Home Top News UP में चुनावी डेटा पर बड़ा खुलासा: स्थायी पलायन बना बड़ी चुनौती, पते पर नहीं मिले 1.30 करोड़ वोटर

UP में चुनावी डेटा पर बड़ा खुलासा: स्थायी पलायन बना बड़ी चुनौती, पते पर नहीं मिले 1.30 करोड़ वोटर

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SIR IN UP: उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने चुनावी अनियमितताओं के पीछे एक चौंकाने वाला कारण उजागर किया है.

SIR IN UP: उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने चुनावी अनियमितताओं के पीछे एक चौंकाने वाला कारण उजागर किया है. आधिकारिक आंकड़ों में बताया गया है कि प्रदेश में स्थायी प्रवास (Permanent Migration) चुनावी विसंगतियों का मुख्य कारण बनकर उभरा है. 27 दिसंबर 2025 तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 2.88 करोड़ मतदाता प्रपत्र वितरित नहीं हो सके, जिनमें से लगभग 1.30 करोड़ मामले मतदाताओं के स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर बस जाने से संबंधित है. यह संख्या कुल मतदाताओं का 8.40 प्रतिशत है. चुनाव अधिकारियों ने बताया कि यह प्रवृत्ति बड़े पैमाने पर अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय पलायन के कारण उत्पन्न हुई है. इसका सर्वाधिक प्रभाव गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा और वाराणसी जैसे शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में देखा गया है. कुछ जिलों में तो 20% से अधिक मतदाता अपने मूल पते पर नहीं पाए गए हैं.

चुनाव आयोग का डेटा अपडेशन पर जोर

चुनाव आयोग अब इन विसंगतियों को दूर करने और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए National Voters’ Service Portal के माध्यम से डेटा अपडेशन पर जोर दे रहा है. स्थायी रूप से स्थानांतरण के 1,29,77,472 मामलों के अलावा दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी में लापता या अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं. इस श्रेणी में 79,52,190 मामले हैं, जो कुल मतदाताओं का 5.15 प्रतिशत है. इसका मुख्य कारण अस्थायी प्रवास, निवास स्थान में बार-बार परिवर्तन और गलत पते हैं. पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु के कारण 46,23,796 प्रपत्र यानी कुल मतदाताओं का 2.99 प्रतिशत दर्ज किए गए, जो मतदाता सूची में पुराने नामों को दर्शाता है. यह जानकारी विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता सूची में संशोधन के बीच लंबे अंतराल के कारण हुई है. 25,47,207 मतदाता (1.65 प्रतिशत) अन्यत्र पंजीकृत पाए गए, जबकि 7,74,472 प्रपत्र (0.50 प्रतिशत) अपूर्ण या गलत विवरण जैसे अन्य कारणों के अंतर्गत आए. जिलावार विश्लेषण से पता चलता है कि गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा और वाराणसी जैसे शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरण के कारण सबसे अधिक प्रपत्र एकत्र नहीं किए जा सके.

6 मार्च को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची

अधिकारियों ने बताया कि बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज सहित सीमावर्ती जिलों में बड़ी संख्या में मतदाता लापता या अनुपस्थित पाए गए हैं. चुनाव अधिकारियों ने कहा कि मृत्यु, प्रवासन, दोहरी प्रविष्टि और अन्य कारणों के आधार पर वर्गीकरण से अपात्र और दोहरी प्रविष्टियों को हटाने और आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों की सटीकता में सुधार करने में मदद मिलेगी. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के कार्यक्रम में भी संशोधन किया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने 30 दिसंबर को एक बयान में कहा कि मतदाता सूची का मसौदा अब 6 जनवरी 2026 को और अंतिम सूची 6 मार्च को प्रकाशित की जाएगी. 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी. उन्होंने कहा कि नोटिस चरण, दावों और आपत्तियों का निपटान और गणना प्रपत्रों पर निर्णय 27 फरवरी तक जारी रहेंगे, जिसके बाद 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.

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