Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: बॉलीवुड में अपनी जबरदस्त कॉमेडी से लोगों को हंसाने वाले एक्टर राजपाल यादव पिछले कई सालों से कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. अब उनके लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत भरी खबर आई है. दरअसल, करीब 16 साल पुराने चेक बाउंस मामले में देश की सबसे बड़ी अदालत ने विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने का रास्ता सुझाया है. इतना ही नहीं, कोर्ट ने राजपाल यादव का पासपोर्ट भी वापस करने का आदेश दिया है, ताकि वो विदेश जाकर अपने प्रोफेशनल काम पूरे कर सकें. हालांकि, एक्टर को विदेश यात्रा के दौरान अदालत की तय शर्तों का पालन करना होगा.
क्यों मिली राजपाल को राहत?
गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में राजपाल यादव और उनकी पत्नी से जुड़े चेक बाउंस मामले की सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया गया कि एक्टर और उनकी पत्नी ने अदालत की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं. इसके बाद कोर्ट ने कहा कि मामले को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना है. अदालत ने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने का निर्देश दिया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसके लिए एक बीच का रास्ता निकाला जाएगा.
वापस मिलेगा पासपोर्ट
सुनवाई के दौरान एक्टर के वकील विक्रांत ने बताया कि राजपाल यादव को एक प्रोफेशनल कार्यक्रम के लिए कनाडा जाना है. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से एक्टर को कुछ कमाई भी हो सकती है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को राजपाल यादव का पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया. हालांकि, कोर्ट ने क्लियर किया कि एक्टर को विदेश यात्रा के लिए कुछ शर्तों का पालन करना होगा. भारत लौटने के बाद उन्हें ट्रायल कोर्ट को इसकी जानकारी भी देनी होगी.
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पुश्तैनी संपत्ति बेची
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि एक्टर ने रकम जुटाने के लिए अपनी पुश्तैनी संपत्ति तक बेच दी. वकील ने कहा कि राजपाल यादव अदालत के पिछले आदेशों का पालन करते हुए पूरे दो करोड़ रुपये जमा कर चुके हैं. उन्होंने एक्टर की तीन महीने की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की मांग भी की. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी. कोर्ट ने कहा कि जब दो करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं, तो दोनों पक्षों को उचित रवैया अपनाकर विवाद सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए.
16 साल पुराना विवाद
राजपाल यादव का ये कानूनी विवाद साल 2010 से जुड़ा है. दरअसल, एक्टर ने अपने डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये लिए थे. शिकायतकर्ता कंपनी के मुताबिक, साल 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था. इसके तहत एक्टर, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी को ब्याज के साथ करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने थे. कंपनी का आरोप है कि साल 2013 में राजपाल यादव ने भुगतान के लिए 1.05 करोड़ रुपये के 7 चेक दिए थे, लेकिन सभी बाउंस हो गए. इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और कानूनी लड़ाई शुरू हो गई.
तीन महीने की सजा
इस मामले में अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी. बाद में ये सजा घटाकर तीन महीने कर दी गई. जुलाई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी चेक बाउंस के मामलों में एक्टर की दोषसिद्धि बरकरार रखी. हाई कोर्ट ने याचिका दाखिल करने में 1,894 दिनों की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया था. अदालत ने राजपाल यादव को सातों मामलों में शिकायतकर्ता को एक करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करने का निर्देश दिया था. वहीं, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव पर भी हर मामले में करीब 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था.
पहले भी दी थी सलाह
इससे पहले 7 अक्टूबर को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने राजपाल यादव को अच्छी फिल्म बनाने, लोगों का मनोरंजन करने और अपनी इमेज दोबारा मजबूत करने की सलाह दी थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता खोल दिया है. हालांकि, मध्यस्थता का आदेश आने का मतलब ये नहीं है कि चेक बाउंस का मामला खत्म हो गया है या राजपाल की सजा रद्द हो गई है. बस इतना है कि, फिलहाल दोनों पक्षों को समझौते की कोशिश करनी होगी. अब देखना दिलचस्प होगा कि अपनी कॉमेडी से करोड़ों लोगों को हंसाने वाले राजपाल यादव को इस लंबे कानूनी विवाद से कब तक पूरी राहत मिल पाती है.
News Source: ANI
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