Delhi Missing News: पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर दिल्ली में लापता हो रहे लोगों की खबरें वायरल हो रही हैं. यहां जानें इस खबर की पूरी सच्चाई.
6 February, 2026
‘दिल्ली सुरक्षित नहीं’, ‘800 लोग लापता’ और ‘मिसिंग’, ये शब्द सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से घूम रहे हैं. लोग दिल्ली में लापता लोगों की खबरों को धडल्ले से शेयर कर रहे हैं, जिससे पूरी राजधानी में दहशत फैल गई है. सभी माता-पिता के मन में डर बैठ गया है. यहां तक कि देशभर के लोग दिल्ली में पढ़ने वाले और नौकरी करने वाले अपने बच्चों को लेकर चिंतित है, लेकिन सवाल यह उठता है कि अचानक यह खबर वायरल कैसे होने लगी. क्या लापता लोगों के आंकड़े सच है और क्या हमें डरने की जरूरत है. अब दिल्ली पुलिस ने स्वयं इस खबर की सच्चाई बताई जो आपको हैरान कर देगी.
क्या आंकड़े सही हैं?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 1 से 15 जनवरी के बीच कुल 807 लोग लापता हुए, जिसमें हर दिन औसतन 54 लोग लापता हुए. इनमें से 509 महिलाएं और लड़कियां थीं, और 298 पुरुष थे. कुल लापता लोगों में से 191 नाबालिग और 616 वयस्क थे. 31 जनवरी 2026 तक राजधानी में कुल 1,777 गुमशुदा लोगों के मामले दर्ज किए गए. यह आंकड़ा पिछले दो सालों के औसत से कम है. 2025 में, पूरे साल में 24,508 लोग लापता हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 24,893 थी. इतना ही नहीं साल 2016 से अब तक हर साल करीब 23 से 25 हजार लोग लापता हुए हैं. इसका मतलब है कि औसतन हर महीने 2,000 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए. इसलिए जनवरी 2026 में मामलों की संख्या में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं दिखती है और इसलिए आपको इस खबर से डरने की जरूरत नहीं है.
हम यह स्पष्ट करना चाहते है कि गुमशुदगी, विशेषकर बच्चों के लापता होनें को लेकर फैलायी जा रही अफवाहों से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
— Delhi Police (@DelhiPolice) February 5, 2026
विगत वर्षों की तुलना में गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस त्वरित जांच व कार्रवाई के साथ नागरिकों की सुरक्षा के लिए… pic.twitter.com/WjV1MCoTEM
डरने की जरूरत है?
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को लोगों की चिंताओं को कम करने की कोशिश करते हुए कहा कि “घबराने या डरने की कोई बात नहीं है” क्योंकि ये आंकड़े असल में पिछले सालों की इसी अवधि की तुलना में कमी दिखाते हैं. दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान में, पुलिस ने कहा कि हालांकि डेटा रिकॉर्ड किया गया था, जनवरी 2026 में “पिछले सालों की इसी अवधि की तुलना में लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट की संख्या में कमी देखी गई.” राहत की बात यह है कि 2025 में गायब होने वाले 24,508 लोगों में 15,421 लोगों को खोजा जा चुका है जो 63 प्रतिशत है. इसी के साथ 2016 से 2025 तक गायब हुए लोगों में से 77 प्रतिशत लोगों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है.
सोशल मीडिया हाइप की सच्चाई
पुलिस ने आगे स्पष्ट किया कि दिल्ली में अब तक लापता या अगवा बच्चों के मामलों में किसी संगठित गिरोह या आपराधिक नेटवर्क की संलिप्तता नहीं पाई गई है. लोगों से सतर्क रहने लेकिन शांत रहने की अपील करते हुए, पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से फैलाई जा रही अफवाहों या बिना पुष्टि वाली जानकारी पर ध्यान न देने का आग्रह किया. साथ ही दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि वे एक पारदर्शी और निष्पक्ष अपराध रिपोर्टिंग नीति का पालन करते हैं. लापता व्यक्ति की रिपोर्ट न केवल स्थानीय पुलिस स्टेशन में बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (112) के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती है. बयान में कहा गया है, “सभी लापता व्यक्तियों के मामलों में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) का सख्ती से पालन किया जाता है. लापता व्यक्ति का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास शुरू किए जाते हैं, जिसमें बच्चों से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है.”
Recent public discourse has raised concerns about the welfare of children in Delhi. We appeal to the citizens not to fall prey to the rumours about the spurt in the cases of missing children.
— Delhi Police (@DelhiPolice) February 5, 2026
While denying such claims, we also warn rumour mongers of strict legal action for…
हाइप बनाने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने X पर एक पोस्ट में कहा, “कुछ सुरागों का पीछा करने के बाद, उन्हें पता चला कि दिल्ली में लापता लड़कियों की संख्या में बढ़ोतरी के बारे में जो हाइप बनाया जा रहा था, वह पेड प्रमोशन के ज़रिए किया जा रहा था. पैसे के लिए डर फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हम ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे.” गुरुवार को, दिल्ली पुलिस ने लोगों की चिंताओं को कम करने की कोशिश करते हुए कहा कि “घबराने या डरने की कोई बात नहीं है” क्योंकि ये आंकड़े पिछले सालों की इसी अवधि की तुलना में असल में कमी दिखाते हैं.
News Source: PTI
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