SIR Row: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया. यह नोटिस लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक की ओर से दायर याचिका पर जारी किया गया है. याचिका में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है. अब सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से जवाब मांगा है.
राजनीतिक जुलूस पर उठे सवाल
12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक ने SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करने के दौरान सुप्रीम कोर्ट तक एक मार्च निकाला था. इस पर एक अधिवक्ता ने सवाल खड़ा किया कि यह मार्च शीर्ष अदालत पर दबाव बनाने के लिए यह मार्च निकाला था. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन सुप्रीम कोर्ट को धमका नहीं सकता है. दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और उसके घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह के दबाव बनाने के प्रयास पर चिंता जताए हुए एक ज्ञापन हस्ताक्षर किए. इस मुद्दे पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट ऐसी घटनाओं से अंजान नहीं है और वह ‘हाथीदांत की मीनार’ पर बैठकर काम नहीं कर रही है. CJI ने कहा कि कोर्ट इस तरह की घटनाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं देती है. साथ ही अदालत कोर्ट के बाहर दिए गए बयानों से भी अवगत है.
याचिका में इन नेताओं के भी नाम
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, एनसीपी (SP) नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत समेत अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं. याचिका 12 अक्तबूर को दायर की गई थी और याचिका में शुरुआती कमियों को दूर करने के बाद 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसे पंजीकृत कर लिया.
पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठा
वहीं, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के लिए सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठा. एक वकील ने कोर्ट में दलील दी कि प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और उन्हें प्रदर्शन करने की एक ऐसी जगह मिलनी चाहिए, जहां पर उनकी बात को सुना जाए. अदालत ने संकेत दिया कि तकनीक की मदद से भी उनकी बात सुनी जा सकती है. न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि ‘सुने जाने’ (heard) शब्द को तकनीक के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए.
बर्ताव को लेकर कोर्ट मांगेगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान उन याचिकाओं को भी शामिल हैं किया गया है, जिनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों (जिनमें वकील और पत्रकार भी हैं) को कथित तौर पर हिरासत में लेने और परेशान करने को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने INDIA गठबंधन के नेताओं की ओर से दायर एक याचिका में शामिल 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के बर्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है. इस याचिका में मतदाता सूची (Voter Rolls) के संबंध में ECI (चुनाव आयोग) की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है. कोर्ट ने ‘गठबंधन के नेताओं की इस याचिका पर ECI से जवाब मांगा है. कोर्ट ने टिप्पणी की, “हम इस याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं, लेकिन हम याचिकाकर्ताओं में से एक के बर्ताव को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगेंगे.
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