Home धर्म कहीं राम मंदिर की झलक, कहीं विज्ञान का कमाल! मन मोह लेंगे बंगाल के ये पंडाल, यहां देखें झलक

कहीं राम मंदिर की झलक, कहीं विज्ञान का कमाल! मन मोह लेंगे बंगाल के ये पंडाल, यहां देखें झलक

by Neha Singh 18 October 2026, 4:58 PM IST
18 October 2026, 4:58 PM IST
Durga Puja Pandals

Durga Puja Pandals: दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे प्रमुख त्योहार है, इसलिए इस दौरान वहां की हर सड़क और हर गली रोशनी, रंगों और भक्ति से जगमगा उठती है. जगह-जगह बनाए गए भव्य पंडाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन्हें बनाने की तैयारी महीनों पहले से ही शुरू हो जाती है. कहीं देवी दुर्गा की विशाल प्रतिमा देखने को मिलती है तो कहीं पूरा पंडाल किसी प्रसिद्ध मंदिर या भारतीय इतिहास की झलक को दिखाता है. हर पंडाल की अपनी अलग खासियत होती है. यही कारण है कि दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम बंगाल के यह पंडाल हर किसी का मन मोह लेते हैं.

इस साल भी, कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अन्य शहरों में आयोजकों ने अपनी कल्पना से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया है. सिलीगुड़ी में अयोध्या के राम मंदिर का प्रतिरूप बनाया गया है, जबकि कई जगहों पर महाभारत की महत्वपूर्ण घटनाओं को जीवंत किया गया है. इन पंडालों की सबसे खास बात यह है कि भक्ति भाव के साथ-साथ, हर पंडाल एक अलग संदेश भी देता है. आइए इस साल बंगाल समेत देशभर के कुछ प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों पर एक नजर डालते हैं.

सिलीगुड़ी बना राम मंदिर

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में इस साल की दुर्गा पूजा के लिए बनाया गया पंडाल वहां के लोगों को अयोध्या के दर्शन करवाता है. यहां ‘शक्तिगढ़ उज्ज्वल संघ’ ने अयोध्या के राम मंदिर से प्रेरित एक पंडाल तैयार किया है. लगभग 60 फीट ऊंचे इस पंडाल का केसरिया रंग और मंदिर जैसी बनावट इसे दूर से ही आकर्षक बनाते हैं. पूरे त्योहार के दौरान, यह पंडाल भक्तों और दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षणों में से एक बन गया है, जो इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.

भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक होने के नाते, राम मंदिर का करोड़ों लोगों के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व है. इसलिए, दुर्गा पूजा के पंडाल में इसकी प्रतिकृति देखना दर्शकों के लिए एक बहुत ही अनोखा अनुभव होता है. आयोजकों ने पंडाल के डिजाइन में राम मंदिर की पहचान और भव्यता को शामिल करने का प्रयास किया है. दुर्गा पूजा के दौरान, इस तरह की धार्मिक थीम लोगों को विभिन्न मंदिरों और भारतीय संस्कृति से जोड़ती है.

हावड़ा में सिद्धि विनायक मंदिर की थीम पर बना पंडाल

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में, बाली देशबंधु क्लब ने अपना दुर्गा पूजा पंडाल सिद्धि विनायक मंदिर की थीम पर तैयार किया है. इस पंडाल में देवी दुर्गा और भगवान गणेश की सुंदर मूर्तियां स्थापित की गई हैं. मंदिर से प्रेरित इस सजावट का उद्देश्य भक्तों को एक ऐसा माहौल देना है, जिसमें वे पूरी तरह डूब जाएं और उन्हें आध्यात्मिक शांति का अनुभव हो.

‘महाभारत’ के 18 प्रसंगों पर आधारित पंडाल

कोलकाता में EC ब्लॉक रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने अपनी 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘महाभारत’ की थीम पर एक अनोखा दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किया है. इस पंडाल में ‘महाभारत’ के 18 अलग-अलग प्रसंगों को प्रदर्शित किया गया है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी के लोगों को इस महान भारतीय महाकाव्य की महत्वपूर्ण घटनाओं और पात्रों से परिचित कराना है. प्रदर्शनी की शुरुआत भगवान गणेश द्वारा ‘महाभारत’ लिखने के दृश्य से होती है. इसके बाद, महाकाव्य के कई अहम पड़ाव सामने आते हैं, जिनमें कुरुक्षेत्र का युद्ध और भीष्म पितामह का देहावसान शामिल हैं. प्रदर्शनी का समापन युद्ध के बाद युधिष्ठिर की हस्तिनापुर की यात्रा के साथ होता है. इसके आगे बनी सीढ़ियों को स्वर्ग की ओर जाने वाले रास्ते के रूप में दर्शाया गया है.

इस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत ‘महाभारत’ की कथा को क्रमबद्ध तरीके से दिखाना है, जिससे लोग महाकाव्य की घटनाओं और उनके गहरे अर्थ को बेहतर ढंग से समझ सकें. आयोजकों को उम्मीद है कि जिन लोगों ने पहले टेलीविजन पर ‘महाभारत’ देखा है, उनके लिए यह पुरानी यादें ताजा करने वाला अनुभव होगा. साथ ही, इससे नई पीढ़ी को भी इस महाकाव्य और इससे जुड़ी कहानियों को करीब से जानने का मौका मिलेगा. इस पंडाल को तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगा. संस्था की गोल्डन जुबली मनाने के लिए, आयोजकों और कलाकारों ने मिलकर इस थीम को चुना. यहां देवी दुर्गा की मूर्ति को भी एक अनोखे रूप में पेश किया गया है, उन्हें शांति के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है.

वाराणसी में भगवान नरसिंह का पंडाल

    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दुर्गा पूजा के लिए एक अनोखी धार्मिक थीम को चुना गया है. सिगरा इलाके में बनाया गया यह पंडाल भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नरसिंह की कथा पर आधारित है. इस पंडाल में भगवान नरसिंह और असुर राज हिरण्यकशिपु की पौराणिक कथा को दर्शाया गया है, जो हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इस कहानी को अपनी थीम बनाकर, आयोजकों ने जनता के सामने एक धार्मिक कथा को नए और दिलचस्प तरीके से पेश किया है. ऐसे पंडाल बच्चों और युवाओं को भारतीय पौराणिक कथाओं से परिचित कराने का माध्यम भी बनते हैं.

    न्यू टाउन में ‘सनातन से विज्ञान तक’ की थीम

    पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन में ‘सनातन दुर्गा पूजा’ के आयोजकों ने इस साल के लिए ‘सनातन से विज्ञान तक’ थीम चुनी है. आयोजक वरुण बिस्वास के अनुसार, इस पूजा की शुरुआत पहली बार 2022 में हुई थी. उन्होंने बताया कि न्यू टाउन में दुर्गा पूजा आयोजित करने का सीएम शुभेंदु अधिकारी ने दिया था. इस साल ‘सनातन से विज्ञान तक’ थीम के जरिए, उनका मकसद नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और विज्ञान के बीच के संबंधों से परिचित कराना है. वरुण बिस्वास ने बताया कि वे प्राचीन ऋषियों और मुनियों द्वारा की गई खोजों और आविष्कारों को उजागर करके युवाओं को शिक्षित करना चाहते हैं. यह थीम धार्मिक परंपराओं को आधुनिक सोच से जोड़ने का प्रयास करती है.

    ‘विश्वरूपे विश्वरूपिणी’ थीम ने खींचा ध्यान

      कोलकाता में ही चेतला दुर्गा पूजा समिति की ‘विश्वरूपे विश्वरूपिणी’ थीम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. इस थीम के केंद्र में भगवान कृष्ण का विराट स्वरूप और देवी दुर्गा की दिव्य शक्ति है. आयोजकों ने देवी दुर्गा को एक ऐसी शक्ति के रूप में दर्शाने की कोशिश की है, जो पूरे ब्रह्मांड की रक्षा करती है. यह ‘माँ’ के उस रूप को भी उजागर करता है, जो अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करती है.

      समिति की सदस्य श्रीजिता दास ने बताया कि यह थीम देवी दुर्गा की शक्ति और मातृत्व के भाव, दोनों को सामने लाती है. उनके अनुसार, कारीगरों ने इस पंडाल को बनाने में बहुत मेहनत की है. इसकी प्रक्रिया काफी लंबी रही. यह थीम भक्तों को न केवल धार्मिक मान्यताओं से परिचित कराती है, बल्कि उन्हें कला की एक अनोखी दुनिया की भी सैर कराती है.

      सिलीगुड़ी में बना हवा महल पंडाल

      सिलीगुड़ी में ‘शक्तिगढ़ सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति’ ने राजस्थान के ‘हवा महल’ से प्रेरित पंडाल बनाकर अपनी प्लेटिनम जुबली मनाई. यहां देवी दुर्गा की प्रतिमा के साथ-साथ ‘शिव तांडव’ के लेजर शो ने भक्तों का ध्यान अपनी ओर खींचा. शक्तिगढ़ सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने 50 फीट ऊंचे और 80 फीट चौड़े लेजर प्रोजेक्शन का प्रदर्शन किया. इस शो में ‘महिषासुर मर्दिनी’ की झलक भी देखने को मिलती है.

      पूजा समिति के सचिव रथिन डे ने कहा, “हम हर साल अपने उत्सव में कुछ नया करने की कोशिश करते हैं. इस बार हमने राजस्थान के ‘हवा महल’ को हूबहू वैसा ही तैयार किया है, जैसा कि असली स्मारक है. अब लोगों को हवा महल देखने के लिए जयपुर जाने की जरूरत नहीं है, वे शक्तिगढ़ आकर इसका अनुभव ले सकते हैं. इसके साथ ही, हमने नई तकनीक का इस्तेमाल करके एक लेजर शो भी आयोजित किया है. यह प्रोजेक्शन हमारे 50 फीट ऊंचे और 80 फीट चौड़े पंडाल पर दिखाया जा रहा है, जिसमें प्रोजेक्शन के जरिए ‘महिषासुर मर्दिनी’ को भी दर्शाया गया है.”

      फलों और सब्जियों से बनी देवी दुर्गा की कलाकृति

      ओडिशा के पुरी बीच पर, मशहूर सैंड आर्टिस्ट और पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने देवी दुर्गा को समर्पित एक अनोखी कलाकृति बनाई है. इस कलाकृति की सबसे खास बात यह है कि इसे 32 अलग-अलग तरह के फलों और सब्जियों से तैयार किया गया है, जिसमें 22 तरह की सब्जियां और 10 तरह के फल शामिल हैं. अपनी नई सोच और रचनात्मकता के लिए मशहूर पटनायक ने एक बार फिर प्राकृतिक चीजों को कलाकृति में बदलकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. आमतौर पर दुर्गा पूजा के दौरान देवी दुर्गा की मूर्तियां मिट्टी, रंगों और सजावट के अन्य सामानों से बनाई जाती हैं, लेकिन पटनायक ने फलों और सब्जियों का इस्तेमाल करके एक अलग तरीका अपनाया. उनका मकसद सिर्फ देवी के प्रति अपनी श्रद्धा जताना ही नहीं था, बल्कि वे प्रकृति की सुंदरता और उसके संसाधनों के महत्व का संदेश भी देना चाहते थे. पटनायक के अनुसार, कलाकार हर साल देवी दुर्गा को एक नए रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं.

      इन पंडालों की खूबसूरती सिर्फ इनकी भव्यता में ही नहीं, बल्कि उन विचारों में भी है जिन्हें कलाकार और आयोजक जनता तक पहुंचाना चाहते हैं. यही कारण है कि दुर्गा पूजा एक ऐसा उत्सव है, जिसमें न केवल आस्था, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और सामाजिक एकता भी समाहित है.

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      News Source: ANI

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