Home Latest News & Updates ‘किसी को अवैध डिटेन नहीं किया’, 10 अक्टूबर को क्यों लगाई पाबंदियां? दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दिया जवाब

‘किसी को अवैध डिटेन नहीं किया’, 10 अक्टूबर को क्यों लगाई पाबंदियां? दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दिया जवाब

by Neha Singh 15 October 2026, 10:05 AM IST (Updated 15 October 2026, 10:07 AM IST)
15 October 2026, 10:05 AM IST (Updated 15 October 2026, 10:07 AM IST)
Delhi Police Affidavit

Delhi Police Affidavit: राजधानी में पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करने का कारण बताते हुए दिल्ली पुलिस ने एक हलफनामा दायर किया है. दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने हलफनामे में बताया कि पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा इंतजामों के संबंध में की गई अपनी कार्रवाई का विवरण दिया है. 10 अक्टूबर, 2026 को जंतर-मंतर और नई दिल्ली के अन्य इलाकों में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए, पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. पुलिस के अनुसार, दिल्ली में कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान हैं और VVIP मूवमेंट, राजनयिक दौरों तथा अन्य बड़े कार्यक्रमों के कारण सतर्कता बरतना जरूरी था.

कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी

दिल्ली पुलिस ने DMRC को एक प्रस्ताव भेजा था कि 9 अक्टूबर की रात 9:00 बजे से 10 अक्टूबर की शाम 6:00 बजे तक 45 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद रखे जाएं. इसके पीछे कारण यह बताया गया था कि भीड़ के संवेदनशील इलाकों की ओर बढ़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी. पुलिस ने मेट्रो ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी (आवाजाही की आवृत्ति) कम करने का भी अनुरोध किया था. 10 अक्टूबर को, दिल्ली पुलिस ने DMRC को पत्र लिखकर पाबंदियां हटाने और रात 10:00 बजे से मेट्रो सेवाओं को सामान्य रूप से बहाल करने के लिए कहा. हलफनामे में पुलिस ने बताया कि मेट्रो को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पहले ही लागू किए जा चुके थे. 10 और 11 अक्टूबर को सुबह 6:00 बजे से कई प्रमुख सड़कों और चौराहों पर किए गए ट्रैफिक डायवर्जन (यातायात मार्ग परिवर्तन) के बारे में जानकारी दी गई.

‘इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं थीं’

जनता को सलाह दी गई कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें, गैर-जरूरी यात्राओं से बचें और ट्रैफिक पुलिस के अपडेट्स पर नजर रखें. पुलिस ने बताया कि ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए 88 डायवर्जन फ्लेक्स साइनबोर्ड लगाए गए थे. पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं की गई थीं. उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तय नियमों के तहत केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगाई गई थी. इन पाबंदियों की समीक्षा स्थिति के आधार पर की जा रही थी.

‘अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया’

दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में कहा है कि अदालत के निर्देशों के तहत किसी को भी अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया. पुलिस ने यह भी बताया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने से नहीं रोका गया. पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई. पुलिस ने बताया कि BNSS की धारा 163 से संबंधित नोटिस तय इलाकों में लगाए गए थे. हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास लगाए गए नोटिस बोर्ड की भी जांच की गई और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटा दिया गया. पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. जरूरत पड़ने पर हालात के हिसाब से उचित कदम उठाए जाएंगे.

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News Source: ANI

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