Climate Change: पूरी दुनिया में कॉफी की कीमत क्यों बढ़ रही है. इसका खुलासा क्लाइमेट सेंट्रल की एक नई रिपोर्ट में हुआ है. नई रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.
Climate Change: पूरी दुनिया में काफी की कीमत क्यों बढ़ रही है. इसका खुलासा क्लाइमेट सेंट्रल की एक नई रिपोर्ट में हुआ है. नई रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. उच्च तापमान के कारण फसल कम हो रही है और इस लोकप्रिय पेय की कीमत बढ़ रही है. कॉफी दुनिया के सबसे लोकप्रिय पेय पदार्थों में से एक है, जिसका अनुमानित 2.2 अरब कप प्रतिदिन सेवन किया जाता है. अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में ही कम से कम दो-तिहाई लोग प्रतिदिन कॉफी पीते हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में शोध और जानकारी देने वाले वैज्ञानिकों के समूह क्लाइमेट सेंट्रल द्वारा किए गए एक विश्लेषण के अनुसार, विश्व में कॉफी की आपूर्ति पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
अधिक तापमान कॉफी के लिए खतरनाक
क्लाइमेट सेंट्रल ने 2021 से 2025 तक के तापमान का विश्लेषण किया और जलवायु परिवर्तन सूचकांक का उपयोग करके कार्बन प्रदूषण रहित एक काल्पनिक दुनिया से इसकी तुलना की. विश्लेषण में प्रति वर्ष उन अतिरिक्त दिनों की गणना की गई, जब जलवायु परिवर्तन के कारण प्रमुख कॉफी उत्पादक देशों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है. यह तापमान कॉफी को नुकसान पहुंचाने वाली सीमा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब जब तापमान इस सीमा से ऊपर बढ़ रहा है, तो कॉफी के पौधे गर्मी का अनुभव कर रहे हैं जिससे उपज कम हो जा रही है, बीन्स की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है और पौधों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है. ये सभी प्रभाव मिलकर कॉफी की आपूर्ति और गुणवत्ता को कम कर रहे हैं. जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी कीमत में वृद्धि हो रही है.
छोटे किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान
रिपोर्ट में कहा गया है कि कम फसल और बढ़ती कीमत से छोटे किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि छोटे किसान वैश्विक उत्पादकों का लगभग 80 प्रतिशत और वैश्विक आपूर्ति का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें 2021 में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने के लिए आवश्यक वित्तपोषण का केवल 0.36 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ. एक हेक्टेयर खेत के लिए अनुकूलन (Customization) की औसत लागत 2.19 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन है – जो कई देशों में एक कप कॉफी की कीमत से भी कम है. शीर्ष पांच कॉफी उत्पादक देश – ब्राजील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया और इंडोनेशिया वैश्विक कॉफी आपूर्ति में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान देते हैं.
ब्राजील में सूखे से बढ़ी कीमत
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन पांच देशों में अब औसतन वर्ष में 144 दिनों से अधिक समय तक कॉफी को नुकसान पहुंचाने वाली गर्मी पड़ती है. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बिना, हर साल इतनी भीषण गर्मी वाले दिनों की संख्या लगभग 57 दिन कम होती. वर्षा के पैटर्न में बदलाव से कॉफी के पौधों पर और भी दबाव पड़ता है. पर्याप्त और नियमित वर्षा उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण है. 59 से 79 इंच के बीच वार्षिक वर्षा इष्टतम होती है और सूखा फसल को कम कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्राजील में 2023 के सूखे को हाल ही में कॉफी की कीमत में हुई वृद्धि से जोड़ा गया है. कॉफी लीफ रस्ट और कॉफी बेरी बोरर जैसे कीट और रोग भी कॉफी बीन्स की मात्रा और गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं. तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव इनके प्रसार और प्रबंधन को प्रभावित करता है.
कम हो रही खेती की जमीन
रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन से भीषण गर्मी बढ़ रही है, वर्षा के पैटर्न बदल रहे हैं और खेती योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हो रहा है, किसानों को अनुकूलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. अधिकांश कॉफी उत्पादक छोटे किसान हैं (लगभग 12 एकड़ से कम भूमि पर खेती करने वाले) जो अपनी आजीविका के लिए इस एक फसल पर निर्भर रहते हैं, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के कृषि प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाते हैं. बदलती परिस्थितियां कॉफी उत्पादन के लिए उपलब्ध भूमि को खतरे में डाल रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्याप्त अनुकूलन के अभाव में 2050 तक कॉफी की खेती के लिए उपयुक्त भूमि 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है. जलवायु परिवर्तन के कारण कॉफी की खेती का भविष्य का क्षेत्र बदल सकता है. वर्तमान कॉफी उत्पादक क्षेत्र समय के साथ बहुत गर्म हो सकते हैं, विशेषकर गर्मी के प्रति संवेदनशील अरेबिका कॉफी के लिए.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
