Home Top News ‘बस से बाहर फेंका…’ सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच हुई बहस! मारपीट पर उठाए सवाल

‘बस से बाहर फेंका…’ सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच हुई बहस! मारपीट पर उठाए सवाल

by Sachin Kumar 11 October 2026, 1:10 PM IST
11 October 2026, 1:10 PM IST
Delhi Police and lawyers Supreme Court

Delhi Protest: CJP के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस पर वकीलों के साथ मारपीट करने और उन्हें घसीटकर बस में डालने के आरोप लगे हैं. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और वकीलों के बीच तीखी बहस भी हुई. वहीं, 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पुलिस की बदसलूकी का सामना करने वाले कुछ वकील भी अदालत में पेश हुए.

कोर्टरूम बदलने की मांग की

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम नंबर 18 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक काम नहीं कर रहा था. इस पर वकीलों ने अदालत से कोर्टरूम बदलने की मांग की. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल को वीडियो को कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होना था. यही वजह है कि लिंक का काम करना बहुत जरूरी है. वकीलों ने कोर्ट स्टाफ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक को तुरंत ठीक करने की मांग की.

शहर में कहीं भी जाने का अधिकारी छीन लिया गया

सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने कोर्ट में कहा कि प्रदर्शनकारियों को घसीटकर बस में चढ़ाया जा रहा था और फिर बस से बाहर फेंका जा रहा था. आरोप है कि शादान फरासत को भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था. वहीं, सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन ने कहा कि नागरिकों से शहर में कहीं भी आने-जाने का अधिकार छीन लिया गया है.

कोर्ट वकीलों की बात सुनने को तैयार

दूसरी ओर, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के खिलाफ याचिकाओं और आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करने के आरोप में अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट उन सभी वकीलों की बात सुनने को तैयार है जो विरोध प्रदर्शन के मामलों से जुड़ी अपनी याचिकाओं का जिक्र करना चाहते हैं. कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने दो मामले हैं. कुछ वकील अपनी दायर याचिकाओं का बिना लिस्ट में शामिल हुए जिक्र करना चाहते हैं. हम बार (वकीलों) में दाईं से बाईं ओर बढ़ते हुए हर पक्ष को अपनी बात रखने का मौका देंगे.

वकीलों ने दिया SC को धन्यवाद

वहीं, जब वकीलों ने इन मुद्दों पर विशेष सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया. जस्टिस बागची ने कहा कि हमें धन्यवाद देने की जरूरत नहीं है. हम हमेशा देश की सेवा में हाजिर है. सीनियर वकील कपिल सिब्बल हिरासत और धारा 163 लागू करने के आदेश के खिलाफ याचिका पर अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं.

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अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग की गई

इसके अलावा कोर्ट ने उस याचिका पर जवाब मांगने का फैसला किया जिसमें अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग की गई थी. यह याचिका अधिकारियों द्वारा कोर्ट के उन आदेशों को जानबूझकर न मानने के आरोप में दायर की गई थी, जिनमें ट्रेन, मेट्रो और इंटरनेट जैसी कई नागरिक सेवाओं को बंद करने का निर्देश दिया गया था.

चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं

इसके बाद सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि युवाओं ने इसलिए शांतिपूर्ण और कानूनी विरोध का रास्ता अपनाया क्योंकि उन्हें लगा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है. उन्होंने मौलिक अधिकारों पर लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या राज्य के अधिकारी हमसे यह कह रहे हैं कि यह बिना घोषित की गई इमरजेंसी है?

निहत्थे बच्चों और छात्रों के साथ मारपीट की गई

सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि निहत्थे बच्चों और छात्रों के साथ मारपीट, लात-घूंसे और धक्का-मुक्की जैसा बर्ताव ‘पूरी तरह से अनुचित’ था. उन्होंने कहा कि कई वीडियो में सुरक्षा बल ऐसे व्यवहार करते दिखे ‘मानो उन्होंने कोई सम्मान का बैज पहन रखा हो.’ इस पर कोर्ट ने कहा कि हम समझते हैं कि यह एक विशेष स्थिति है. हमें इसे एक असाधारण परिस्थिति के तौर पर देखना होगा.

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