Illegal Phone Exchange: बिहार में पुलिस ने अवैध फोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया है. इस फोन एक्सचेंज के माध्यम से साइबर क्राइम को अंजाम दिया जा रहा था.
Illegal Phone Exchange: बिहार में पुलिस ने अवैध फोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया है. इस फोन एक्सचेंज के माध्यम से साइबर क्राइम को अंजाम दिया जा रहा था. अब सीबीआई ने इस केस की जांच अपने हाथ में ले ली है. सीबीआई (CBI) ने बिहार के नारायणपुर गांव से संचालित एक अवैध फोन एक्सचेंज की जांच अपने हाथ में ले ली है. यह एक्सचेंज अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके VOIP (Voice Over Internet Protocol) कॉल को वॉयस कॉल में परिवर्तित कर साइबर अपराध कर रहा था. जांच एजेंसी CBI ने भोजपुर के नारायणपुर गांव में एक्सचेंज का संचालन कर रहे मुख्य आरोपी मुकेश कुमार के साथ-साथ मालदा स्थित प्वाइंट ऑफ सेल ऑपरेटर रेजाउल हक और मुक्तादिर हुसैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिन्होंने कुमार द्वारा इस्तेमाल किए गए 67 संदिग्ध सिम बेचे थे.
किए गए थे 20,000 से अधिक कॉल
पिछले साल जुलाई में बिहार पुलिस द्वारा इस अवैध फोन एक्सचेंज का खुलासा होने के बाद राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया था. केंद्र सरकार ने हाल ही में सीबीआई को मामला सौंपने की अधिसूचना जारी की, जिसके बाद सीबीआई ने बिहार पुलिस की एफआईआर को अपने मामले के रूप में पुनः दर्ज किया. बिहार पुलिस की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट ने नारायणपुर में एक अत्याधुनिक सिम बॉक्स सेटअप का पता लगाया था, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल और संदेशों को स्थानीय नंबरों के माध्यम से रूट करने के लिए कई सिम का उपयोग करता था. आरोपी अक्सर उच्च अंतरराष्ट्रीय शुल्कों से बचने या घोटालों के लिए ऐसा करते थे. पुलिस को यह भी पता चला कि नारायणपुर से इस सेटअप का उपयोग करके विभिन्न नंबरों पर 20,000 से अधिक कॉल किए गए थे.
साइबर ठगी और आतंकी कनेक्शन की आशंका
छापेमारी के दौरान बिहार पुलिस को कुमार के अटारी में चालू हालत में सिम बॉक्स मिला. राज्य पुलिस ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया था कि तेलंगाना पुलिस ने भी नारायणपुर की पहचान की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि VOIP सिस्टम का उपयोग विदेशों में आतंकी समूह अपने स्लीपर सेल, राष्ट्रविरोधी तत्वों और उनके कैडरों से संपर्क करने और एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए कर रहे थे. बिहार पुलिस ने आरोप लगाया था कि इस एक्सचेंज का उपयोग देश भर में बड़े पैमाने पर साइबर अपराध करने के लिए किया जा रहा था. पुलिस ने आरोप लगाया था कि उनकी जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मालदा में सक्रिय किए गए अवैध सिम का उपयोग उनके द्वारा बरामद किए गए सिम बॉक्स में किया जा रहा था. इन सभी सिम का पता मालदा के रेजाउल हक और मुक्तादिर हुसैन से लगाया गया.
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