Pakistan: हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में काफी दिनों से उथल-पुथल मची हुई है. शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए.
06 March, 2026
हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इन दिनों हालात काफी ज्यादा तनावपूर्ण हैं. शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद समेत देश के कई बड़े शहरों में सैकड़ों की संख्या में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए. उनका ये प्रदर्शन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के हमलों में हुई मौत के खिलाफ किया गया था. माहौल इतना गर्म था कि इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास ने अपनी सिक्योरिटी को लेकर अलर्ट जारी कर दिया. इतना ही नहीं वहां रह रहे अमेरिकियों को घरों में रहने की सलाह दी है.

इजरायल के खिलाफ लोग
शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद करीब 300 प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद में धरना दे दिया. प्रदर्शनकारी अपने हाथों में खामेनेई के पोस्टर लिए हुए थे और अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे. पुलिस ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए अमेरिकी दूतावास की तरफ जाने वाली सड़कों पर बड़े-बड़े शिपिंग कंटेनर्स खड़े कर दिए, ताकि भीड़ दूतावास तक न पहुंच सके. हालांकि, बाद में प्रदर्शनकारियों ने दूतावास की तरफ मार्च न करने का फैसला किया और शांतिपूर्ण तरीके से धरना खत्म करने की बात कही.
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कराची में हिंसा
बता दें कि ये गुस्सा सिर्फ इस्लामाबाद तक सीमित नहीं है. इससे पहले रविवार को कराची में हालात बेकाबू हो गए थे. प्रदर्शनकारियों ने काउंसलेट पर हमला बोल दिया था, खिड़कियां तोड़ दी थीं और इमारत में आग लगाने की कोशिश की थी. पुलिस को भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा. इस हिंसा में अब तक कराची और नॉर्थ एरिया में कुल मिलाकर करीब 23 लोगों की जान जा चुकी है.

सिक्योरिटी अलर्ट
ईरान के साथ जारी इस जंग ने पाकिस्तान के अंदर भी शिया और सुन्नी दोनों समुदायों में हलचल पैदा कर दी है. शिया समुदाय के लिए खामेनेई एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक नेता थे, जिनकी मौत ने लोगों को गुस्से से भर दिया है. सिक्योरिटी अलर्ट को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने अपने नागरिकों को पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में जाने से मना किया है, क्योंकि वहां आतंकवाद का खतरा बढ़ गया है. फिलहाल पाकिस्तान की सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात है और सरकार की कोशिश है कि ये विरोध प्रदर्शन दंगों में न बदल जाए.
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