Introduction
Strait of Hormuz: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग और तनाव को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. दोनों ही देश इस युद्ध को समाप्त करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं. बीते दिनों अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा था, “यह मानते हुए कि ईरान सहमत शर्तों को मानने के लिए राजी हो जाता है, जो शायद एक बड़ी धारणा है, तो पहले से ही चर्चित ‘एपिक फ्यूरी’ का अंत हो जाएगा और अत्यधिक प्रभावी नाकाबंदी के कारण स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज ईरान सहित सभी के लिए खुला रहेगा.” हालांकि, उन्होंने आगे यह भी कहा था, “अगर वे सहमत नहीं होते हैं तो बमबारी शुरू हो जाएगी और दुख की बात है कि यह पहले की तुलना में कहीं अधिक हाई लेवल पर और तेज होगी.”
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस तनाव के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. इसकी वजह यह है कि इस समुद्री रास्ते से विश्व की करीब 20 फीसदी एनर्जी सेक्टर की चीजों जैसे तेल, गैस आदि की सप्लाई की जाती है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध और तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हो गया है. ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है और यहां से जाने की कोशिश करने वाले जहाजों पर हमला भी कर रहा है. इस वजह से समुद्री मार्ग पर जहाजों का ट्रैफिग लगा हुआ है और एनर्जी सप्लाई चैन बाधित हो चुका है. वहीं, इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी और ईरान से होर्मुज को खोलने की बात कहने लगा. अब सवाल यह है कि आज नहीं तो कल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तो खुल जाएगा, लेकिन इसके झटके से उबरने में विश्व की अर्थव्यवस्था को कितना समय लगेगा?
Table of content
- 28 फरवरी को ईरान पर हुआ था हमला
- अमेरिका ने ईरान पर क्यों किया अटैक?
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए महत्वपूर्ण
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और भारत
- ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और प्रोजेक्ट फ्रीडम
- ईरान-अमेरिका युद्ध से विश्व अर्थव्यवस्था कितना प्रभावित?
- इकोनॉमी में चौथे से छठे स्थान पर पहुंचा भारत
- विश्व अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में कितना लगेगा समय?
28 फरवरी को ईरान पर हुआ था हमला
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और इसके बंद हो जाने से भारत समेत दुनिया के कई देशों के प्रभावित होने की बात पर नजर डालेंगे, लेकिन उससे पहले यह जान लेते हैं कि आखिरकार ईरान और अमेरिका के बीच यह युद्ध कब और क्यों शुरू हुआ. जी हां, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला बोल दिया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली हुसैनी खामनेई की मौत हो गई. अपने सुप्रीम लीडर की मौत से बौखलाए ईरान ने इजरायल सहित दुनिया के कई देशों में बनाए गए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया. उसने मिसाइल और ड्रोन की मदद से यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान समेत अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला किया. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया.

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अमेरिका ने ईरान पर क्यों किया अटैक?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल यह कभी नहीं चाहते हैं कि ईरान के पास अपना परमाणु हथियार हो. ईरान कई सशस्त्र समूहों और संगठनों का सहयोग करता है, जो अमेरिका और इजरायल समेत दुनिया के कई देशों के लिए आतंकी संगठन हैं. इनमें हिजबुल्लाह, हूती, हमास समेत अन्य ग्रुप हैं. अमेरिका इन्हें दुनिया के लिए खतरा बताता है. अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हो गया तो यह इजरायल, अमेरिका के साथ-साथ उसके सहयोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है. अमेरिका ने ईरान को कुछ घातक मिसाइलों को भी न बनाने की सलाह दी थी, लेकिन ईरान परमाणु बम और मिसाइल बनाने की अपनी बात पर अड़ा रहा. इसके अलावा, ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने को लेकर भी अमेरिका ने हमला किया था. अमेरिका ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के ऊपर हमले, दमन और क्षेत्रीय अशांति को देखते हुए भी तेहरान पर अटैक किया था. वहीं, मध्य पूर्व एशिया में ईरान की बढ़ते ताकत को कम करना भी इस हमले की एक वजह बताई जा रही है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए महत्वपूर्ण
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह जब से ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में युद्ध का केंद्र बना है, तब से इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया तो प्रभावित हुई ही है, लेकिन उससे भी अधिक इसने एशियाई बाजारों को प्रभावित किया है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और भारत
भारत के लिए भी यह रास्ता बहुत ही खास है क्योंकि यहां से वह 30 से 50 फीसदी तक कच्चे तेल और गैस का आयात करता है. भारत इसी समुद्री मार्ग से ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों से तेल का आयात करता है. अब यह समुद्री मार्ग प्रभावित हो गया है तो भारत ने अपने खास मित्र रूस से कच्चे तेल की सप्लाई को और अधिक बढ़ा दी है. हालांकि, ईरान एक मित्र राष्ट्र के नाते भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जाने देने की बात कहता रहा है. वहीं, इस दौरान वह अपने दुश्मन देशों के जहाजों को बिल्कुल भी गुजरने नहीं दे रहा है.
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और प्रोजेक्ट फ्रीडम
ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत की थी. इसके जरिए यूएस ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए, जिसमें मिसाइल निर्माण, परमाणु ठिकाना और कई सैन्य ठिकाने शामिल थे. इस ऑपरेशन को अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की देखरेख में शुरू किया गया था. हालांकि, ईरान पर काफी हमलों के बाद इसे 5 मई को खत्म कर देने की घोषणा कर दी गई थी. अमेरिका ने यह कहते हुए ऑपरेशन को बंद करने का फैसला किया था कि उसने अपने सभी टारगेट को प्राप्त कर लिया है.
इसके अलावा अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज में प्रोजेक्ट फ्रीडम चलाया. इसका मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को ईरान के हमलों से बचाना था. इसे 2 से 4 मई के बीच लॉन्च किया गया था, लेकिन सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने से मना कर दिया. उसके बाद अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोक दिया. हालांकि, होमुर्ज में सबकुछ ठीक नहीं हुआ तो अमेरिका प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस भी शुरू कर सकता है.

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युद्ध से विश्व अर्थव्यवस्था कितना प्रभावित?
ईरान और अमेरिका युद्ध ने विश्व की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भूमिका कभी न भुलाये जाने वाली है. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की शुरुआत एक-दूसरे पर हमले से हुई थी, लेकिन बहुत जल्द ही इस युद्ध का अखाड़ा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया. अमेरिका के द्वारा अपने पर तेज हमले को देखते हुए ईरान ने सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का फैसला किया. अभी तक इस युद्ध में जो तनाव केवल ईरान और अमेरिका के बीच था, वह अब होर्मुज के बंद हो जाने से पूरी दुनिया और उसकी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया भर के प्रमुख देश, जो अर्थव्यवस्था की दृष्टि से काफी मायने रखते हैं, वे प्रभावित होने लगे. भारत समेत विश्व के कई देशों में तेल, गैस की परेशानी होने लगी. कई देशों में इमरजेंसी जैसे हालात हो गए, वहीं कई देशों में गैस समेत पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगीं. ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध और तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से दुनिया के कई देशों की आम जनता को महंगाई के रूप में परेशान करने लगा. लोग गैस, तेल के लिए लंबी-लंबी कतारें लगाने लगे. कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी की शिकायतें भी आने लगीं. तेल और गैस जैसी महत्वपूर्ण चीजों के लिए सप्लाई चैन प्रभावित होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी.
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से दुनिया के विभिन्न देशों में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया. गैस के दाम बढ़ गए. भारत की बात करें तो यहां कमर्शियल गैस के भाव प्रति सिलेंडर 900 से अधिक रुपये बढ़ गए. दुनिया में हवाई जहाज के ईंधन की कीमत भी महंगी हो गई. इतना ही नहीं, अमेरिका की स्पिरिट एयरलाइंस ने ईंधन के बढ़ते दाम का हवाला देते हुए अपने ऑपरेशन को बंद करने का फैसला कर दिया. उसने रातोंरात अपनी सभी फ्लाइटें कैंसिल कर दीं.
अमेरिका समेत कई देशों में महंगाई बढ़ गई. दुनिया में आर्थिक मंदी का खतरा मंडराने लगा. जानकार बताते हैं कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यह तनाव जारी रहता है तो दुनिया की अर्थव्यवस्था की विकास दर 2 से 2.5 प्रतिशत तक गिर सकती है. इस संकट ने कई लोगों की नौकरियों को भी खत्म कर दिया है. यूरोप की जीडीपी में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट की बात कही जा रही है.

इकोनॉमी में चौथे से छठे स्थान पर पहुंचा भारत
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत दुनिया की सबसे बड़ी चौथी अर्थव्यवस्था से अब 2 पायदान नीचे आ गया है. आईएमएफ यानी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (International Monetary Fund) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है. 32.38 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है. दूसरे पर चीन (20.85 ट्रिलियन डॉलर), तीसरे पर जर्मनी (5.45 ट्रिलियन डॉलर), चौथे पर जापान (4.38 ट्रिलियन डॉलर), पांचवें पर यूनाइटेड किंगडम (4.26 ट्रिलियन डॉलर)और छठे पर भारत (4.15 ट्रिलियन डॉलर) है.
भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट के कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध में बढ़ते कच्चे तेल के दाम और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी प्रमुख है. इसके अलावा भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली, उच्च व्यापार घाटा भी हैं. ईरान-अमेरिका तनाव ने देश के एनर्जी सेक्टर को प्रभावित किया है. इस वजह से देश की कई तेल कंपनियों का मुनाफा भी कम हुआ है. शेयर बाजार में बीते दिनों हजार से अधिक अंकों की एक-एक दिन में गिरावट दर्ज की गई. मार्केट में तेल और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी सुस्ती दिखी.
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विश्व अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में कितना लगेगा समय?
ईरान-अमेरिका के बीच जारी इस तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाधित होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुई है. अब जब यह संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका और ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए जल्द ही किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं, तो इस बीच एक सवाल यह उठ रहा है कि इस तनाव और युद्ध से विश्व की अर्थव्यवस्था को जो झटका लगा है, उससे यह कब तक उबर सकती है? मतलब कि इन दोनों देशों के बीच तनाव खत्म होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुल जाने के बाद विश्व की अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में कितना समय लगेगा? इस सवाल पर एक्सपर्ट्स के कई राय हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस झटके से उबरने में विश्व की अर्थव्यवस्था को आराम से साल भर का समय लग सकता है.
कुछ जानकार बताते हैं कि तेल और गैस की बढ़ी कीमतें कम होने में समय लग सकता है और यह धीरे-धीरे ही कम होंगी. इससे भी विश्व की अर्थव्यवस्था को अपनी पटरी पर आने में वक्त लग सकता है. ईरान को लेकर जानकार कहते हैं कि अमेरिका के द्वारा उसपर किए गए हमले खासकर के उसके तेल ठिकानों पर हुए हमले से उसे काफी नुकसान हुआ होगा. अब तेल उत्पादन की गति को पहले की तरह बनाने में उसे समय लगेगा. इसमें आराम से महीने भर टाइम लगने की संभावना जताई जा रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने के बाद इस रास्ते जहाजों की आवाजाही पहले की तरह करने में भी समय लगने वाला है क्योंकि जहाजों के इंश्योरेंस प्रीमियम बहुत समय तक ज्यादा रह सकता है. इससे ट्रे़ड की गति आने वाले कुछ महीनों में जाकर पटरी पर पहले की तरह लौट पाएगी.
Conclusion
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को तंग कर रखा है. अब सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह जंग और तनाव खत्म हो. दुनिया की निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि आखिर कब यह मामला शांत होगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पहले की तरह होगी. पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को खत्म करने की कोशिश हो रही है. इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच पहले दौर की बातचीत के बाद दूसरे दौर की वार्ता रद्द हो गई थी. अब एक बार फिर से ईरान और अमेरिका शांति समझौते को लेकर नजदीक आ रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही कुछ सकारात्मक समाधान निकलेगा. तनाव खत्म होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल जाने से दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से अपनी गति के साथ मजबूत होती दिखेगी. भारत समेत विश्व के शेयर बाजार में तेजी दिखेगी और मार्केट में निवेश भी बढ़ेगा.
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