प्रसिद्ध गीतकार और कवि जावेद अख्तर ने साहित्य और कविता की उपेक्षा पर चिंता जताई है. कहा कि यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी साहित्य और कविता से दूर होती जा रही है.
Javed Akhtar: प्रसिद्ध गीतकार और कवि जावेद अख्तर ने साहित्य और कविता की उपेक्षा पर चिंता जताई है. कहा कि यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी साहित्य और कविता से दूर होती जा रही है. प्रसिद्ध गीतकार और कवि जावेद अख्तर ने शुक्रवार को कहा कि पिछले कुछ दशकों में देश की शिक्षा प्रणाली में साहित्य और कविता को उतना महत्व नहीं दिया गया है जितना मिलना चाहिए था. एक्साइड कोलकाता साहित्यिक सम्मेलन में वैश्विक परिवर्तन के दौर में कविता और लेखक की भूमिका पर आयोजित एक सत्र में वर्चुअल रूप से भाग लेते हुए अख्तर ने सवाल उठाया कि क्या घरों में कविता और साहित्य पर अन्य विषयों की तरह चर्चा होती है? साहित्यिक सम्मेलन के दूसरे दिन मुंबई स्थित अपने घर से हुई बातचीत में अख्तर ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में हमारी शिक्षा प्रणाली में साहित्य और कविताओं को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है. उर्दू जैसी भाषाओं के पाठकों की संख्या घट रही है, लेकिन उर्दू कविताओं के पाठकों की संख्या बढ़ रही है. यह एक विरोधाभास है.
मौन व्यक्ति की आवाज है कविता
कविता के प्रति अपने दृष्टिकोण के बारे में पूछे जाने पर अख्तर ने कहा कि यह समाज की आवाज है, मौन व्यक्ति की आवाज है. उन्होंने कहा कि हर तरह की भावना – प्रेम, स्वीकारोक्ति और पीड़ा के लिए कविता है, जिसका अपना रूपक होता है क्योंकि संदेश सूक्ष्म होना चाहिए. कवियों की अभिव्यक्ति की विभिन्न शैलियों और तरीकों पर टिप्पणी करते हुए 80 वर्षीय गीतकार-संगीतकार ने कहा कि अलग-अलग रचनाकार एक ही विषय पर अलग-अलग तरह से अपनी बात रखते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया ने कवियों को अधिक प्रत्यक्ष और उपदेशात्मक बना दिया है, तो अख्तर ने कहा कि जीवन एक रेखीय मार्ग नहीं है. कविता अंतर्दृष्टि और सूक्ष्म अभिव्यक्ति को सामने लाती है जो बहुआयामी होती है और एक कवि को इन विभिन्न स्तरों को समझना होता है.
कहा- धर्म पर बरतनी चाहिए सावधानी
जब अख्तर से पूछा गया कि क्या कविता क्रांति से उपजती है तो अख्तर ने कहा कि यह समाज के प्रति असंतोष को व्यक्त कर सकती है. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी सोचा है कि अगर उन्होंने वर्षों में लिखी गई कविताएं और गीत न लिखे होते तो क्या होता, तो अख्तर ने कहा कि हर व्यवस्था के दो रास्ते होते हैं – आपको एक चुनना होता है. यह मत सोचिए कि क्या होता. अगर उन्हें कभी लिखते समय डर लगा हो तो अख्तर ने इसका जवाब नकारात्मक में देते हुए कहा कि अगर डर लगता है तो आपको अपने डर के बारे में लिखने में सक्षम होना चाहिए. धर्म के बारे में लिखने पर अख्तर ने कहा कि सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने कहा कि धार्मिक लोगों का अपना तर्क होता है और उनकी धार्मिक मान्यताएं भावनाओं से प्रेरित होती हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई धर्म के बारे में बात करता है तो नैतिक अधिकारों पर सवाल उठ सकते हैं.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
