AI Deepfake : ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों की पहचान चोरी कर बैंक लोन हासिल किए. इस मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया.
AI Deepfake : अहमदाबाद में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों की पहचान चोरी कर बैंक लोन हासिल किए. अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने इस हाईटेक ठगी का पर्दाफाश करते हुए अंतर राज्यीय गिरोह के तीन मास्टरमाइंड आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के अनुसार, आरोपी AI आधारित डीपफेक वीडियो बनाकर आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन सिस्टम को धोखा देते थे और बिना OTP के मोबाइल नंबर बदलकर बैंक खातों का संचालन कर रहे थे. साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई थी. शिकायतकर्ता को जानकारी मिली कि उसके नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खोले गए और पर्सनल लोन भी लिया गया, जबकि उसने ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं की थी. जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने पहले पीड़ित की व्यक्तिगत जानकारी जुटाई और फिर डिजिटल पहचान पर कब्जा कर लिया.
पुलिस ने बताया सुनियोजित हमला
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था. सबसे पहले आरोपी इंटरनेट और विभिन्न डेटा प्लेटफॉर्म से लोगों का नाम, GST नंबर और PAN कार्ड की जानकारी निकालते थे. इसके बाद CIBIL रिपोर्ट डाउनलोड कर संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर हासिल किया जाता था. फिर टेलीग्राम बॉट्स की मदद से यह पता लगाया जाता था कि वह मोबाइल नंबर किस आधार कार्ड से लिंक है. इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे WhatsApp, Facebook, Instagram, PhonePe और Truecaller से पीड़ित का फोटो डाउनलोड किया जाता था.
लाइव फेस ऑथेंटिकेशन को देते थे धोखा
आरोपी स्थिर फोटो को AI प्लेटफॉर्म की मदद से ‘आंख झपकाने वाले’ लाइव वीडियो में बदल देते थे. इस डीपफेक वीडियो को आधार वेरिफिकेशन सिस्टम के सामने चलाकर लाइव फेस ऑथेंटिकेशन को धोखा दिया जाता था. साथ ही असली व्यक्ति की मौजूदगी के बिना ही उसकी डिजिटल पहचान इस्तेमाल की जा रही थी. गिरोह CSC सेंटर के माध्यम से आधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदल देता था. मोबाइल नंबर बदलते ही आरोपियों को DigiLocker, बैंकिंग सेवाओं और KYC सिस्टम का पूरा एक्सेस मिल जाता था. इसके बाद अलग-अलग बैंकों में नए खाते खोलकर पर्सनल लोन लिया जाता था और रकम कई खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी.
ठगों ने कई बैंकिंग का उपयोग
- IDFC बैंक
- कोटक महिंद्रा बैंक
- सिटी यूनियन बैंक
- जियो पेमेंट्स बैंक
- डिजीलॉकर ऑनलाइन सेवाएं
ठगे हुए पैसों को बांटा जाता
लोन राशि को फर्जी खातों के जरिए आगे ट्रांसफर कर कमीशन के रूप में बांटा जाता था. साइबर क्राइम ब्रांच ने उत्तर प्रदेश और असम में ऑपरेशन चलाकर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया. कृष्णा रामप्रताप प्रजापति (यूपी) यह आरोपी पीड़ितों का डेटा जुटाकर गिरोह को उपलब्ध कराता था और बदले में कमीशन लेता था. रब्बुल हुसैन (असम) तकनीकी विशेषज्ञ की भूमिका में था. यह CIBIL डेटा, सोशल मीडिया फोटो और AI टूल्स का इस्तेमाल कर पहचान चोरी करता था. काजीमुद्दीन (असम) लोन की रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवाकर मनी रूट संभालता था.
अहमदाबाद में किया 4 आरोपियों को गिरफ्तार
अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने टेक्निकल एनालिसिस, डिजिटल ट्रैकिंग और ह्यूमन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर पहले 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. उनसे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश और असम में छापेमारी कर बाकी मास्टरमाइंड को पकड़ लिया. फिलहाल, आरोपियों से पूछताछ जारी है और देशभर में फैले नेटवर्क की जांच की जा रही है. यह मामला इसलिए बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें पहली बार बड़े स्तर पर AI डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर आधार बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा दिया गया. इस तरह की ठगी भविष्य में डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
साइबर क्राइम ब्रांच ने दी सतर्क रहने की सलाह
- आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर नियमित जांचें.
- अनजान लिंक या ऐप से बचें.
- समय-समय पर CIBIL रिपोर्ट चेक करें.
- सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखें.
- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें.
अहमदाबाद में सामने आया यह मामला साफ दिखाता है कि साइबर अपराधी अब AI और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर नई तरह की डिजिटल ठगी कर रहे हैं. ऐसे में तकनीकी जागरूकता और साइबर सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव है.
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