Madhya Pradesh Mission-2028: मध्य प्रदेश में मिशन-2028 की तैयारी में जुटी कांग्रेस फिलहाल अपने ही घर में असंतोष की आग से झुलस रही है.
Madhya Pradesh Mission-2028: मध्य प्रदेश में मिशन-2028 की तैयारी में जुटी कांग्रेस फिलहाल अपने ही घर में असंतोष की आग से झुलस रही है. प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दो दिन पहले हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा अब एक बड़े सियासी दंगल में तब्दील हो चुका है. पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के सामने कार्यकर्ताओं के फूटे गुस्से को लेकर जहां भाजपा ने कांग्रेस के विनाश की भविष्यवाणी कर दी है, वहीं कांग्रेस इसे अपने आंतरिक लोकतंत्र की ताकत बताकर बचाव कर रही है.
यूथ कांग्रेस की बैठक में हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत राजधानी भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में यूथ कांग्रेस की बैठक के दौरान हुई. हुजूर विधानसभाक्षेत्र अध्यक्ष सोहन मेवाड़ा ने मंच पर मौजूद जीतू पटवारी के सामने अपनी भड़ास निकालते हुए गंभीर आरोप लगाए. मेवाड़ा ने दो-टूक कहा कि अध्यक्ष जी सिर्फ अपने चहेतों से मिलते हैं और आम कार्यकर्ता घंटों बंगले के बाहर खड़ा रह जाता है. कार्यकर्ताओं का यह आरोप जीतू पटवारी के नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है.
भाजपा का तीखा हमला, तालाबंदी की ओर कांग्रेस
इस घटनाक्रम को हथियार बनाकर भाजपा ने कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दिया है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने चुटकी लेते हुए कहा कि जीतू पटवारी ने कांग्रेस को रसातल में पहुंचा दिया है. अब तो उनके अपने ही कार्यकर्ता उन्हें आईना दिखाने लगे हैं. यादव ने तंज कसते हुए कहा कि पटवारी कुछ खास पूंजीजीवियों के अलावा किसी से नहीं मिलते और उनके नेतृत्व में कांग्रेस अब पूरी तरह समाप्ति और तालाबंदी की ओर बढ़ रही है.
कांग्रेस का पलटवार, यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती
भाजपा के हमलों पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने जोरदार बचाव किया है. उन्होंने इसे अनुशासनहीनता मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कार्यकर्ताओं की मुखरता है. बरोलिया ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि एक छोटा कार्यकर्ता भी अपने बड़े नेता के सामने खुलकर बात रख सकता है. भाजपा को अपना हाल देखना चाहिए जहां पर्ची से नेता तय होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं की बात सुनकर उन पर संज्ञान ले रहे हैं जो एक स्वस्थ परंपरा है.
मिशन-2028 की डगर कितनी कठिन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के अंदर यह कलह पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है. एक तरफ जहां भाजपा इसे कांग्रेस के पतन का सबूत बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसे अपनी मजबूती का हिस्सा बता रही है. हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जीतू पटवारी इस जमीनी असंतोष को शांत कर अपनी फौज को फिर से एकजुट कर पाएंगे.
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