Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों से 1,000 रुपये परामर्श शुल्क (Consultancy Fee) वसूलने के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ.
Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों से 1,000 रुपये परामर्श शुल्क (Consultancy Fee) वसूलने के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ. कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस आधार के करीब 22.5 लाख छात्रों से 223 करोड़ वसूले गए हैं. विपक्ष ने सरकार पर सदन में विरोधाभासी जवाब देने का आरोप लगाया और इस मामले को छात्रों का आर्थिक शोषण करार दिया. हंगामे के बीच विपक्षी सदस्यों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग की. सरकार के जवाब से असंतुष्ट विधायकों के तीखे तेवरों के कारण सदन की कार्यवाही काफी समय तक प्रभावित रही. राज्य सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्षी कांग्रेस के विधायक अपनी सीटों से उठ खड़े हुए. यादव लगभग सदन के वेल के पास तक आ गए थे.
राशि का उपयोग परीक्षा कार्यों पर
प्रश्न का उत्तर देते हुए उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने बताया कि राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय ने 2018-19 से 2024-25 के बीच 22.16 करोड़ रुपये, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने 2020-21 से 2024-25 के बीच 43.16 करोड़ रुपये और राजस्थान विश्वविद्यालय ने 2017-18 से 2024-25 के बीच परामर्श शुल्क मद के तहत 156.18 करोड़ रुपये एकत्र किए. बैरवा ने कहा कि कुल मिलाकर लगभग 22.5 लाख छात्रों से लगभग 223 करोड़ रुपये एकत्र किए गए. इस राशि का उपयोग परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए किया गया. यादव ने इस उत्तर पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि जब पहले से ही एक अलग परीक्षा शुल्क लिया जा रहा है तो इस राशि का उपयोग परीक्षा कार्यों के लिए कैसे किया जा सकता है.
कांग्रेस विधायक ने बताया छात्रों का आर्थिक शोषण
उन्होंने यह भी पूछा कि कितने परामर्श या चर्चा केंद्र स्थापित किए गए और कितने छात्रों को इसका लाभ मिला. उनसे प्राप्त राशि और एकत्रित राशि को किन मदों के अंतर्गत खर्च किया गया, इस बारे में भी उन्होंने पूछा. साथ ही उन्होंने आय और व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने की भी मांग की. विपक्ष के नेता टीका राम जुली ने कहा कि मंत्री को विभागीय आदेश पढ़ने के बजाय विश्वविद्यालय अधिनियम की संबंधित धारा का हवाला देना चाहिए. जुली और यादव ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अधिनियम में निजी छात्रों से इस प्रकार का शुल्क वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है और इसे तत्काल बंद करने की मांग की. उन्होंने छात्रों से पहले से वसूल की गई राशि की वापसी की भी मांग की. यादव ने इस वसूली को 22.5 लाख छात्रों पर प्रत्यक्ष बोझ बताया और आरोप लगाया कि न तो सरकार और न ही विश्वविद्यालयों ने इस बात का कोई सबूत पेश किया है कि 223 करोड़ रुपये वास्तव में काउंसलिंग सेवाओं पर खर्च किए गए थे.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
