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RSS प्रमुख का बड़ा बयान: संवाद के बिना संघ को समझना असंभव, स्वदेशी निर्भरता पर दिया जोर

by Sanjay Kumar Srivastava
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RSS प्रमुख का बड़ा बयान:संवाद के बिना संघ को समझना नामुमकिन, स्वदेशी और वैश्विक निर्भरता पर भागवत का जोर

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में शनिवार को कहा कि संवाद के बिना RSS की विचारधारा को पूरी तरह समझना असंभव है.

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में शनिवार को संघ के 100वें वर्ष के कार्यक्रम में कहा कि भारत का विभाजन ‘हिंदू भाव’ की उपेक्षा के कारण हुआ था. उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाजन का मूल आधार धर्म था और इस ऐतिहासिक त्रासदी को हिंदू मूल्यों को भूलने का परिणाम बताया. भागवत ने जोर दिया कि संवाद के बिना RSS की विचारधारा को पूरी तरह समझना असंभव है. आर्थिक नीतियों पर उन्होंने ‘स्वदेशी’ और वैश्विक निर्भरता के बीच संतुलन की वकालत की, लेकिन चेतावनी दी कि यह निर्भरता किसी मजबूरी के कारण नहीं होनी चाहिए. हमने कहा है कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं. कुछ लोग कहते हैं कि यह गलत था. इस्लाम और ईसाई धर्म आज भी भारत में मौजूद हैं. लेकिन देश एकजुट रहा है.

सुरक्षा की गारंटी है हिंदुत्व

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हिंदू होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करना बंद कर देना चाहिए. आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हिंदुत्व को अपनाने से आपका कुछ भी नहीं खोता, न तो आपकी धार्मिक प्रथाएं और न ही आपकी भाषा. हिंदुत्व आपकी सुरक्षा की गारंटी है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का धर्म, खान-पान और भाषा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन हम सब एक समाज, संस्कृति और राष्ट्र के रूप में एक हैं. उन्होंने आगे कहा कि हम इसे हिंदुत्व कहते हैं, और आप इसे भारतीयता कह सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता एक गलत वाक्यांश है क्योंकि आप दो (अलग-अलग) लोगों को एकजुट कर रहे हैं, न कि उन्हें जो पहले से ही एक हैं.

परिवारों के भीतर संवाद आवश्यक

भागवत ने कहा कि आरएसएस को समझने के लिए संवाद आवश्यक है और संगठन की प्रकृति को धारणा और प्रचार के आधार पर नहीं समझा जा सकता. उन्होंने कहा कि यदि संघ का तथ्यात्मक आधार पर कोई विरोध है, तो हम सुधार करेंगे, लेकिन तथ्यों को जानने के लिए आपको हमारे पास आना होगा. उन्होंने कहा कि धार्मिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की शक्ति को सक्रिय करने की आवश्यकता है और हमें एक-दूसरे का पूरक बनना होगा. भागवत ने कहा कि परिवारों के भीतर संवाद आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युवा पीढ़ी नशे की लत में न पड़े या आत्महत्या के लिए प्रेरित न हो. उन्होंने आगे कहा कि आत्म-सम्मान (“स्व का गौरव”) और आत्म-बोध (“स्व का बोध”) का संचार करना आवश्यक है.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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