करें चुनौतियों का सामना

उन्होंने कहा कि भारत का मानना ​​है कि SCO को संप्रभु समानता, आम सहमति और आपसी सम्मान के सिद्धांतों पर अडिग और प्रभावी बने रहना चाहिए. संस्थानों की संख्या अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि उपलब्धियां भी अधिक होंगी. उन्होंने आगे कहा कि नई व्यवस्थाओं का ध्यान स्पष्ट रूप से पहचानी गई जरूरतों पर होना चाहिए, काम के दोहराव से बचना चाहिए और SCO सदस्यों को व्यावहारिक लाभ पहुंचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए.

सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि SCO को आम सहमति बनानी चाहिए और उसे ठोस कार्रवाई में बदलना चाहिए, ताकि अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल से निपटा जा सके. इस माहौल में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं और उभरते तकनीकी अंतर जैसी चुनौतियां शामिल हैं.

तकनीक का लाभ उठाएं सहयोगी देश

उन्होंने कहा कि मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने, व्यापार व निवेश को बढ़ावा देने और विकास को गति देने के लिए तकनीक का लाभ उठाने की आवश्यकता है. सिंह ने 2026-2030 की अवधि के लिए ‘बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम’ के तहत एक कार्य योजना को अपनाने के प्रति भारत के समर्थन को फिर से दोहराया. उन्होंने बिश्केक शिखर सम्मेलन में लिए गए उन फैसलों का भी स्वागत किया, जिनके तहत ताशकंद में ‘यूनिवर्सल सेंटर’ और दुशान्बे में ‘एंटी-ड्रग सेंटर’ को इस समूह के स्थायी निकायों के रूप में स्थापित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इनकी प्रभावशीलता बेहतर समन्वय और कार्यों के समय पर निष्पादन पर निर्भर करेगी. साझा समृद्धि के लिए कनेक्टिविटी के महत्व पर जोर देते हुए सिंह ने कहा कि भारत ऐसी पहलों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ती हैं, व्यापार को आसान बनाती हैं और विकास के नए रास्ते खोलती हैं.

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कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर

उन्होंने कहा कि ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ और ‘चाबहार बंदरगाह’ जैसी पहल मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं. हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कनेक्टिविटी सभी देशों के साथ परामर्श पर आधारित होनी चाहिए और इसमें सभी देशों की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जो परियोजनाएं इन सिद्धांतों पर आधारित नहीं होंगी, वे टिकाऊ नहीं हो सकेंगी.

सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पूरे क्षेत्र में व्यापार करने की लागत को कम करने के लिए, केवल भौतिक कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर काम करने की जरूरत है. इसके लिए कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाना, डिजिटल दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना, लॉजिस्टिक्स में सुधार करना और ऐसे डिजिटल समाधान अपनाना जरूरी है जो आपस में आसानी से जुड़ सकें.

कहा-महिलाओं के नेतृत्व में विकास की नई दिशा

रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि हमारी सफलता को इस आधार पर मापा जाना चाहिए कि हम युवाओं के लिए कितने अवसर पैदा करते हैं, अपने उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खोलते हैं, किसानों और छोटे कारोबारियों को कौन सी तकनीकें उपलब्ध कराते हैं और समाजों के बीच किस तरह के संबंध विकसित करते हैं. उन्होंने भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे) का जिक्र किया, जिसने सार्वजनिक सेवाओं के वितरण के तरीके को बदल दिया है और वित्तीय समावेश (फाइनेंशियल इंक्लूजन) को बढ़ावा दिया है. उन्होंने बताया कि भारत ने दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक तैयार किया है. साथ ही, देश का ‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ पर जोर इस सोच पर आधारित है कि विकास की दिशा तय करने में महिलाओं की अहम भूमिका होती है.

भारत ने मिलकर काम करने की कही बात

उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ‘इंटरनेशनल सोलर एलायंस’ और ‘कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ जैसी भारत की वैश्विक पहलें किफायती स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास में योगदान दे रही हैं. उन्होंने आगे कहा कि ‘मिशन LiFE’ टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदारी से उपभोग करने को बढ़ावा देता है, जबकि ‘ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस’ स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को प्रोत्साहित करता है. उन्होंने SCO सदस्यों से आग्रह किया कि वे पिछले 25 वर्षों में बनी मजबूत नींव को और आगे बढ़ाएं और आम सहमति पर आधारित सहयोग तथा ठोस नतीजों पर केंद्रित एक भविष्योन्मुखी रोडमैप तैयार करें. उन्होंने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी SCO सदस्यों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया.

भारत ने सदस्य देशों को किया आमंत्रित

रक्षा मंत्री सिंह ने सदस्य देशों को इस साल के आखिर में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले पहले ‘SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम’ (SCO सभ्यता संवाद मंच) में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया. बैठक में SCO सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की गई. साथ ही, परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की गई. रक्षा मंत्री, जो दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर ताजिकिस्तान में हैं, ने बाद में ‘X’ पर पोस्ट किया कि उन्हें SCO CHG (SCO काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट) में भारत का प्रतिनिधित्व करने की खुशी है. उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि यह बैठक बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई. भारत ने इस मंच को क्षेत्रीय शांति, सतत विकास और स्थायी स्थिरता के प्रति अपनी पूरी प्रतिबद्धता का भरोसा दिलाया.

क्या है SCO

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई (चीन) में हुई थी. यह मुख्य रूप से एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है. इस संगठन की नींव मूल रूप से 1996 में ‘शंघाई फाइव’ के रूप में रखी गई थी, लेकिन 2001 में उजबेकिस्तान के शामिल होने के बाद इसे आधिकारिक तौर पर SCO नाम दिया गया. इसका मुख्यालय बीजिंग (चीन) में स्थित है.
वर्तमान में SCO में कुल 10 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं. इसके संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान थे. समय के साथ इस संगठन का विस्तार हुआ और नए देश इसमें शामिल हुए.

  • वर्ष 2017: भारत और पाकिस्तान को पूर्ण सदस्यता मिली.
  • वर्ष 2023: ईरान इसका स्थाई सदस्य बना.
  • वर्ष 2024: बेलारूस इस संगठन का 10वां पूर्ण सदस्य देश बना.

SCO का मुख्य उद्देश्य

शंघाई सहयोग संगठन का प्राथमिक उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, सौहार्द और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना है. इसके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं.

  • क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद का मुकाबला: सदस्य देशों के बीच सैन्य और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना. इसके लिए ताशकंद में ‘क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना’ (RATS) काम करती है, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ती है.
  • आर्थिक और व्यापारिक सहयोग: राजनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना.
  • एक नई वैश्विक व्यवस्था: शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाना ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके.
    यह संगठन आज दुनिया की लगभग 40% आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के करीब 25% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर एक बेहद शक्तिशाली मंच बन चुका है.

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