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मणिपुर में भड़की हिंसा! भीड़ ने असम राइफल्स के कैंप पर किया हमला, गाड़ियों में लगाई आग

by Neha Singh 15 July 2026, 11:35 AM IST (Updated 16 July 2026, 12:26 PM IST)
15 July 2026, 11:35 AM IST (Updated 16 July 2026, 12:26 PM IST)
Manipur Violence

Manipur Violence: मणिपुर के सेनापति जिले में मंगलवार देर रात असम राइफल्स और स्थानीय नागा लोगों के बीच तनाव पैदा हो गया, जब भीड़ ने पैरामिलिट्री फोर्स के कैंप पर हमला कर दिया. अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि इलाके में सर्च ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद भीड़ ने असम राइफल्स के कैंप पर हमला किया, पत्थर फेंके और सुरक्षाकर्मियों की तीन गाड़ियों में आग लगा दी. एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने आधी रात तक आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को तितर-बितर किया, जिसके बाद स्थिति पर काबू पाया गया.

क्यों पैदा हुआ तनाव

एक डिफेंस स्टेटमेंट में कहा गया कि असम राइफल्स को इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया पोस्ट से पता चला कि NSCN (IM) के उग्रवादी अपने तय कैंप के बाहर घूम रहे हैं. वे हथियारों से लैस थे और मिलिट्री यूनिफॉर्म पहने हुए थे, जो सरकार और NSCN (IM) के बीच हुए सीजफायर एग्रीमेंट का सीधा उल्लंघन था. असम राइफल्स ने तुरंत सीजफायर मॉनिटरिंग ग्रुप को इस उल्लंघन की जानकारी दी और माकुइलोंगडी इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. जब असम राइफल्स के जवान माकुइलोंगडी और ओक्लोंग गांवों के पास पहुंचे, तो वहां के लोगों ने सेना का रास्ता रोक दिया. अधिकारी ने कहा कि जैसे ही तनाव बढ़ा, रात करीब 9 बजे खबरें आईं कि सेनापति शहर में एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और नागा तफो इलाके में असम राइफल्स कैंप की ओर मार्च करने की तैयारी कर रही है.

गाड़ियों में लगाई आग

बयान में कहा गया, असम राइफल्स के जवानों के हटने के बावजूद, रात करीब 9.30 बजे एक बड़ी भीड़ कैंप पहुंची, पत्थर फेंके, प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया और आगजनी की कोशिश की. एक गाड़ी में आग लगा दी गई, जबकि दो ट्रक पलट दिए और उन्हें नुकसान पहुंचाया. हिंसा के दौरान एक प्राइवेट कार भी जला दी गई. इसमें कहा गया है कि भीड़ ने कैंप के सामने एक वेटिंग शेड को भी आग लगा दी. उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मियों को स्थिति को कंट्रोल करने में मदद करने के लिए सेनापति जिला पुलिस और CRPF को तुरंत तैनात किया गया. बयान में कहा गया है कि मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर फोर्स तैनात की गई और हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और खाली राउंड फायर किए गए.

दो जवानों की मौत

इसमें कहा गया है कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और चिंताओं को दूर करने और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सिविल सोसाइटी संगठनों और जिला अधिकारियों के साथ मिलकर कोशिशें की गई हैं. बता दें, 6 जुलाई को उखरुल जिला हेडक्वार्टर से लगभग 17 km दूर नुंगशांग खोंग के पास शांगशाक में संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा एक काफिले पर घात लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवान मारे गए थे और इस सिलसिले में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया था. तीन साल पहले जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से सुरक्षा बल मणिपुर के बाहरी और कमजोर इलाकों में सर्च ऑपरेशन कर रहे हैं. मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जातीय संघर्ष में अब तक 260 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं.

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News Source: PTI

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