The Chai Capital Of India: चाय लवर्स का दिन बिना एक कप चाय के शुरू नहीं होता. अगर आप भी उन्हीं में से हैं, तो भारत की टी कैपिटल के बारे में भी जान लीजिए.
15 January, 2026
The Chai Capital Of India: क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी सुबह की कड़क चाय का प्याला असल में कहां से आता है? अगर आप चाय के शौकीन हैं, तो आपको जवाब पता होगा और वो है, असम. नॉर्थ ईस्ट का ये खूबसूरत राज्य न सिर्फ भारत की ‘टी कैपिटल’ है, बल्कि ये वो जगह भी है जहां मॉर्डन इंडिया की चाय की कहानी शुरू हुई थी. यानी अगर आप चाय को लेकर सीरियस हैं, तो असम आपकी ट्रैवल लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए. दूर-दूर तक फैले चाय के बागान, सुबह की पहली किरण के साथ ताजी पत्तियों की खुशबू और बांस की टोकरियों के साथ चलते किसान, यही है असम की असली पहचान. असम भारत के टोटल चाय प्रोडक्शन का 50% से ज्यादा हिस्सा पैदा करता है. हालांकि, इन आंकड़ों से अलग असम का चाय के साथ गहरा और बहुत ही दिलचस्प रिश्ता है.

मिट्टी में चाय की खुशबू
असम में 800 से ज्यादा चाय के बागान हैं, जिनमें से कई ब्रिटिश काल से चले आ रहे हैं. ब्रह्मपुत्र घाटी का यूनीक क्लाइमेट और वहां की उपजाऊ मिट्टी चाय उगाने के लिए दुनिया में सबसे बेहतरीन मानी जाती है. यहां होने वाली भारी बारिश और उमस वाला मौसम चाय को वो स्वाद देता है, जो दुनिया भर में असम टी की पहचान बन चुका है. ये चाय इतनी कड़क होती है कि आपकी नींद उड़ा दे और इतनी स्मूथ कि आपको सुकून दे सके.
भारत पहुंचने की कहानी
चाय का इतिहास किसी थ्रिलर फिल्म जैसा है. दरअसल, 19वीं सदी की शुरुआत में, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी चीन की चाय मोनोपोली को तोड़ना चाहती थी. उन्होंने रॉबर्ट फॉर्च्यून नाम के एक बोटेनिस्ट को सीक्रेट मिशन पर चीन भेजा ताकि वो चाय के पौधे और उसकी खेती के सीक्रेट चुरा सके. फॉर्च्यून इस काम में सक्सेसफुल रहा. वो चीन से चाय के पौधे और मजदूर भारत ले आया. लेकिन असली ट्विस्ट तब आया जब उसे पता चला कि असम के पहाड़ों में पहले से ही जंगली चाय के पौधे उग रहे थे. ये पौधे असम की क्लाइमेट के लिए बिल्कुल परफेक्ट थे. 1850 के दशक तक, अंग्रेजों ने असम में बहुत बड़े-बड़े चाय के बागान बनाए गए.

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मसाला चाय
शुरुआत में भारतीयों को काली चाय पसंद नहीं थी. ये महंगी होने के साथ-साथ कड़वी भी थी. फिर अंग्रेजों ने रेलवे स्टेशन्स पर फ्री में चाय बांटकर इसका प्रमोशन किया. हालांकि, भारतीयों ने अपना दिमाग लगाया और उन्होंने चाय में दूध, चीनी और अदरक-इलायची जैसे मसाले मिला दिए. इससे ये सस्ती भी हो गई और टेस्टी भी. यहीं से पैदा हुई हमारी फेवरेट ‘मसाला चाय’.
असम की खूबसूरती
असम पहुंचना अब काफी आसान है, बस थोड़ी प्लानिंग की जरूरत है. अगर आप फ्लाइट से जा रहे हैं, तो गुवाहाटी का पॉपुलर गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बेस्ट रहेगा. यहां से आप जोरहाट या डिब्रूगढ़ जा सकते हैं. वहीं, अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो भी गुवाहाटी एक बड़ा रेलवे हब है. राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें इसे दिल्ली और कोलकाता से जोड़ती हैं. रोड़ ट्रिप करना चाहते हैं तो, सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रास्ते असम तक की ड्राइविंग बहुत खूबसूरत है.

चाय के बागानों का नज़ारा
असम के बागान सिर्फ खेत नहीं, बल्कि जीते-जागते म्यूजियम हैं. जोरहाट को टी कैपिटल भी कहा जाता है. यहां दुनिया का सबसे पुराना टी रिसर्च सेंटर है.
डिब्रूगढ़- यहां सबसे बेहतरीन ‘ऑर्थोडॉक्स टी’ मिलती है, जिसे हाथों से तैयार किया जाता है.
काजीरंगा- यहां आप सुबह-सुबह गेंडे देख सकते हैं और दोपहर में बागानों के बीच चाय की चुस्कियां ले सकते हैं.
ना करें मिस
ब्रिटिश काल के पुराने बंगलों में रुकना आपको टाइम में काफी पीछे ले जाएगा. ऊंची छतें, लकड़ी के फर्श और खिड़की से दिखते चाय के बागान, आपका दिन बना देंगे. इसके अलावा वाइन टेस्टिंग की तरह यहां आप यहां चाय चखना भी सीख सकते हैं. कड़क सीटीसी और खुशबूदार ऑर्थोडॉक्स चाय के बीच का अंतर आपको यहां अच्छी तरह से समझ आएगा. वहीं, चाय के बागानों में सुबह की सैर करना अपने आपमें अलग एक्सपीरियंस होगा. सूरज की पहली किरण के साथ बागानों में टहलना बहुत ही सुकून भरा होता है. घूमने-फिरने और इतिहास जानने के अलावा आप सीधे बागान से ताजी चाय भी खरीद सकते हैं.

फेमस मार्केट
गुवाहाटी का ‘फैंसी बाजार’ चाय खरीदने के लिए सबसे अच्छी जगह है. ये गुवाहाटी की सबसे पुरानी और बिजी मार्केट है. यहां की चाय की दुकानों में आपको हर ग्रेड और क्वालिटी की चाय मिल जाएगी. ऐसे में जब आप अगली बार चाय की चुस्की लें, तो याद रखिएगा कि उस प्याले के पीछे असम के बागानों में काम करने वालों की कड़ी मेहनत और एक लंबा इतिहास छिपा है.
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