Home Latest News & Updates संजय दत्त की एंट्री के बाद कांग्रेस में गूंजे गुटबाजी के सुर, जनरल बॉडी की बुलाई बैठक; जानें मामला

संजय दत्त की एंट्री के बाद कांग्रेस में गूंजे गुटबाजी के सुर, जनरल बॉडी की बुलाई बैठक; जानें मामला

by Ravi Kaliraman 9 July 2026, 8:11 PM IST (Updated 9 July 2026, 8:12 PM IST)
9 July 2026, 8:11 PM IST (Updated 9 July 2026, 8:12 PM IST)
Voices factionalism Congress following Sanjay Dutt entry

Haryana News : हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई. कांग्रेस हाईकमान की ओर से हरियाणा का नया प्रभारी बनाए गए संजय दत्त ने चंडीगढ़ पहुंचते ही संगठन को मजबूत करने की कवायद शुरू की और जनरल बॉडी की बैठक बुलाई. लेकिन पार्टी को एकजुट करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में नेताओं के भाषणों ने यह साफ कर दिया कि अंदरूनी मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.

गुटबाजी खत्म करने की कोशिश की

हरियाणा कांग्रेस में इससे पहले भी कमलनाथ, गुलाम नबी आजाद, विवेक बंसल, शक्ति सिंह गोहिल, दीपक बाबरिया और बी.के. हरिप्रसाद जैसे वरिष्ठ नेता प्रभारी रह चुके हैं. सभी ने संगठन को मजबूत करने और गुटबाजी खत्म करने की कोशिश की, लेकिन यह चुनौती लगातार बनी रही. अब यही जिम्मेदारी संजय दत्त के कंधों पर है. बैठक में कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता मौजूद रहे. मंच पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन नेताओं के संबोधनों में संगठन की स्थिति, गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग संकेत भी देखने को मिले.

भीतर ग्रुपबाजी का मुद्दा उठाया

सबसे पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने पार्टी के भीतर ग्रुपबाजी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि हर बार नया प्रभारी आता है, स्वागत होता है और साथ मिलकर काम करने की बातें कही जाती हैं, लेकिन अगर ये बातें केवल भाषणों तक सीमित रहेंगी तो संगठन कभी मजबूत नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अब समय केवल कथनी का नहीं बल्कि करनी का है.

कार्यकर्ता को समान अवसर मिले

सैलजा के संबोधन के बाद नए प्रभारी संजय दत्त ने मंच से कहा कि उन्हें एक मौका दिया जाए. इस पर कुमारी सैलजा ने भी तुरंत जवाब देते हुए कहा कि मौका उन्होंने नहीं बल्कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिया है. अब जिम्मेदारी उनकी है कि पार्टी के हर नेता और हर कार्यकर्ता को समान अवसर मिले. उन्होंने कहा कि नए प्रभारी से सम्मान के साथ-साथ बड़ी उम्मीदें भी जुड़ी हुई हैं.

बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह ने भी संगठन को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस में लोगों की कमी नहीं है, लेकिन पार्टी को ऐसे कार्यकर्ताओं की जरूरत है जो कांग्रेस की विचारधारा, सिद्धांतों और फिलॉसफी के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करें. उन्होंने संकेत दिया कि केवल पदों या व्यक्तियों के आधार पर नहीं बल्कि विचारधारा के आधार पर संगठन को मजबूत करना होगा.

बहुमत के आंकड़े तक पहुंची

इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा के चुनावी इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 56 वर्षों में कांग्रेस केवल तीन बार अपने दम पर बहुमत हासिल कर पाई है. उन्होंने कहा कि केवल वोट प्रतिशत बढ़ने की चर्चा पर्याप्त नहीं है, असली सवाल यह है कि पार्टी विधानसभा में बहुमत के आंकड़े तक पहुंची या नहीं. इसे कई राजनीतिक जानकार दीपेंद्र सिंह हुड्डा की उस टिप्पणी के जवाब के रूप में देख रहे हैं, जिसमें वोट प्रतिशत बढ़ने की बात कही गई थी.

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बैठक का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच हल्की-फुल्की जुबानी नोकझोंक देखने को मिली. हुड्डा ने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर रणदीप सुरजेवाला उनका साथ दे दें तो फिर बड़ा राजनीतिक धमाका हो सकता है. इस पर सुरजेवाला ने भी तुरंत जवाब दिया कि वह पिछले 20 वर्षों से उनका साथ दे रहे हैं, अब समय आ गया है कि हुड्डा भी उनका साथ दें. दोनों नेताओं की इस बातचीत ने बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं और नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

बातचीत मजाकिया अंदाज में हुई

हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पूरे घटनाक्रम को सामान्य बताते हुए कहा कि मंच पर हुई बातचीत केवल मजाकिया अंदाज में हुई थी. उन्होंने कहा कि रणदीप सुरजेवाला उनके बेहद करीबी हैं और दोनों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है. उन्होंने नए प्रभारी संजय दत्त का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि वह अगले कुछ दिनों तक नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद कर संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे.

कांग्रेस पूरी तरह एकजुट

जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछा गया कि कमलनाथ, गुलाम नबी आजाद, बीके हरिप्रसाद और अन्य कई प्रभारी आने के बावजूद हरियाणा कांग्रेस पूरी तरह एकजुट क्यों नहीं हो सकी, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है. अगर कहीं बिखराव है तो वह भारतीय जनता पार्टी में है. राजनीतिक दृष्टि से देखें तो संजय दत्त की पहली ही बैठक ने यह संकेत दे दिया है कि हरियाणा कांग्रेस के सामने विधानसभा चुनावों से पहले सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता की है. मंच पर नेताओं के बीच दिखी नोकझोंक, गुटबाजी पर खुले बयान और विचारधारा को लेकर उठे सवाल बताते हैं कि पार्टी के भीतर कई स्तरों पर मतभेद अभी भी मौजूद हैं.

अब सबकी नजर नए प्रभारी संजय दत्त पर होगी. उनके सामने सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि क्या वह विभिन्न गुटों के नेताओं को एक मंच पर लाकर संगठन को मजबूत कर पाएंगे या हरियाणा कांग्रेस की पुरानी गुटबाजी आगे भी पार्टी के लिए चुनौती बनी रहेगी.

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