Home Latest News & Updates ‘अब जहर दे दो..’, अस्पताल की लापरवाही से किडनी फेल, 68 दिनों से जिंदगी की भीख मांग रहीं 5 माएं

‘अब जहर दे दो..’, अस्पताल की लापरवाही से किडनी फेल, 68 दिनों से जिंदगी की भीख मांग रहीं 5 माएं

by Neha Singh 15 July 2026, 12:18 PM IST (Updated 15 July 2026, 12:23 PM IST)
15 July 2026, 12:18 PM IST (Updated 15 July 2026, 12:23 PM IST)
Kota Kidney Failure

Kota Kidney Failure: बस दो दिन अस्पताल में रहना है और आखिर में अपने बच्चे को साथ लेकर घर आना है- दो महीने पहले यही सोचकर 5 गर्भवती महिलाएं अस्पताल गई थीं, लेकिन उस दिन के बाद से उनकी जिंदगी नर्क बन गई. कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) में पांच महिलाएं पिछले 68 दिनों से डायलिसिस के असहनीय दर्द से जूझ रही हैं, क्योंकि अस्पताल की लापरवाही के कारण सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद उनकी किडनी फेल हो गई.

5 अन्य महिलाओं की मौत

पिछले 68 दिनों में इन महिलाओं का 32 बार डायलिसिस हुआ है. NMCH और JK लोन हॉस्पिटल में पांच और महिलाओं की भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद हुई दिक्कतों की वजह से मौत हो गई है. वहीं दर्द से तड़पती महिलाओं के परिवारों ने सोमवार को जिला अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पक्की टाइमलाइन की मांग की गई और उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया.

मोहन लाल, जिनकी पत्नी धन्नी सुमन मई के पहले हफ्ते से हॉस्पिटल में हैं, ने कहा, “अब वह डायलिसिस शब्द से डरती हैं. प्रोसेस शुरू होने के एक घंटे के अंदर, उन्हें उल्टी होने लगती है, वे जोर से कांपने लगती हैं और उन्हें तेज बुखार हो जाता है. वह कुछ भी खा नहीं पातीं.” मोहन लाल ने कहा “हम उन्हें अब और इस तरह तकलीफ में नहीं देख सकते. अगर वे हमें 48 घंटे के अंदर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लिखकर भरोसा नहीं देते हैं, तो हम उन्हें डायलिसिस के लिए लाना बंद कर देंगे और उन्हें मरने देंगे. हम चलती-फिरती लाशों की तरह जी रहे हैं.”

उधारी पर चल रहा परिवार

29 साल की रागिनी मीना अब जिंदा रहने के लिए पूरी तरह डायलिसिस पर निर्भर है. उनके भाई विकास ने कहा, “मेरी बहन बच्चे को जन्म देने के लिए यहां आई थी, उसे उम्मीद थी कि वह सिर्फ दो दिन रहेगी. आज वह डायलिसिस के बिना 24 घंटे भी जिंदा नहीं रह सकती. हर 48 घंटे में उसे इस दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.” विकास ने कहा कि रागिनी के पति, लोकेश एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे, उनकी नौकरी चली गई और परिवार पूरी तरह उधार के पैसों पर गुजारा कर रहा है.

हर दिन धीरे-धीरे मर रहीं महिलाएं

कैब ड्राइवर मोहन लाल को भी अपनी पत्नी को हॉस्पिटल ले जाने के लिए अपनी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया अपनी टैक्सी बेचना पड़ा. 8 मई को पैदा हुआ उनका बच्चा एक रिश्तेदार की देखरेख में है. उनके 5 और 10 साल के दो और बच्चे हैं, जो घर पर अपनी दादी के साथ हैं.

पिंकी ऐरवाल के पति, नरेश ने कहा कि सरकार ने महिलाओं और उनके परिवारों की बुरी हालत पर अपनी आंखें मूंद ली हैं. 8 मई को जेके लोन हॉस्पिटल में पैदा हुए उनके बच्चे की डिलीवरी के कुछ देर बाद ही मौत हो गई. नरेश ने लोकसभा स्पीकर और लोकल MP ओम बिरला द्वारा इंफेक्शन से मरने वाली महिलाओं को दी गई पैसे की मदद का जिक्र करते हुए कहा, “उन्होंने मरने वालों के परिवारों को 5 लाख रुपये दिए, जैसे एक इंसान की जान की कीमत सिर्फ इतनी ही हो. उन लोगों का क्या जो बीच में फंस गए हैं, जो हर दिन धीरे-धीरे मर रहे हैं?”

जवाबदेही की मांग

आरती चोपदार और सुशीला महावर के परिवारों ने सरकारी मशीनरी से जवाबदेही मांग की है. जिला प्रशासन और NMCH अधिकारियों ने कॉल और मैसेज का जवाब नहीं दिया. राजस्थान सरकार ने कोटा के अस्पतालों में डिलीवरी के बाद होने वाली दिक्कतों की जांच के आदेश दिए हैं. सप्लाई में कुछ दवाओं को घटिया पाया गया और उन्हें बैन कर दिया गया है.

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News Source: PTI

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