UGC Act Controversy: UGC एक्ट 2026 आने के बाद देशभर सवर्ण जाति के लोग इसका विरोध कर रहे हैं. अब कानून के विरोध में भाजपा नेता और अधिकारी तक इस्तीफा दे रहे हैं.
27 January, 2025
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नया एक्ट आने के बाद राजनीतिक भूचाल आ गया है. देशभर सवर्ण जाति के लोग इसका विरोध कर रहे हैं. विवाद इतना बढ़ गया है कि भाजपा के अपने नेता ही इसका विरोध कर रहे हैं. कल 26 जनवरी के दिन बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इसके विरोध में इस्तीफा देकर मामले को और गरमा दिया. इसके बाद से लगातार इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है. सिटी मजिस्ट्रेट के बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष ने भी इस्तीफा दे दिया है और इसके बाद नोएडा महानगर के उपाध्यक्ष ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है.
इस्तीफों का सिलसिला जारी
UGC कानून के विरोध में रायबरेली में BJP किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी का ने इस्तीफा दे दिया है. त्रिपाठी जी ने लिखा ‘सवर्ण जाति के बच्चों के विरुद्ध लाये गये UGC जैसे काले कानून के कारण मैं अपने पद से त्याग देता हूं. यह कानून समाज के प्रति अत्यंत घातक है और विभाजनकारी भी है. इस बिल से मैं पूर्णतः असंतुष्ट हूं. भाजपा सरकार के इस अनैतिक बिल का समर्थन मेरे आत्म सम्मान और विचारधारा से एकदम अलग है.

बीजेपी के नेता ही कर रहे विरोध
इसी तरह भाजपा युवा मोर्चा के नोएडा महानगर उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा लखनऊ में कम्हरावां गांव से मंडल महामंत्री अंकित तिवारी समेत 11 बीजेपी नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इन सभी का कहना है कि पार्टी अपने उद्देश्य से भटक रही है और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है. इस्तीफा देने का सिलसिला बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफा देने से शुरू हुआ और अब अन्य राज्यों में भी बीजेपी के नेता इसका विरोध कर रहे हैं. यूजीसी के कानून के खिलाफ यूपी, बिहार से लेकर राजस्थान तक में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. सवर्ण लोग यूजीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.
सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए UGC नियमों को “काला कानून” बताया और आरोप लगाया कि ये कॉलेजों के एकेडमिक माहौल को खराब करेंगे और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने 13 जनवरी को लागू हुए UGC रेगुलेशन 2026 पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इनसे ब्राह्मण समुदाय के सदस्यों के खिलाफ अत्याचार होंगे. उन्होंने दावा किया कि इसके प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और इससे सामाजिक अशांति और अंदरूनी मतभेद पैदा हो सकते हैं. अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से हुई मारपीट के विरोध में इस्तीफा दे दिया है.
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