Red Fort blast: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2024 को हुए विस्फोट की जांच में एक ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है.
Red Fort blast: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2024 को हुए विस्फोट की जांच में एक ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है. रिपोर्टों में बताया गया है कि मुज़म्मिल गनाई और अदील राथर जैसे उच्च शिक्षित डॉक्टरों ने पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क के लिए फर्जी सिम कार्ड का उपयोग किया था. ये आतंकी सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए फर्जी सिम कार्ड का उपयोग कर रहे थे. इसी जांच के आधार पर दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर 2024 को निर्देश जारी किया कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसी सेवाओं को सक्रिय सिम कार्ड से लिंक करना अनिवार्य है. अधिकारी अब इस नेटवर्क के तकनीकी पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं. मालूम हो कि व्हाइट कॉलर टेररिज्म वह आतंकवाद है जिसमें उच्च शिक्षित, पेशेवर और तकनीकी रूप से दक्ष लोग जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर या सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं. ये लोग अपनी तकनीकी और बौद्धिक क्षमता का दुरुपयोग करते हुए आतंक की योजना बनाते हैं, प्रचार करते हैं और अक्सर समाज में सामान्य नागरिकों की तरह घुल-मिल जाते हैं.
फर्जी सिम के जरिए रहते थे पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में
जांच अधिकारियों ने बताया कि लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी गाड़ी चलाते समय मारा गया आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी दो से तीन मोबाइल हैंडसेट रखता था. इसी तरह अन्य आरोपी भी दो से तीन मोबाइल हैंडसेट रखते थे. आरोपियों के पास संदेह से बचने के लिए व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग हेतु अपने नाम से पंजीकृत एक ‘साफ’ फोन था और दूसरा ‘आतंकवादी फोन’ था, जिसका इस्तेमाल वे विशेष रूप से पाकिस्तान में अपने संचालकों उकासा, फैजान और हाशमी के साथ व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से संचार के लिए करते थे. अधिकारियों ने बताया कि इन द्वितीयक उपकरणों के सिम कार्ड भोले-भाले नागरिकों के नाम पर जारी किए गए थे, जिनके आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया था. जम्मू और कश्मीर पुलिस ने जांच में एक अलग रैकेट का भी पर्दाफाश किया, जिसमें फर्जी आधार कार्डों का उपयोग करके सिम जारी किए जा रहे थे.
J&K में दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम लागू
अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने देखा कि ये नकली सिम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) या पाकिस्तान में सीमा पार संदेश प्लेटफार्मों पर सक्रिय रहते थे. संचालक मॉड्यूल को यूट्यूब के माध्यम से आईईडी असेंबली सीखने और भीतरी इलाकों में हमले की योजना बनाने के लिए निर्देशित करते थे, जबकि रंगरूट शुरू में सीरिया या अफगानिस्तान के संघर्ष क्षेत्रों में शामिल होना चाहते थे. इन सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए केंद्र ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियमों को लागू किया है ताकि दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता की रक्षा की जा सके. इसमें एक नियम यह भी शामिल है कि सभी दूरसंचार पहचानकर्ता उपयोगकर्ता संस्थाओं (टीआईयूई) को 90 दिनों के भीतर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ऐप तभी काम करें जब डिवाइस में एक सक्रिय सिम लगा हो. अधिकारियों ने बताया कि आदेश में दूरसंचार ऑपरेटरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि सक्रिय सिम न होने की स्थिति में व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ऐप से उपयोगकर्ताओं को स्वचालित रूप से लॉग आउट कर दिया जाए. जम्मू और कश्मीर दूरसंचार सर्कल में इस निर्देश को तेजी से लागू किया जा रहा है.
NIA कर रही लाल किला विस्फोट की जांच
अधिकारियों ने बताया कि इन मानदंडों का पालन न करने पर दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियमों और अन्य लागू कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी. 18-19 अक्टूबर, 2025 की दरमियानी रात को इस आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होना शुरू हुआ, जब श्रीनगर शहर के ठीक बाहर की दीवारों पर प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के पोस्टर दिखाई दिए. इन पोस्टरों में घाटी में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले की चेतावनी दी गई थी. इसे एक गंभीर मामला मानते हुए श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जीवी संदीप चक्रवर्ती ने मामले की गहन जांच के लिए कई टीमें गठित कीं. गिरफ्तार आरोपियों के बयानों पर जांच श्रीनगर पुलिस को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय तक ले गई, जहां दो डॉक्टरों – दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के कोइल निवासी गनाई और लखनऊ के शाहीन सईद को गिरफ्तार किया गया. साथ ही 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर सहित भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किया गया.मालूम हो कि लाल किले के पास हुए कार विस्फोट मामले में 15 लोगों की जान चली गई थी. इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है.
