SCO Summit: भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और आतंकवाद व चरमपंथ जैसे अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने पर विशेष ज़ोर दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा साझा किए गए 13 प्रमुख नतीजों में सबसे महत्वपूर्ण ‘SCO सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए चुनौतियों और खतरों से निपटने हेतु एक यूनिवर्सल सेंटर’ के नियमों को मंज़ूरी देना है. यह नया सेंटर सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, चरमपंथ, संगठित अपराध और अन्य अंतरराष्ट्रीय खतरों से मिलकर लड़ने में मदद करेगा.
जिनपिंग और शरीफ के सामने मोदी का कड़ा रुख
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘यूनिवर्सल सेंटर’ बनने से देशों के बीच बेहतर तालमेल बैठेगा और खुफिया जानकारी साझा करने में आसानी होगी. सुरक्षा का यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की मौजूदगी में शिखर सम्मेलन को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कड़ा रुख अपनाते हुए SCO समूह से उन देशों का मिलकर मुक़ाबला करने का आह्वान किया जो आतंकवाद को सरकारी नीति के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.
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भारत ने आतंकवादी फंडिंग का किया विरोध
प्रधानमंत्री ने SCO से अपील की कि वे आतंकवादी फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए एकजुट होकर काम करें और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों को खारिज करें. इन बातों को पाकिस्तान पर सीधे हमले के तौर पर देखा जा रहा है. मोदी ने कहा कि हमें उन देशों को कड़ा संदेश देना चाहिए जो आतंकवाद का इस्तेमाल हथियार के तौर पर करते हैं और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने और समर्थन देते हैं. कहा कि आतंकवाद कभी भी किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता. विदेश मंत्रालय द्वारा बताए गए नतीजों में ‘बिश्केक घोषणा’ भी शामिल है. उम्मीद है कि इससे भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा, विकास और कनेक्टिविटी पर अपना पक्ष रखने का मंच मिलेगा और मध्य एशिया तथा व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र के साथ उसका जुड़ाव मजबूत होगा.

SCO चार्टर में हुआ संशोधन
एक और नतीजा SCO चार्टर में संशोधन और नई बातें जोड़ने से जुड़ा प्रोटोकॉल है. इससे भारत को समूह के बदलते संस्थागत ढांचे को आकार देने में भाग लेने का मौका मिलेगा और SCO ढांचे में अंग्रेजी को शामिल करने में मदद मिलेगी. SCO एक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा समूह है, जिसे 2001 में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर बनाया था. बाद में इसमें भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस को पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल किया गया. इसके अलावा कई अन्य देशों को ऑब्जर्वर या डायलॉग-पार्टनर का दर्जा दिया गया.
एंटी नारकोटिक्स नियमों को मिली मंजूरी
SCO का ढांचा असल में यूरेशिया का एक स्थायी अंतर सरकारी और क्षेत्रीय सहयोग संगठन है, जो सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और आर्थिक व राजनीतिक सहयोग पर केंद्रित है. इस समूह ने इस साल अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाई और किर्गिस्तान की अध्यक्षता में बिश्केक में शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया. मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने SCO एंटी नारकोटिक्स सेंटर की कार्यकारी समिति के नियमों को मंज़ूरी देने के फैसले का भी ज़िक्र किया. इससे सदस्य देशों के बीच सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी. नशीली दवाओं की लत से निपटने और सिंथेटिक ड्रग्स व उनके कच्चे माल के प्रसार को रोकने के लिए कार्यक्रम भी 13 प्रमुख नतीजों में शामिल थे. ये कार्यक्रम 2030 तक चलेंगे.
आपदा प्रबंधन पर सहयोग की बात
पहले कार्यक्रम का मकसद रोकथाम, इलाज और पुनर्वास के क्षेत्र में बेहतरीन तरीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है, जबकि दूसरे का लक्ष्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने और ऑपरेशनल तालमेल को बेहतर बनाना है. विदेश मंत्रालय ने ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा प्रणालियों के विकास में सहयोग से जुड़े बयानों का भी ज़िक्र किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इनसे तकनीक, अनुभव और बेहतरीन तौर-तरीकों के आदान-प्रदान के साथ-साथ ऊर्जा प्रणालियों को आधुनिक बनाने और उन्हें मज़बूत करने में सहयोग की गुंजाइश बनती है. आपातकालीन स्थितियों से प्रभावित देशों को मदद देने के बारे में SCO के एक बयान पर भी ज़ोर दिया गया. इसमें आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्र में विशेषज्ञता साझा करने की बात कही गई.
2010 के समझौते में होगा संशोधन
एक और प्रोटोकॉल का मकसद अपराध से निपटने में SCO सरकारों के बीच सहयोग पर 2010 के समझौते में संशोधन करना है. इस संशोधन का उद्देश्य संगठित और सीमा-पार अपराधों के खिलाफ कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच तालमेल को मज़बूत करना है. विदेश मंत्रालय ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन का भी ज़िक्र किया, जो जलवायु अनुकूलन और शमन, जलवायु-अनुकूल विकास और तकनीक पर सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करता है.

SCO सदस्य देशों की अधिकृत एजेंसियों के बीच सूचना के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक MoU भी नतीजों में शामिल था. इसका मकसद SCO सूचना क्षेत्र में संस्थागत आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और भारत के नज़रिए और पहलों का व्यापक प्रसार करना है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी. मंत्रालय के अनुसार, इससे भारत को अपना डिजिटल और AI अनुभव साझा करने, AI के ज़िम्मेदार और समावेशी इस्तेमाल को बढ़ावा देने और SCO के भीतर टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पार्टनरशिप को बढ़ाने का मौका मिलेगा.
शी का सुरक्षा को मुख्य प्राथमिकता बनाने का आग्रह
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्यों से सुरक्षा को मुख्य प्राथमिकता बनाने और आतंकवाद, अलगाववाद, चरमपंथ, सीमा-पार संगठित अपराध, ड्रग तस्करी और टेलीकॉम धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान किया. किर्गिस्तान की राजधानी में SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए शी ने कहा कि हमें सुरक्षा को मुख्य लक्ष्य मानने और साझा सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए.
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कहा कि हमें पारंपरिक और गैर पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए समन्वित उपाय करने चाहिए. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेता शामिल हुए थे. उन्होंने आगे कहा कि हमें आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ की तीन ताकतों, सीमा-पार संगठित अपराध, ड्रग तस्करी और टेलीकॉम धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.
आंतरिक मामलों में न हो बाहरी ताकतों का दखल
शी ने परमाणु सुरक्षा और संरक्षा के लिए बहुपक्षीय साझेदारी की आवश्यकता के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि हम परमाणु सुरक्षा के प्रति समझदारी भरे, समन्वित और संतुलित दृष्टिकोण में विश्वास करते हैं और परमाणु सुरक्षा और संरक्षा के लिए मजबूत बहुपक्षीय साझेदारी का समर्थन करते हैं. हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा. शी ने कहा कि SCO सदस्य देशों को सूचना सुरक्षा, बायो-सिक्योरिटी और बाहरी अंतरिक्ष सुरक्षा पर सहयोग मजबूत करना चाहिए.अमेरिका की परोक्ष आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि हमें बाहरी ताकतों को हमारे आंतरिक मामलों में दखल देने, हमारी राजनीतिक सुरक्षा को खतरे में डालने और क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने से रोकना होगा.
SCO ने तय किया है एक असाधारण सफर
शी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में SCO ने एक असाधारण सफर तय किया है और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है. शी ने कहा कि इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह लगातार एक नए प्रकार के क्षेत्रीय सहयोग संगठन के रूप में विकसित हुआ है, जिसका क्षेत्रफल और जनसंख्या सबसे अधिक है और जिसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि सहयोग के लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण अनुभव यह है कि इसने साथ रहने का सही तरीका खोजा है, जिसमें किसी गुट में शामिल न होना, टकराव से बचना और किसी तीसरे पक्ष को निशाना न बनाना शामिल है, जिससे क्षेत्रीय देश मिलकर एक साझा घर बना सकें.
SCO और ब्रिक्स पर चीन का रुख
शी ने कहा कि SCO की सबसे मूल्यवान आध्यात्मिक संपत्ति यह है कि इसने आपसी विश्वास, आपसी लाभ, समानता, परामर्श, सभ्यताओं की विविधता का सम्मान और साझा विकास की खोज की. ‘शंघाई भावना’ की शुरुआत की और तब से लगातार इसका पालन किया है. SCO सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं. चीन, जिसने रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ मिलकर इस संगठन की स्थापना की थी, बीजिंग में SCO मुख्यालय की मेजबानी करता है. शी, जिनके 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने की भी उम्मीद है, ने कहा कि चीन SCO डिजिटल इकोनॉमी फोरम, SCO एग्रीकल्चरल एक्सपो और अन्य कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करना जारी रखेगा.
बनेगा AI एप्लीकेशन कोऑपरेशन सेंटर
शी ने कहा कि हम SCO के साथी देशों के साथ मिलकर एक इंटरनेशनल AI एप्लीकेशन कोऑपरेशन सेंटर बनाएंगे, फोटोवोल्टिक और विंड पावर की क्षमता को 10-10 मिलियन किलोवाट तक बढ़ाने के लिए SCO के साथी देशों के साथ काम करना जारी रखेंगे. अगले तीन वर्षों में अन्य SCO देशों के साथ 100 तकनीकी सहयोग प्रोजेक्ट लागू करेंगे और चीन-SCO सहयोग के ज़रिए ग्रीन इंडस्ट्री के और अधिक टैलेंट को तैयार करेंगे. शी ने आगे कहा कि इस क्षेत्र में व्यापार और लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने के लिए चीन ट्रांस-कैस्पियन इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के कामकाज और दक्षता को बेहतर बनाएगा. तियानजिन में एक चीन-SCO पोर्ट इकोनॉमिक कोऑपरेशन सेंटर स्थापित करेगा.

मिलकर करें वैश्विक चुनौतियों का समाधान
शी ने कहा कि अधिक न्यायपूर्ण और उचित वैश्विक शासन प्राप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और जीवंतता को फिर से मज़बूत करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि केवल एक या कुछ देशों का दबदबा या गुटों की राजनीति सच्चा बहुपक्षवाद नहीं है. उन्होंने प्रमुख देशों से नियमों और कानून के शासन को बनाए रखने में नेतृत्व करने और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने का आह्वान किया.
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