Vindhyachal Temples: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्थित विंध्याचल धाम का धार्मिक महत्व अद्वितीय है, जहां ‘विंध्य त्रिकोण परिक्रमा’ के रूप में मां विंध्यवासिनी, मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिर स्थापित हैं. यह पवित्र धाम देश के सबसे जागृत और शक्तिशाली शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. उत्तर प्रदेश सरकार के ‘शक्तिपीठ सर्किट’ और विंध्य कॉरिडोर के विकास से इस पावन भूमि की महिमा और सुगमता वैश्विक पटल पर और अधिक सुदृढ़ हुई है. विंध्याचल में तीन प्रमुख मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या दो साल में लगभग 60 प्रतिशत बढ़कर 2025 में 1.84 करोड़ हो गई है. इस क्षेत्र में अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे के विकास और व्यवस्थित तीर्थयात्रा पैकेजों को बढ़ावा दिया जा रहा है.
मुख्य आकर्षण बना मां विंध्यवासिनी मंदिर
मिर्जापुर जिले में स्थित ‘विंध्य त्रिकोण परिक्रमा’ जिसमें मां विंध्यवासिनी, मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिर शामिल हैं – में 2023 के दौरान लगभग 1.15 करोड़ श्रद्धालु आए थे. इस तीर्थयात्रा को उत्तर प्रदेश के विस्तारशील ‘शक्तिपीठ सर्किट’ के हिस्से के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है. मां विंध्यवासिनी मंदिर सबसे बड़ा आकर्षण बना रहा. यहां 2025 में लगभग 1.20 करोड़ श्रद्धालु आए, जबकि 2023 में यह संख्या 73 लाख और 2024 में 78.15 लाख थी. शारदीय नवरात्रि के मुख्य समय से पहले, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच इस मंदिर में लगभग 90 लाख श्रद्धालु आए. मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या भी 2023 के लगभग 42.36 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 64 लाख हो गई, जो 51 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है.
208.09 करोड़ की लागत से हो रहा धाम का विकास
पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ये आंकड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विंध्याचल में किए गए विकास कार्यों के प्रभाव को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा कि विंध्याचल राज्य के विस्तारशील ‘शक्तिपीठ सर्किट’ का मुख्य केंद्र बनेगा और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तर प्रदेश की ‘शक्ति उपासना’ की परंपराओं से परिचित कराएगा. इस क्षेत्र में लगभग 208.09 करोड़ रुपये की लागत वाली विकास परियोजनाएं या तो नियोजित हैं या उन पर काम चल रहा है. इनमें ‘मां की पैड़ी’, पहुंच मार्ग, परिक्रमा मार्ग, मुख्य मंदिर के आसपास की सड़कें और अन्य सुविधाएं तथा अष्टभुजा और काली खोह मंदिरों के आसपास बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हैं.
रोपवे से पहाड़ी मंदिरों तक पहुंचना आसान
रोपवे के आ जाने से पहाड़ी मंदिरों तक पहुंचना आसान हो गया है, खासकर बुजुर्गों और परिवारों के लिए. वहीं, ‘मां काली खोह’ में 35.50 करोड़ रुपये की विकास परियोजना के लिए अक्टूबर में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है. उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम वाराणसी और विंध्याचल को जोड़ने वाले व्यवस्थित यात्रा कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दे रहा है, जिसमें पूरी ‘त्रिकोण परिक्रमा’ भी शामिल है. एक अन्य पैकेज में लखनऊ, वाराणसी, विंध्याचल और प्रयागराज को जोड़ा गया है. पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक मामलों के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटकों के लिए सुविधाएं और व्यवस्थित यात्रा पैकेज पर्यटकों को यहां अधिक समय तक रुकने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, जिससे स्थानीय व्यवसायों को फायदा होगा.
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