Home राज्यJammu Kashmir आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: जम्मू-कश्मीर में महिलाओं ने थामी राइफलें, आतंकियों को देंगी जवाब, ले रहीं ट्रेनिंग

आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: जम्मू-कश्मीर में महिलाओं ने थामी राइफलें, आतंकियों को देंगी जवाब, ले रहीं ट्रेनिंग

by Sanjay Kumar Srivastava 30 December 2025, 8:41 PM IST (Updated 30 December 2025, 8:42 PM IST)
30 December 2025, 8:41 PM IST (Updated 30 December 2025, 8:42 PM IST)
military training

Jammu News: जम्मू-कश्मीर में अब महिलाएं भी आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा संभालेंगी. आतंकियों से मुकाबला करने के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है.

Jammu News: जम्मू-कश्मीर में अब महिलाएं भी आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा संभालेंगी. आतंकियों से मुकाबला करने के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. 17 गांवों के स्वयंसेवकों को सेना हथियारों का प्रशिक्षण दे रही है.जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान के साथ-साथ जमीनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए ग्राम रक्षा रक्षकों (VDG) का प्रशिक्षण तेज कर दिया है. डोडा-चंबा सीमा के 17 दूरदराज गांवों के लगभग 150 स्वयंसेवकों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, को सेना द्वारा गहन सैन्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वीडीजी को स्वचालित राइफलें चलाने, आत्मरक्षा, बंकर निर्माण और छोटी सैन्य युद्धनीति का अभ्यास कराया जा रहा है ताकि वे दुश्मन के हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकें. चेनाब घाटी में बढ़ते आतंकवाद के खतरे को देखते हुए स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने की यह एक महत्वपूर्ण पहल है.ये गांव वन और पहाड़ी क्षेत्रों के पास स्थित हैं, जहां सुरक्षा बल संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों के मद्देनज़र व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं.

स्वयंसेवकों को सेना दे रही ट्रेनिंग

एक अधिकारी ने बताया कि डोडा जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर भलेसा की शिंगिनी पंचायत में स्वयंसेवकों को उनके गांवों की रक्षा करने और विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह कदम सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा ऊपरी इलाकों में चल रहे उस अभियान का पूरक है, जिसका उद्देश्य उन आतंकवादियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है जो कुछ साल पहले चेनाब घाटी, विशेष रूप से डोडा और किश्तवार जिलों में घुसपैठ करने में कामयाब रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि ग्राम रक्षा अधिकारियों ने प्रशिक्षण और अपने हथियारों के हालिया उन्नयन का स्वागत किया. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पुराने .303 राइफलों के स्थान पर सेल्फ-लोडिंग राइफल (एसएलआर) उपलब्ध कराने के लिए आभार व्यक्त किया, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है. यह एक बड़ा कार्यक्रम है जिसमें 17 ग्राम रक्षा समूहों के सदस्य एक साथ आए हैं. कहा कि हमें हथियार चलाने, बंकर बनाने और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. हमारे घर के पास ही ऐसा प्रशिक्षण मिलना बहुत सराहनीय है.

स्वचालित हथियार मिलने से बढ़ा आत्मविश्वास

शिंगानी के ग्राम रक्षा समूह के सदस्य सुरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने सरकार से सदस्यों को और अधिक स्वचालित हथियार उपलब्ध कराने का अनुरोध किया और 1990 के दशक के आरंभ में क्षेत्र में हुए लगातार आतंकी हमलों का जिक्र किया. गौआला गांव के एक अन्य ग्राम रक्षा समूह के सदस्य राजेश कुमार ठाकुर ने कहा कि सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा दिए गए प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ा है. पहले हमारे पास केवल .303 राइफलें थीं. स्वचालित हथियार मिलने के बाद हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है और अब हम अपने गांवों की रक्षा करने में सक्षम महसूस करते हैं. ठाकुर ने यह भी मांग की कि ग्राम रक्षा समूह के अवैतनिक सदस्यों को मानदेय दिया जाए. कहा कि गांवों में बंकरों के निर्माण से निवासियों का भय कम हुआ है. सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि उच्च क्षेत्रों में निरंतर अभियानों के साथ-साथ वीडीजी को मजबूत करना एक बहुस्तरीय सुरक्षा रणनीति है जिसका उद्देश्य आतंकवादियों को किसी भी प्रकार का समर्थन देने से रोकना और क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करना है.

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