Home Latest News & Updates “ऊपर से लेकर नीचे तक, सभी को नतीजे भुगतने होंगे”, NSUI कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट पर भड़के राहुल गांधी

“ऊपर से लेकर नीचे तक, सभी को नतीजे भुगतने होंगे”, NSUI कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट पर भड़के राहुल गांधी

by Mayank Rai 14 October 2026, 3:57 PM IST
14 October 2026, 3:57 PM IST
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi: राजधानी दिल्ली में इस समय विरोध प्रदर्शनों की लहर है. एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल कर बैठी है, तो वहीं इंडिया गठबंधन, हर रोज कोई न कोई मार्च निकाल रहा है. पिछले एक हफ्ते से पुलिस ने दिल्ली को छावनी बनाकर रखा है. किसी को भी भीड़ जमा करने या प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं है. 10 अक्टूबर को सीजेपी के प्रस्तावित मार्च के दिन पुलिस ने एक हजार से ज्यादा छात्रों को डिटेन किया. राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी तक, कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया.

सोशल मीडिया पर पुलिस और छात्रों के बीच झड़प वाली वीडियोज की बाढ़ आ रखी है. ऐसा ही एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बारे में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि पुलिस ने कांग्रेस छात्र विंग NSUI के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की है. इसी सिलसिले में आज राहुल गांधी ने कुछ NSUI कार्यकर्ताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और केंद्र सरकार पर आरोप लगाएं. उन्होंने छात्रों से कहा कि आप अपने साथ होने वाली हर मारपीट-बदतमीजी का वीडियो बनाकर सूबत के तौर पर रखिए और हमें भेजिए.

‘जिम्मेदार लोगों को नतीजे भुगतने होंगे’

राहुल गांधी ने बुधवार को चेतावनी दी कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के लिए जिम्मेदार लोगों को नतीजे भुगतने होंगे. NSUI कार्यकर्ताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनकी पिटाई की थी. गांधी ने कहा, “जैसा कि मैंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, यह भारत है. अमित शाह जी, इसे अच्छी तरह देख लीजिए. यहां कोई हिंदू नहीं है, कोई मुसलमान नहीं है, किसी खास जाति का कोई व्यक्ति नहीं है; न कोई महिला है, न कोई पुरुष. एक आवाज है, एक विरोध है. यह भारत की आवाज है, और आप इस आवाज के खिलाफ खड़े हैं- प्रधानमंत्री इस आवाज के खिलाफ खड़े हैं. मैं आपको सलाह देता हूं. इस आवाज के खिलाफ खड़े न हों. कोई भी इस आवाज के खिलाफ नहीं खड़ा हो सकता.”

‘वीडियो बनाकर सबूत रखिए’

पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए, कांग्रेस नेता ने प्रदर्शनकारियों से कथित घटनाओं के सबूत सुरक्षित रखने और उन्हें पार्टी के साथ साझा करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, ” मैं सभी छात्रों से कहता हूं कि वे वीडियो रिकॉर्ड रखें और वह सबूत हमें भेजें. जब यह पूरा मामला खत्म हो जाएगा, तो हम उन सारे सबूत का इस्तेमाल करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिसे भी सजा मिलनी चाहिए, उसे सजा मिले चाहे वह पीएम नरेंद्र मोदी हों, ज्ञानेश कुमार हों, अमित शाह हों या फिर वह कॉन्स्टेबल भी जो हमारे बच्चों पर हाथ उठा रहा है.”

महिला कॉन्सटेबल ने की मारपीट

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, राहुल गांधी ने एक महिला प्रदर्शनकारी का परिचय “हमारी शेरनी” के तौर पर कराया और कहा कि कथित मारपीट के बावजूद वह निडर बनी रहीं. उन्होंने कहा, “उन्हें पीटा गया, लेकिन वह डरी नहीं. उनके दिल में कोई नफरत नहीं थी.” महिला ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जब NSUI कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा रहा था, तब एक महिला कॉन्स्टेबल ने उनके साथ मारपीट की. उन्होंने कहा, “कल, सभी NSUI कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तभी हमें तीन बसों में हिरासत में ले लिया गया. हमारे कई साथी थे, हर बस में लगभग 30-40 लोग थे. हमारी बस में दो लड़कियां और 20-30 अन्य NSUI साथी थे.” प्रदर्शनकारी ने महिला कॉन्स्टेबल की पहचान चंचल यादव के तौर पर की और आरोप लगाया कि जब हिरासत में लिए गए लोग अपना विरोध जारी रखने के लिए बस से उतरने की कोशिश कर रहे थे, तो उसने उसका गला पकड़ा और उसे धक्का दिया. चंचल यादव ने मेरा गला जोर से पकड़ा और मुझे धक्का दिया, जिससे मैं पीछे की ओर सीट पर गिर गई. फिर उसने अपने नाखूनों से मेरे चेहरे पर खरोंचें मार दीं, जिससे मेरे चेहरे और कान के पास निशान पड़ गए. जब ​​मैंने उसका विरोध किया, तो उसने मुझे जोर से थप्पड़ मारा और कहा, ‘ले, एक और थप्पड़ खा.’

पुलिस स्टेशन में पीटा

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने हिरासत में मारपीट का आरोप लगाया. उसने कहा, “मैं 4 तारीख को विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ था और 5 तारीख की सुबह हमें हिरासत में ले लिया गया. धर्मेंद्र और मुझे संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां 15 से 20 पुलिसकर्मियों ने हमारी पिटाई की. उनमें से एक या दो सादे कपड़ों में भी थे. उनमें से एक का नाम बहाब सिंह तोमर था. उन्होंने हमें बहुत बुरी तरह पीटा.” उसने आरोप लगाया, “एक अधिकारी, कॉन्स्टेबल अंकित कसाना ने संसद मार्ग से दिल्ली के बाहरी इलाके तक के पूरे रास्ते में हम दोनों की पिटाई की. जब धर्मेंद्र ने कहा कि उसे उल्टी जैसा महसूस हो रहा है, तो अधिकारी ने उससे अपना बैग खोलने और उसी में उल्टी करने को कहा. पुलिसकर्मियों ने हमसे कहा, ‘तुम्हारी वजह से हम सो नहीं पा रहे हैं.”

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने और उन्हें हटाने की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच हुई, जिसमें राहुल गांधी ने सरकार पर असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया.

“एक के बाद एक चोरी”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों पर लगी पाबंदियों को लेकर बीजेपी पर “तानाशाही” का आरोप लगाया. खड़गे ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “पहले वोट की चोरी, फिर ‘विरोध करने के अधिकार की चोरी’- यह बीजेपी की तानाशाही का सबूत है. ज्ञानेश कुमार का बचाव करना बंद करें!” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े समूहों को बिना किसी रोक-टोक के काम करने दिया जा रहा है.

सीजेपी को गांधी का समर्थन

इससे पहले, राहुल गांधी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत की आलोचना की थी, जिन्हें पांच दिन की हिरासत में भेजा गया था. गांधी ने एक्स पर लिखा, “जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है. इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरतापूर्ण काम है. छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन – सबके बैनर अलग-अलग हैं, लेकिन मकसद एक ही है. सभी विरोध प्रदर्शन एक ही हैं. नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं. जंतर-मंतर भारत के लोगों का है. हम इसे वापस हासिल करेंगे.”

चुनाव आयोग कार्यलय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कांग्रेस ने किया मार्च

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पूरा विवाद 23 सितंबर से शुरू हुआ, जब एक मीडिया रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि ज्ञानेश कुमार ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की आपत्तियों को नजरअंदाज किया. इसके बाद से ही विपक्ष और सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने दिल्ली में चुनावी गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन किए. 6 अक्टूबर को संसद भवन से चुनाव आयोग तक और 7 अक्टूबर को जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक दिया. पुलिस ने कार्यालय और जंतर-मंतर के पास कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए थे. इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव से लेकर ममता बनर्जी तक, कभी बड़े नेताओं को डिटेन किया गया. 8 अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों ने राजघाट जाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया.

10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था, जिसे रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने पूरी राजधानी को किले में तब्दील कर दिया. मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और ट्रेनें कैंसिल कर दी गईं. एक-एक छात्र और प्रदर्शनकारी को पुलिस द्वारा डिटेन कर लिया गया. अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली में एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया. 11 अक्टूबर को भी स्थिती ऐसी ही रही.

इसके बाद, 12 अक्टूबर को कांग्रेस और विपक्षी दलों ने ‘चलो दिल्ली – लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम से एक बड़ा और जोशपूर्ण मार्च निकाला, जो बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा. इस मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. दिल्ली पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे, जिनमें प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा घेरा बनाना, भारी पुलिस बल की तैनाती, ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के छह प्रमुख स्टेशनों को बंद करना शामिल था. अब देखना होगा कि इंडिया गठबंधन और सीजेपी का यह विरोध कब तक चलता है और किस दिशा में जाता है.

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News Source: ANI

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